SIT ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल! 40 दिन के CCTV में 70 चोरी की घटनाएं, रिकॉर्ड रखने में भारी गड़बड़ी और...

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 40 दिन के CCTV फुटेज में 70 बार चोरी की घटनाएं दिखीं। जांच में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां, रिकॉर्ड रखने में लापरवाही और कई कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है।

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In Short

  • एसआईटी के मुताबिक, 40 दिन के CCTV फुटेज में करीब 70 बार चढ़ावे की चोरी की घटनाएं दर्ज हुईं।
  • जांच में खुलासा हुआ कि चढ़ावे के कैश और जेवरों का सही रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था और सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां थीं।
  • रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों पर चोरी और सहयोग के आरोप लगाए गए हैं, जबकि सुरक्षा नियमों के पालन में लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय की गई है।

By Gaurav Kumar:

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में गठित एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) की शुरुआती रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी सिर्फ कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां भी सामने आई हैं। एसआईटी का कहना है कि इन्हीं कमियों का फायदा उठाकर लंबे समय तक चोरी होती रही।

चढ़ावे के कैश और जेवर एक साथ ले जाए जाते थे

एसआईटी की जांच में पता चला कि मंदिर की हुंडियों से निकाली गई कैश और श्रद्धालुओं के चढ़ाए गए जेवर एक ही बॉक्स में रखकर काउंटिंग रूम तक ले जाए जाते थे। काउंटिंग रूम में बॉक्स खुलने के बाद अगर उसमें कोई जेवर मिलता था तो उसे अलग हुंडी नंबर-12 में डाल दिया जाता था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि किस हुंडी से कितने बॉक्स आए, कितनी रकम निकली, कितने बॉक्स की गिनती हुई और किस बॉक्स से कितने जेवर मिले, इसका कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था।

कीमती सामान की सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं हुआ

एसआईटी के मुताबिक, बहुमूल्य वस्तुओं को अलग करते समय उनका वजन करने, फोटो लेने या सील करने जैसी जरूरी प्रक्रिया भी नहीं अपनाई जाती थी। इससे बाद में किसी भी सामान का सही हिसाब मिलाना मुश्किल हो जाता था।

बिना अनुमति एक व्यक्ति के पास रहती थी हुंडियों की चाबी

जांच में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास बिना किसी लिखित अधिकार के चढ़ावा पात्रों की चाबियां रहती थीं। एसआईटी ने इसे बेहद जोखिम भरा और अनाधिकृत बताया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए एमओयू में ट्रस्ट की ओर से डॉ. अनिल मिश्रा को कैश निकलवाने, गिनती कराने और बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी दी गई थी।

CCTV में 40 दिन के भीतर 70 बार चोरी दिखी

एसआईटी ने 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 तक के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, 40 दिन की रिकॉर्डिंग में करीब 70 बार चोरी की घटनाएं दिखाई दीं।

फुटेज में कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले नोट अपने कपड़ों, जेब, जूतों और दूसरी जगहों पर छिपाते नजर आए। कई वीडियो में दूसरे कर्मचारी उन्हें आड़ देकर चोरी में मदद करते भी दिखाई दिए।

एसआईटी का कहना है कि बैंक खातों और कर्मचारियों के बयानों से यह भी साफ हुआ कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग शुरू होने से पहले भी चोरी होती रही थी।

किन लोगों की भूमिका सामने आई?

रिपोर्ट के मुताबिक, अविनाश शुक्ला और टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव चोरी करने में सबसे ज्यादा सक्रिय पाए गए। दोनों कई बार नोटों की गड्डियां और खुले पैसे हटाते और छिपाते हुए सीसीटीवी में दिखाई दिए।

वहीं अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा और करुणेश पांडे पर चोरी में मदद करने के आरोप लगे हैं। एसआईटी ने टिन्नू यादव को चोरी की साजिश रचने, चोरी के लिए उकसाने और सहयोग करने का दोषी माना है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टिन्नू यादव की सिफारिश पर ही 15 अप्रैल 2026 से उसके भतीजे मनीष यादव की काउंटिंग रूम में ड्यूटी लगाई गई थी।

बाथरूम से मिले थे 2.25 लाख रुपये

एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक, 4 जून 2026 को ट्रस्ट को मंदिर परिसर के बाथरूम से 2 लाख 25 हजार रुपये भी बरामद हुए थे।

जांच में यह भी सामने आया कि करीब 15 हजार रुपये महीने की नौकरी करने वाले कुछ आरोपियों के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा हुई। उन्होंने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी कराई और कई बड़े वित्तीय लेनदेन किए।

सुरक्षा व्यवस्था में मिली कई बड़ी खामियां

एसआईटी ने कहा कि ट्रस्ट की ओर से कई बुनियादी सुरक्षा नियमों का पालन ही नहीं किया जा रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक,

  • कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं होती थी।
  • जेब रहित वर्दी पहनने का नियम लागू नहीं किया गया।
  • मोबाइल फोन, चाबी और दूसरी निजी चीजें अंदर ले जाने पर रोक नहीं थी।
  • हर हुंडी की अलग-अलग गिनती नहीं होती थी।
  • किस हुंडी से कितनी रकम या जेवर मिले, इसका रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था।
  • सभी हुंडियों की रकम मिलाकर गिनी जाती थी।
  • नोटों का अलग-अलग वर्गवार रिकॉर्ड तैयार नहीं किया जाता था।
  • बायोमैट्रिक अटेंडेंस लागू नहीं थी।
  • काउंटिंग रूम में खाने-पीने पर भी कोई रोक नहीं थी।
  • सीसीटीवी की निगरानी का प्रभावी इस्तेमाल नहीं किया गया।

अनिल मिश्रा और गणना प्रभारी की जिम्मेदारी तय

एसआईटी ने कहा कि ट्रस्ट की ओर से वित्तीय मामलों और नकदी संग्रह की जिम्मेदारी डॉ. अनिल मिश्रा के पास थी। उन्हें कर्मचारियों की तलाशी और सुरक्षा व्यवस्था में ढिलाई की जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद कोई सख्त लिखित आदेश जारी नहीं किया गया और न ही व्यवस्था में सुधार कराया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि रिटायर्ड बैंक अधिकारी सुभाष श्रीवास्तव को गणना कक्ष का प्रभारी बनाया गया था। कर्मचारियों की तैनाती, अनुशासन, तलाशी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन इसमें भी लापरवाही सामने आई।

हालांकि गणना कक्ष के प्रभारी होने के बावजूद हुंडियों की चाबी उनके पास न होकर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास रहती थी, जिसे एसआईटी ने बेहद गंभीर सुरक्षा चूक माना है।

ट्रस्ट और बैंक के समझौते में भी थी स्पष्ट जिम्मेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए एमओयू में साफ लिखा था कि मंदिर परिसर में कैश की छंटाई, बैंक में जमा करने और स्ट्रॉन्ग बॉक्स की सुरक्षा की जिम्मेदारी ट्रस्ट की होगी। एसआईटी का मानना है कि इन जिम्मेदारियों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं किया गया, जिसकी वजह से लंबे समय तक चोरी होती रही। अब इस मामले में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

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