महाराष्ट्र सरकार का मराठी सिनेमा पर बड़ा प्लान, Gen-Z दर्शकों के लिए नई तकनीक और बेहतर प्रोडक्शन पर जोर
राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने मंगलवार को कहा कि इसके लिए एक व्यावहारिक मॉडल तैयार होना जरूरी है। शेलार ने कहा कि मराठी सिनेमा को युवा दर्शकों के साथ मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनाना होगा।

In Short
- महाराष्ट्र सरकार Gen-Z दर्शकों को ध्यान में रखकर आधुनिक तकनीक वाली मराठी फिल्मों में निवेश पर विचार कर रही है।
- सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि मराठी सिनेमा को स्क्रीन, डिस्ट्रीब्यूशन और नए दर्शकों से जुड़ने की रणनीति पर काम करना हो
- AI डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई तकनीक को चुनौती नहीं बल्कि मराठी फिल्म उद्योग के लिए अवसर के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया
महाराष्ट्र सरकार आधुनिक तकनीक से बनने वाली और Gen-Z दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार की जाने वाली मराठी फिल्मों में निवेश कर सकती है। राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने मंगलवार को कहा कि इसके लिए एक व्यावहारिक मॉडल तैयार होना जरूरी है।
शेलार ने कहा कि मराठी सिनेमा को युवा दर्शकों के साथ मजबूत भावनात्मक रिश्ता बनाना होगा। इसके लिए नई तकनीक, बेहतर प्रोडक्शन वैल्यू और आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करना होगा, लेकिन फिल्मों में मराठी भाषा की मूल पहचान बनी रहनी चाहिए।
स्क्रीन, डिस्ट्रीब्यूशन और दर्शकों पर फोकस
महाराष्ट्र फिल्म, थिएटर एंड कल्चरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल की ओर से आयोजित एक सेमिनार में शेलार ने कहा कि मराठी फिल्मों में गुणवत्ता, नए प्रयोग और अभिनय प्रतिभा की कमी नहीं है। अब जरूरत है कि फिल्मों की व्यावसायिक सफलता के लिए जरूरी कड़ी को मजबूत किया जाए।
उन्होंने कहा, "मराठी फिल्मों में गुणवत्ता और नवाचार भरपूर है। हालांकि, प्रोडक्शन के साथ स्क्रीन, डिस्ट्रीब्यूशन और दर्शकों पर भी अध्ययन करना जरूरी है। अगर एक व्यावहारिक मॉडल तैयार होता है तो महाराष्ट्र सरकार निवेशक की भूमिका निभाएगी। "शेलार ने कहा कि मराठी फिल्मों के लिए उपलब्ध स्क्रीन, वितरण व्यवस्था और नए दर्शक तैयार करने जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्मों की तरह मराठी सिनेमा को भी नई पीढ़ी के दर्शकों के साथ गहरा जुड़ाव बनाने की जरूरत बताई।
AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म को अवसर में बदलने की तैयारी
शेलार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई तकनीक फिल्म उद्योग के सामने चुनौती भी हैं और अवसर भी। उन्होंने तकनीक, AI के इस्तेमाल और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा और वर्कशॉप आयोजित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माताओं को आधुनिक तकनीक, विजुअल इफेक्ट्स और बेहतर प्रोडक्शन वैल्यू अपनानी चाहिए, लेकिन मराठी सिनेमा की पहचान को बनाए रखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी फिल्मों का पूरा आर्थिक बोझ सिर्फ निर्माताओं पर नहीं होना चाहिए और सरकार को भी भूमिका निभानी चाहिए।
फिल्म सिटी की प्रबंध निदेशक स्वाति म्हसे पाटिल ने कहा कि फिल्म सिटी को सिर्फ शूटिंग लोकेशन नहीं बल्कि फिल्म उद्योग के लिए एक पूर्ण इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और OTT प्लेटफॉर्म ने फिल्मों के निर्माण और देखने के तरीके बदल दिए हैं। फिल्म सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट, टेक्नोलॉजी और कारोबार को आसान बनाने पर काम कर रही है।