रूस ने भारत को ऑफर की 360 किमी प्रति घंटे की Ivolga ट्रेन, 80% तक लोकल मैन्युफैक्चरिंग का प्रस्ताव

भारत के हाई स्पीड रेल नेटवर्क को लेकर रूस ने नया प्रस्ताव दिया है। रूसी कंपनी Transmashholding ने Ivolga ट्रेन तकनीक की पेशकश की है, जिसकी रफ्तार 360 किमी प्रति घंटा तक बताई गई है। प्रस्ताव में 80% तक स्थानीय सामग्री और भारत में निर्माण की संभावना भी शामिल है, जिससे Make in India को बढ़ावा मिल सकता है।

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ये है रूस की हाई स्पीड ट्रेन इवोल्गा. (File Photo: Wiki)
ये है रूस की हाई स्पीड ट्रेन इवोल्गा. (File Photo: Wiki)

In Short

  • रूस ने भारत को Ivolga हाई स्पीड ट्रेन तकनीक ऑफर की है।
  • ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 360 किमी प्रति घंटे तक बताई गई है।
  • प्रस्ताव में 80% तक स्थानीय सामग्री और भारत में निर्माण की संभावना शामिल है।

By Shakshi:

भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को आगे बढ़ाने की तैयारियों के बीच रूस की ओर से एक नया प्रस्ताव सामने आया है। रूसी रेल कंपनी Transmashholding ने भारत को अपनी Ivolga हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक की पेशकश की है। दावा है कि इसका हाई-स्पीड वर्जन 360 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार हासिल कर सकता है। प्रस्ताव की एक और खास बात भारत में 80% तक स्थानीय सामग्री के इस्तेमाल की संभावना है।

INNOPROM India में सामने आया प्रस्ताव

रूस की ओर से Ivolga ट्रेन का प्रस्ताव INNOPROM India कार्यक्रम के दौरान सामने आया। कंपनी भारत में केवल तैयार ट्रेन उपलब्ध कराने के बजाय स्थानीय स्तर पर उत्पादन और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं भी देख रही है।

अगर इस दिशा में बातचीत आगे बढ़ती है तो यह भारत की Make in India योजना के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि फिलहाल इसे एक प्रस्ताव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए और किसी खरीद या हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

360 किमी प्रति घंटे तक रफ्तार का दावा

Ivolga के प्रस्तावित हाई-स्पीड वर्जन की अधिकतम रफ्तार 360 किलोमीटर प्रति घंटा तक बताई गई है। आठ डिब्बों वाली ट्रेन में करीब 642 यात्रियों के बैठने की क्षमता हो सकती है और इसकी सेवा अवधि करीब 30 साल बताई गई है।

प्रस्ताव में 80% तक स्थानीय सामग्री इस्तेमाल करने की संभावना सबसे अहम पहलुओं में शामिल है। ऐसा होने पर ट्रेन के कई हिस्सों का निर्माण भारत में किया जा सकता है और घरेलू रेल उद्योग को नई तकनीक हासिल करने का मौका मिल सकता है।

वंदे भारत स्लीपर से पहले ही जुड़ी है रूसी कंपनी

Transmashholding भारतीय रेलवे क्षेत्र के लिए नया नाम नहीं है। कंपनी भारतीय साझेदार के साथ वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना से पहले ही जुड़ी हुई है। इसके तहत 120 ट्रेन सेट तैयार किए जाने हैं।

अब Ivolga का प्रस्ताव भारत और रूस के बीच रेल क्षेत्र में सहयोग को हाई-स्पीड सेगमेंट तक ले जाने की संभावना दिखाता है।

बुलेट ट्रेन से अलग होगा अगला मुकाबला

भारत फिलहाल मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर काम कर रहा है, जिसके लिए जापान की Shinkansen तकनीक अपनाई गई है। ऐसे में रूस की Ivolga पेशकश को सीधे इस मौजूदा परियोजना का विकल्प मानना जल्दबाजी होगी।

भविष्य में अगर भारत नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए अलग-अलग तकनीकों और कंपनियों के प्रस्ताव मांगता है तो लागत, सुरक्षा, स्थानीय उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण जैसे पहलुओं के आधार पर रूसी प्रस्ताव की उपयोगिता देखी जा सकती है।

सिर्फ ट्रेन नहीं, नए ट्रैक की भी होगी जरूरत

360 किमी प्रति घंटे जैसी रफ्तार हासिल करने के लिए केवल हाई-स्पीड ट्रेन होना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए विशेष ट्रैक, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, सुरक्षा व्यवस्था और अलग तरह के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।

यही वजह है कि रूस का यह प्रस्ताव अभी भारत के लिए एक तकनीकी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। आगे की तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत किस दिशा में बढ़ती है और भारत अपने भविष्य के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए किस तकनीक को चुनता है।

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