नेपाल फ्लैश फ्लड में मौतों का आंकड़ा 162 पहुंचा! सैकड़ों लोग लापता- भारत ने भेजी मदद, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ

नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। हादसे में अब तक 162 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग लापता हैं। इनमें 130 से ज्यादा भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ से सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है। भारत ने राहत सामग्री भेजकर मदद बढ़ाई है।

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By Gaurav Kumar:

नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड से तबाही बढ़ती जा रही है। इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 162 हो गई है। वहीं बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं, जिनमें सुरक्षा बलों के जवानों के साथ विदेशी पर्यटक और भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह हाल के वर्षों में नेपाल की सबसे भीषण आपदाओं में से एक बन गई है।

162 लोगों की मौत, कई अब भी लापता

मध्य नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ की शुरुआत तिब्बत सीमा के पास हुए एक बड़े भूस्खलन से हुई। माना जा रहा है कि इस घटना में ग्लेशियर का हिस्सा भी ढहा था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इस घटना से जुड़े भूकंपीय झटके को करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर दर्ज किया।

इसके बाद बर्फ, मलबे, कीचड़ और पानी का भारी सैलाब ल्हेंदे खोला में जा गिरा। यह धारा आगे भोटे कोशी नदी से जुड़ी और फिर बाढ़ का पानी रसुवा और धादिंग समेत कई इलाकों में फैल गया। इसके बाद सैलाब नदी के रास्ते आगे बढ़ता रहा और कई नए इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

130 से ज्यादा भारतीय नागरिक लापता

इस आपदा में 130 से ज्यादा भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर है। इनमें बड़ी संख्या उन तीर्थयात्रियों की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के रास्ते पर थे। नेपाल के पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, 133 भारतीय तीर्थयात्री अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

कई इलाकों में मोबाइल और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण लापता लोगों का पता लगाने में मुश्किल आ रही है। परिजनों की मदद के लिए नेपाल में दो हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं: +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500।

कई जिलों में तबाही, सड़क और पुल बर्बाद

बाढ़ ने रसुवा और धादिंग से लेकर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी ईस्ट तक भारी तबाही मचाई है। करीब 70 से 200 किलोमीटर के दायरे में बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।

कई गांव पानी में डूब गए हैं और तेज बहाव में वाहन बह गए। अब तक 19 मोटरेबल पुलों के तबाह होने की खबर है। वहीं नुवाकोट के बेत्रावती से रसुवागढ़ी बॉर्डर पॉइंट तक जाने वाली करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

सड़क और पुल टूटने के कारण कई इलाकों का जमीनी संपर्क कट गया है। ऐसे में राहत और बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्टरों का सहारा लिया जा रहा है।

354 MW के हाइड्रोपावर प्लांट प्रभावित

बाढ़ से नेपाल के पावर सेक्टर को भी बड़ा झटका लगा है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल के मुताबिक, आठ चालू हाइड्रोपावर प्लांट, जिनकी कुल क्षमता 354 मेगावाट है, क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा निर्माणाधीन पांच परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।

प्रभावित बड़ी परियोजनाओं में 111 मेगावाट का रसुवागढ़ी प्लांट, 78 मेगावाट का संजेन खोला प्लांट और 60 मेगावाट का अपर त्रिशूली-3A प्रोजेक्ट शामिल हैं।

ईशा फाउंडेशन के 77 लोग भी लापता

ईशा फाउंडेशन के मुताबिक, उसके 77 सदस्य उस समय एक इमिग्रेशन ऑफिस में मौजूद थे जब यह आपदा आई। इन लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। संगठन के 495 अन्य सदस्य सुरक्षित वापस लौट चुके हैं।

फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने कहा कि इमिग्रेशन सेंटर में फंसे लोगों को लेकर अभी तक कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है। नेपाली अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि सेंटर के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

तिब्बत में भी बाढ़ और भूस्खलन

नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी नुकसान पहुंचाया है। चीन के अधिकारियों के मुताबिक, ग्यिरोंग बॉर्डर इलाके में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि 265 लोग लापता हैं। चीन ने इन आंकड़ों को शुरुआती जानकारी बताया है।

बाढ़ और भूस्खलन के कारण वहां सड़कें, फोन लाइन और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है। राहत और बचाव के लिए टीमों और ड्रोन को तैनात किया गया है।

भारत ने बढ़ाई मदद

भारत ने नेपाल में फंसे लोगों की मदद के लिए राहत अभियान तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बात कर हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया है।

भारत पहले ही भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से करीब 10 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसमें टेंट, कंबल, हाइजीन से जुड़ी सामग्री, सोलर लाइट और दवाइयां शामिल हैं। आगे C-17 और C-130 विमानों के जरिए और राहत सामग्री भेजने की तैयारी है। जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टरों को निकासी अभियान के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।

बिहार में भी हाई अलर्ट

नेपाल से आया बाढ़ का पानी गंडक नदी प्रणाली में पहुंचने के बाद बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं ताकि पानी के बढ़ते दबाव को नियंत्रित किया जा सके।

पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। सीतामढ़ी और शिवहर जैसे संवेदनशील जिलों में भी NDRF की टीमें, नावें और राहत-बचाव की तैयारियां की गई हैं।

राज्यों ने अपने नागरिकों की जानकारी जुटाई

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर अलग-अलग राज्यों ने भी जानकारी जारी की है। तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 20 के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है, जबकि 37 अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश ने नेपाल यात्रा को लेकर एडवाइजरी जारी की है और 1070 हेल्पलाइन सक्रिय की है। महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे के चार पर्यटकों के सुरक्षित लेकिन नेपाल में फंसे होने की जानकारी है। केरल के 36 लोगों का ट्रैवल ग्रुप भी सुरक्षित बताया गया है। वहीं सिक्किम ने भी चिंतित परिवारों की मदद के लिए हेल्पलाइन शुरू की है।

नेपाल और चीन में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन

नेपाल की सेना, सशस्त्र पुलिस और सिविल पुलिस की टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। पहाड़ी इलाकों में सड़क संपर्क टूटने के कारण हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

चीन ने भी प्रभावित सीमा क्षेत्र में मदद के लिए पीपुल्स आर्म्ड पुलिस के शिगात्से यूनिट से 145 जवानों को भेजा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्यापक सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने, घायलों को जल्द मेडिकल मदद देने और आगे की आपदाओं को रोकने के लिए निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भी आपात बैठक कर अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि मलबे और दुर्गम इलाकों में तलाशी बढ़ने के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या में और बदलाव हो सकता है।
 

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