फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट पर हमले की होगी जांच, केंद्र ने NIA को सौंपी जिम्मेदारी
फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार पर हमले की जांच अब NIA करेगी। ओमानी फर्स्ट ऑफिसर पर विमान को हाईजैक करने या क्रैश कराने की कोशिश का आरोप है। घटना के बाद विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

In Short
- फ्लाईदुबई फ्लाइट में भारतीय पायलट पर हमले की जांच अब NIA करेगी।
- ओमानी फर्स्ट ऑफिसर पर विमान हाईजैक करने या क्रैश कराने की कोशिश का आरोप।
- घटना के बाद विमान सऊदी अरब में सुरक्षित उतरा और आरोपी गिरफ्तार हुआ।
फ्लाईदुबई की फ्लाइट संख्या 1073 में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार पर हुए हमले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी। केंद्र सरकार ने एजेंसी को इस मामले में केस दर्ज कर पूरी जांच करने का निर्देश दिया है। आरोप है कि विमान में मौजूद ओमानी फर्स्ट ऑफिसर ने फ्लाइट को हाईजैक करने या क्रैश कराने की कोशिश के दौरान भारतीय पायलट पर हमला किया था। इस घटना में कैप्टन स्मित मछार के सिर और हाथों पर गहरे कट लगे थे।
दुबई से उड़ान भरने के बाद विमान में क्या हुआ?
केंद्र सरकार को मिली जानकारी के मुताबिक, फ्लाईदुबई की फ्लाइट 30 सितंबर 2026 को सुबह 7:05 बजे दुबई से रवाना हुई थी। विमान में 174 यात्री और क्रू के 6 सदस्य सवार थे। विमान की कमान भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार और ओमानी फर्स्ट ऑफिसर के हाथों में थी।
उड़ान के दौरान सुबह करीब 9:21 बजे जॉर्डन और सऊदी अरब की सीमा के पास विमान तेजी से नीचे आने लगा। इसके बाद विमान सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र की ओर मुड़ गया। इसी दौरान यात्रियों के मुताबिक, ओमानी फर्स्ट ऑफिसर ने कैप्टन स्मित मछार पर हमला कर दिया।
यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू किया
आरोप है कि ओमानी फर्स्ट ऑफिसर विमान को हाईजैक करने या उसे दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान विमान में मौजूद यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने उसे काबू कर लिया। हमले में कैप्टन स्मित मछार के सिर और हाथों पर गहरे कट लगे।
घटना के बाद विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के अन्य पायलटों ने कमान संभाली। उनकी मदद से विमान को सुरक्षित सऊदी अरब के तबुक शहर स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज एयरपोर्ट पर उतारा गया। विमान की लैंडिंग सुबह 10:45 बजे हुई। इसके बाद सऊदी अधिकारियों ने ओमानी फर्स्ट ऑफिसर को गिरफ्तार कर लिया।
NIA को क्यों सौंपी गई जांच?
केंद्र सरकार के मुताबिक, इस मामले में एंटी हाईजैकिंग एक्ट, 2016 की धारा 3 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 16 और धारा 15(1)(a) के तहत अपराध बनते हैं। ये अपराध राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत निर्धारित अपराधों में शामिल हैं।
सरकार ने मामले की गंभीरता, इसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभावों और किसी बड़ी साजिश का पता लगाने की जरूरत को देखते हुए जांच NIA को सौंपने का फैसला किया है। एजेंसी को केस दर्ज कर पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया है। अब जांच के दौरान घटना से जुड़े तथ्यों और कथित साजिश के पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।