बच्चों से बनवाया पीएम मोदी के खिलाफ वीडियो, NHRC ने मेटा से मांगा जवाब
उत्तर प्रदेश के एटा में नाबालिग बच्चों के राजनीतिक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायत में बच्चों की निजता, सुरक्षा और संभावित शोषण पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए Meta समेत कई अधिकारियों से जवाब मांगा है। जानिए आयोग ने जांच के लिए क्या निर्देश दिए हैं।

In Short
- एटा में बच्चों से राजनीतिक वीडियो बनवाने का आरोप।
- NHRC ने Meta और MeitY समेत अधिकारियों को नोटिस भेजा।
- - आयोग ने दो सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।
उत्तर प्रदेश के एटा में एक कथित कोचिंग सेंटर से जुड़े नाबालिग बच्चों का राजनीतिक वीडियो में इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए Meta और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बच्चों से स्क्रिप्ट के आधार पर राजनीतिक बयान दिलवाए गए और उनके वीडियो बार-बार इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए। कुछ वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणियां और 'वोट चोरी' जैसे राजनीतिक नारे होने का भी आरोप है।
बच्चों के इस्तेमाल को लेकर क्या है शिकायत?
NHRC को मिली शिकायत के मुताबिक, एटा के एक कथित कोचिंग सेंटर से जुड़े नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल राजनीतिक रूप से संवेदनशील सोशल मीडिया वीडियो बनाने के लिए किया जा रहा था।
शिकायत में बच्चों की गरिमा, निजता, मानसिक स्वास्थ्य, अभिभावकों की सहमति और संभावित शोषण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
किन अधिकारियों को भेजा गया नोटिस?
NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने एटा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), जिलाधिकारी (DM), Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं कंट्री हेड और MeitY के सचिव को नोटिस जारी किया है।
आयोग ने सभी संबंधित पक्षों से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
पुलिस को क्या निर्देश दिए गए?
NHRC ने पुलिस को वीडियो में दिखाई देने वाले बच्चों की पहचान करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और जरूरत के मुताबिक काउंसलिंग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा, सोशल मीडिया अकाउंट चलाने वाले लोगों और वीडियो की स्क्रिप्ट लिखने, रिकॉर्डिंग करने तथा अपलोड करने में शामिल वयस्कों की भूमिका की जांच करने को कहा गया है।
आयोग ने निर्देश दिया है कि जांच में संज्ञेय अपराध सामने आने पर FIR दर्ज करने समेत उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
Meta से किन सवालों का जवाब मांगा गया?
NHRC ने Meta से पूछा है कि नाबालिग बच्चों से जुड़े ऐसे वीडियो बार-बार इंस्टाग्राम पर कैसे अपलोड और प्रसारित हुए।
आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि क्या इन वीडियो से किसी तरह की कमाई या व्यावसायिक लाभ हुआ और इन्हें हटाने या इनके प्रसार पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए। साथ ही संबंधित डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने को कहा गया है।
बच्चों की सुरक्षा पर NHRC का जोर
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में बच्चों को मुख्य रूप से सुरक्षा और सहायता की जरूरत वाले नाबालिगों के रूप में देखा जाना चाहिए। जांच का ध्यान उन वयस्कों की जिम्मेदारी तय करने पर होना चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर वीडियो तैयार किए, अपलोड किए या उनसे व्यावसायिक लाभ उठाया।
फिलहाल ये शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। जांच और संबंधित पक्षों की रिपोर्ट के बाद ही मामले के तथ्यों और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट होगी।