अमेरिका जाने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए राहत की खबर या नई मुसीबत? जानें एस जयशंकर ने मार्को रुबियो से क्या कहा

बीते रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने भारतीयों के वीजा और इमीग्रेशन से जुड़ी समस्या पर बातचीत की।

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जयशंकर ने रुबियो के साथ वीजा संबंधी चिंताएं जताईं, जिन्होंने 'कुछ समस्याएं' स्वीकार कीं लेकिन अमेरिकी आव्रजन सुधार का बचाव किया
जयशंकर ने रुबियो के साथ वीजा संबंधी चिंताएं जताईं, जिन्होंने 'कुछ समस्याएं' स्वीकार कीं लेकिन अमेरिकी आव्रजन सुधार का बचाव किया

By Gaurav Kumar:

भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव देखने को मिल रहा है। इसी बीच बीते रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने भारतीयों के वीजा और इमीग्रेशन से जुड़ी समस्या पर बातचीत की।

जयशंकर ने साफ कहा कि अमेरिका अगर अवैध प्रवास पर सख्ती कर रहा है, तो इसका असर उन भारतीय प्रोफेशनल्स पर नहीं पड़ना चाहिए जो कानूनी तरीके से वहां काम और रिसर्च के लिए जाते हैं। यह बातचीत दोनों नेताओं की बैठक के बाद हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आई।

जयशंकर ने क्या कहा?

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंध हैं। जयशंकर ने रुबियो को वीजा जारी करने में वैध यात्रियों को हो रही परेशानियों के बारे में बताया है।

जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत गैरकानूनी और Irregular Migration के खिलाफ सहयोग करने को तैयार है, लेकिन इससे कानूनी रूप से अमेरिका जाने वाले भारतीयों को परेशानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि कानूनी गतिशीलता हमारे बिजनेस, टेक्नोलॉजी और रिसर्च सहयोग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

 भारतीय प्रोफेशनल्स क्यों चिंतित हैं?

पिछले कुछ समय में अमेरिका की H1B वीजा नीति और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर कई बदलावों की चर्चा हुई है। हाल ही में अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा (USCIS) की नई गाइडलाइन में कुछ ग्रीन कार्ड एप्लीकेंटों को अपने देश लौटकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया। इससे अमेरिका में काम कर रहे कई भारतीय प्रोफेशनल्स में परेशानी बढ़ गई है।

भारतीय आईटी सेक्टर और टेक प्रोफेशनल्स लंबे समय से H1B वीजा पर अमेरिका में काम करते रहे हैं। इसलिए किसी भी नए नियम का असर सीधे हजारों भारतीय परिवारों पर पड़ सकता है।

 रुबियो ने क्या जवाब दिया?

मार्को रुबियो ने भारत की चिंताओं को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही अमेरिका की नई इमिग्रेशन नीति का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि जब भी किसी बड़े सिस्टम में सुधार किए जाते हैं, तो शुरुआती दौर में कुछ दिक्कतें आना सामान्य बात होती है।

रुबियो ने कहा,जब भी आप लोगों को प्रवेश देने की प्रक्रिया में बदलाव करते हैं तो शुरुआत में कुछ कठिनाइयां और रुकावटें होती हैं।हालांकि उन्होंने यह भी साफ कहा कि नई नीति किसी एक देश, खासकर भारत, को निशाना बनाकर नहीं बनाई गई है।

 अमेरिका ने क्यों सख्त किया इमिग्रेशन सिस्टम?

रुबियो ने कहा कि अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में बड़े इमिग्रेशन संकट का सामना कर रहा है। उनके मुताबिक 20 मिलियन से ज्यादा लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और हमें उस चुनौती से निपटना पड़ा है। हमारा लक्ष्य एक बेहतर और ज्यादा कुशल इमिग्रेशन सिस्टम बनाना है।

भारत-अमेरिका रिश्तों में क्यों बढ़ा तनाव?

रुबियो का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले एक साल के दौरान कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है। इनमें भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ, H1B फीस में बढ़ोतरी, नई इमिग्रेशन गाइडलाइंस और डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर दावें से दोनों देशों के बीच तनाव थोड़ा बढ़ा है।

दरअसल, ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाकर तनाव कम करवाया। लेकिन भारत ने इस दावे को लगातार खारिज किया है।

फिलहाल भारत की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अमेरिका की नई इमिग्रेशन नीति का असर उन भारतीय छात्रों, इंजीनियरों, रिसर्चर्स और टेक प्रोफेशनल्स पर न पड़े, जो कानूनी तरीके से वहां काम कर रहे हैं।

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