मुंबई के जल संकट पर निरंजन हीरानंदानी का बड़ा बयान, बोले- निर्माण नहीं, वाटर मैनेजमेंट है असली चुनौती
मुंबई में पानी की कमी को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। रियल एस्टेट सेक्टर के एक दिग्गज कारोबारी ने दावा किया है कि समस्या पानी की उपलब्धता से ज्यादा उसके प्रबंधन से जुड़ी है। पढ़िए पूरी खबर।

In Short
- निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि मुंबई का जल संकट निर्माण गतिविधियों से नहीं, बल्कि पानी के खराब प्रबंधन और कम रीसाइक्लिंग से जुड़ा है।
- उनके मुताबिक, यदि शहर में सीवेज के पानी को बड़े पैमाने पर रीसाइकल किया जाए तो करीब 30% अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराया जा सकता है।
- हीरानंदानी ने जल संकट के स्थायी समाधान के लिए रीसाइक्लिंग, सीवेज ट्रीटमेंट, जल संरक्षण और नए जल स्रोत विकसित करने पर जोर दिया।
मुंबई में जल संकट को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने निर्माण स्थलों पर पानी की आपूर्ति रोकने समेत कई प्रतिबंध लागू किए हैं। इस फैसले को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर में संभावित असर की चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि, हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के दिग्गज कारोबारी और हीरानंदानी ग्रुप के एमडी, निरंजन हीरानंदानी (Niranjan Hiranandani) का मानना है कि यह समस्या हर साल मानसून से पहले सामने आती है और इसका स्थायी समाधान पानी के बेहतर मैनेजमेंट और रीसाइक्लिंग में छिपा है।
निर्माण पर रोक से ज्यादा बड़ी है पानी प्रबंधन की चुनौती
निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि मुंबई में मानसून के देर से पहुंचने के कारण हर साल जल संकट और निर्माण कार्यों पर असर की चर्चा होती है। उनके मुताबिक, जैसे ही अगले सात से दस दिनों में मानसून पूरी तरह सक्रिय होगा, यह मुद्दा काफी हद तक समाप्त हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि असली समस्या निर्माण गतिविधियां नहीं, बल्कि पानी के उपयोग का तरीका है। मुंबई में बड़ी मात्रा में सीवेज का पानी सीधे समुद्र में बहा दिया जाता है। यदि इस पानी का रीसाइक्लिंग किया जाए तो शहर के पास करीब 30% अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो सकता है।
रीसाइक्लिंग से बढ़ सकती है पानी की उपलब्धता
हीरानंदानी के अनुसार, शहर के बगीचों, खेल मैदानों, उद्योगों और एयर कंडीशनिंग जैसी जरूरतों के लिए पीने योग्य ताजे पानी का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि इन कार्यों में ट्रीटेड या रीसाइकल्ड पानी का उपयोग संभव है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नागपुर ने बड़े पैमाने पर पानी रीसाइक्लिंग का मॉडल अपनाया है और उद्योगों को उपचारित पानी बेचकर राजस्व भी अर्जित किया है। इससे शहर की ताजे पानी पर निर्भरता कम हुई है।
हीरानंदानी ने बताया कि उनकी कंपनी पिछले 30 साल से पानी के रीसाइकलिंग पर काम कर रही है। उनके मुताबिक, ग्रुप के प्रोजेक्ट में रोजाना लगभग 70 लाख लीटर सीवेज पानी को ट्रीट कर बागवानी, फ्लशिंग और व्यावसायिक उपयोग में लाया जाता है।
उन्होंने दावा किया कि उनकी कंपनी जितना पानी रीसाइक्लिंग करती है, उससे अधिक क्षमता पूरे मुंबई शहर में अभी विकसित नहीं हो पाई है।
सस्ता पानी भी एक बड़ी समस्या
हीरानंदानी का मानना है कि पानी की कम कीमत भी समस्या को बढ़ाती है। कई इमारतों में रीसाइक्लिंग सिस्टम मौजूद होने के बावजूद उनका इस्तेमाल नहीं किया जाता क्योंकि नगर निगम का पानी सस्ते दर पर उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि यदि पानी के वास्तविक मूल्य और उसके संरक्षण पर गंभीरता से काम किया जाए तो हर साल मानसून से पहले होने वाली ऐसी स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता है।
लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन पर जोर
रियल एस्टेट इंडस्ट्री पर तात्कालिक असर को सीमित बताते हुए हीरानंदानी ने कहा कि मुंबई को जल संकट से निपटने के लिए लॉन्ग टर्म रणनीति अपनानी होगी। इसमें सीवेज ट्रीटमेंट, रीसाइक्लिंग, जल संरक्षण और नए बांधों का निर्माण शामिल होना चाहिए।