अब लोन वसूलने घर नहीं आएंगे बैंक...महाराष्ट्र के किसानों के लिए सरकार ने उठाया कदम
महाराष्ट्र में सूखे के गंभीर हालात के बीच किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने कई अहम निर्देश दिए हैं। फसल लोन की वसूली से लेकर पानी और चारे के इंतजाम तक बड़े फैसले लिए गए हैं। जानिए किसानों, बैंकों और सूखा प्रभावित इलाकों के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं।

In Short
- महाराष्ट्र के 358 में से 265 तालुकाओं में सूखा घोषित
- फसल लोन की वसूली के लिए किसानों के घर न जाने का निर्देश
- शहरी इलाकों में 10 फीसदी पानी की कटौती के निर्देश
महाराष्ट्र में सूखे के हालात के बीच किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे फसल लोन की वसूली के लिए किसानों के घर न जाएं। साथ ही अधिकारियों से यह पता लगाने को कहा गया है कि क्या RBI लोन वसूली की प्रक्रिया रोकने को लेकर कोई सर्कुलर जारी कर सकता है।
265 तालुकाओं में सूखे के हालात
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 358 में से 265 तालुकाओं यानी करीब 74 फीसदी हिस्से में सूखा घोषित किया है। बारिश की कमी के चलते ये हालात बने हैं। सरकार ने फसल लोन के पुनर्गठन, भूमि राजस्व में रियायत और बिजली बिल में सब्सिडी जैसे राहत उपायों की भी घोषणा की है।
राज्य में सूखा प्रबंधन नियमों के तहत 'ट्रिगर-1' लागू किया गया है। यह स्थिति तब मानी जाती है जब बारिश में 25 फीसदी से ज्यादा की कमी हो और लगातार 21 दिनों तक सूखे जैसे हालात बने रहें। वहीं 43 तालुका 'ट्रिगर-2' के तहत आए हैं।
किसानों से लोन वसूली के लिए घर न जाएं बैंक
बावनकुले ने अधिकारियों से कहा कि संकट के दौरान किसानों को फसल लोन की वसूली के लिए परेशान नहीं किया जाना चाहिए। जिला कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों को भी यह सुनिश्चित करने के निर्देश देने को कहा गया है कि बैंक और क्रेडिट सोसायटी फसल लोन की वसूली के लिए किसानों के पास न जाएं।
मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल से यह भी पता लगाने को कहा गया है कि क्या RBI लोन वसूली रोकने के संबंध में कोई सर्कुलर जारी कर सकता है।
शहरों में 10 फीसदी पानी की कटौती
सूखा राहत कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक में शहरी इलाकों में पानी की सप्लाई में 10 फीसदी कटौती करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बचाए गए पानी को अगले साल जून तक बफर के तौर पर रखने की योजना है।
फिलहाल राज्य में 560 टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है। अधिकारियों को अगले मानसून से पहले 10 महीने तक पीने के पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए योजना तैयार करने को कहा गया है।
फसलों की स्थिति पर चिंता
प्रधान सचिव विनीता वेद सिंघल के मुताबिक राज्य में 96 फीसदी क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीन पर फसलों की वास्तविक स्थिति चिंता का विषय है। इसके लिए तथ्यात्मक सर्वे करने और 25 अक्टूबर तक अंतिम रिपोर्ट देने को कहा गया है।
पानी और चारे को मिलेगी प्राथमिकता
सरकार ने पीने के पानी और पशुओं के चारे को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। गांवों के तालाब और परकोलेशन टैंक पीने के पानी के लिए सुरक्षित रखे जाएंगे। पानी के आवंटन में पीने के पानी, चारा फसलों और रबी फसलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
अधिकारियों को अगले 10 महीनों के लिए पानी और चारे की जरूरतों की व्यापक योजना बनाने के साथ रबी सीजन की तैयारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं।