मिर्जापुर द मूवी पर सेंसर बोर्ड की कैंची, इंटीमेट सीन्स में बदलाव और 35 सेकेंड कंटेंट हटाया गया

मिर्जापुर द मूवी के बोल्ड और इंटीमेट सीन्स को लेकर सेंसर बोर्ड का फैसला सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के कुछ दृश्यों में बदलाव किए गए हैं और करीब 35 सेकेंड का कंटेंट हटाया गया है। अब चर्चा इस बात पर है कि बड़े पर्दे पर बोल्डनेस की सीमा कौन तय करेगा।

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In Short

  • मिर्जापुर द मूवी के इंटीमेट सीन्स को लेकर सेंसर बोर्ड ने मेकर्स से बदलाव करने को कहा है।
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म से करीब 35 सेकेंड के इंटीमेट कंटेंट को हटाया गया और दो सीन्स में बदलाव किए गए हैं।
  • ट्रेलर के एक विवादित सीन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी थी, जिसमें महिला के चित्रण पर सवाल उठे।

By Gaurav Kumar:

सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) यानी सेंसर बोर्ड का फिल्मों में बोल्ड और इंटीमेट सीन्स को लेकर रुख एक बार फिर चर्चा में है। हॉलीवुड फिल्म स्पाइडर-मैन में कुछ सेकेंड के किसिंग सीन पर कट लगाने से लेकर कन्नड़ सुपरस्टार यश की फिल्म टॉक्सिक के ट्रेलर से बोल्ड सीन्स हटाने तक कई मामलों में सेंसर बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। अब मिर्जापुर द मूवी के ट्रेलर में दिखाए गए हिंसा और इंटीमेट सीन्स को लेकर भी बोर्ड का फैसला सामने आया है।

इंटीमेट सीन्स में किए गए बदलाव

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंसर बोर्ड ने मिर्जापुर द मूवी के मेकर्स से इंटीमेट सीन्स में विजुअल और साउंड के स्तर पर बदलाव करने को कहा है। जानकारी के अनुसार, फिल्म के दो सीन्स में कट और बदलाव किए गए हैं।

बताया जा रहा है कि करीब 35 सेकेंड के इंटीमेट कंटेंट को हटाया गया है और संबंधित सीन्स की अवधि लगभग 50 फीसदी तक कम कर दी गई है। यानी बोर्ड ने इन सीन्स को पूरी तरह हटाने के बजाय उनमें बदलाव और कटौती का रास्ता अपनाया है।

ट्रेलर के एक सीन पर हुआ था विवाद

मिर्जापुर द मूवी के ट्रेलर में दिखाए गए एक इंटीमेट सीन ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी थी। इस सीन में मुन्ना त्रिपाठी का किरदार निभाने वाले दिव्येंदु एक महिला के साथ इंटीमेट स्थिति में नजर आते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इस सीन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बैकग्राउंड में सुनाई देने वाली ‘98, 99...’ जैसी गिनती को लेकर हुई। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि महिला को इस तरह दिखाने की जरूरत क्या थी। आलोचकों ने इसे महिला के किरदार को एक वस्तु की तरह पेश करने से जोड़कर देखा।

ओटीटी और थिएटर रिलीज में अंतर

मिर्जापुर फ्रेंचाइजी अब तक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाती रही है, जहां दर्शक अपनी पसंद के अनुसार कंटेंट देख सकते थे। लेकिन मिर्जापुर द मूवी के साथ यही दुनिया अब सिनेमाघरों के बड़े पर्दे पर पहुंच रही है।

सिनेमाघर में अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि के लोग एक साथ फिल्म देखते हैं। इसी वजह से बड़े पर्दे पर दिखाए जाने वाले कंटेंट को लेकर सेंसर बोर्ड की भूमिका ज्यादा अहम हो जाती है।

सेंसर बोर्ड की कसौटी पर उठे सवाल

फिल्मों में बोल्डनेस और हिंसा को लेकर सेंसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पहले भी चर्चा में रही है। कई बार छोटे रोमांस या किसिंग सीन्स पर कट लगाने को लेकर सवाल उठे हैं, जबकि कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स में ज्यादा बोल्ड कंटेंट को लेकर अलग नजरिया देखने को मिलता है।

मिर्जापुर द मूवी के मामले में भी अब यही सवाल सामने है कि क्या सिर्फ किसी दृश्य का एडल्ट होना ही उसे दिखाने के लिए पर्याप्त है या फिर उसकी जरूरत और प्रस्तुति को भी देखा जाना चाहिए।

एडल्ट सर्टिफिकेट के बावजूद बनी बहस

फिल्म के निर्देशक गुरमीत सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वह फिल्म को शुरुआत से ही Adults Only यानी वयस्क दर्शकों के लिए प्रमाणपत्र मिलने की उम्मीद के साथ बना रहे थे।

फिलहाल साफ है कि फिल्म को बिना बदलाव के पास नहीं किया गया है। इंटीमेट कंटेंट में कट और बदलाव किए गए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि थिएटर में दर्शकों को फिल्म का कितना बदला हुआ वर्जन देखने को मिलता है और एडल्ट सर्टिफिकेट मिलने के बाद बोल्डनेस की सीमा कौन तय करता है।

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