बेबी फूड पर FDA का एक्शन! कंपनियों से लेकर इन्फ्लुएंसर तक पर पड़ेगा असर

महाराष्ट्र FDA ने फॉर्मूला मिल्क और छोटे बच्चों के लिए बेचे जाने वाले फूड प्रोडक्ट्स को लेकर सख्त आदेश जारी किया है। नए नियम पैकेजिंग से लेकर विज्ञापन और सोशल मीडिया प्रमोशन तक लागू होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों और विक्रेताओं को भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।

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In Short

  • फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड के विज्ञापन और सोशल मीडिया प्रमोशन पर रोक
  • भ्रामक विज्ञापन या बिना लाइसेंस कारोबार पर ₹10 लाख तक जुर्माना
  • बेबी फूड की पैकेजिंग और लेबलिंग को लेकर भी सख्त नियम लागू

By Gungun Mishra:

महाराष्ट्र में छोटे बच्चों के लिए बेचे जाने वाले फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड को लेकर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA ने सख्त आदेश जारी किया है। नए आदेश में पैकेजिंग से लेकर विज्ञापन और सोशल मीडिया प्रमोशन तक के लिए नियम तय किए गए हैं। नियम तोड़ने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

पैकेट पर लिखना होगा 'Mother's Milk is Best for Your Baby'

एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे के मुताबिक, हर पैकेट के सामने प्रमुख रूप से "IMPORTANT NOTICE & MOTHER'S MILK IS BEST FOR YOUR BABY" लिखना जरूरी होगा। साथ ही यह जानकारी भी देनी होगी कि कॉम्प्लिमेंट्री फूड बच्चे के जन्म के छह महीने बाद ही शुरू किया जाना चाहिए।

पैकेज पर बच्चों या महिलाओं की तस्वीरों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा "humanised", "maternalised", "complete food" और "health food" जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी रोक रहेगी। पैकेट पर फीडिंग से जुड़ी जरूरी जानकारी देना भी अनिवार्य होगा।

विज्ञापन और सोशल मीडिया प्रमोशन पर रोक

फॉर्मूला मिल्क और शिशुओं के लिए बने खाद्य उत्पादों के विज्ञापन पर पूरी तरह रोक रहेगी। फ्री सैंपल, गिफ्ट, कूपन, कैशबैक, इन्फ्लुएंसर प्रमोशन और सोशल मीडिया प्रमोशन भी नहीं किया जा सकेगा।

यह रोक ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस और सोशल मीडिया मैसेजिंग ऐप समेत सभी माध्यमों पर लागू होगी। अस्पताल, डॉक्टर या इन्फ्लुएंसर भी कानून का उल्लंघन करके फॉर्मूला मिल्क का प्रमोशन नहीं कर सकेंगे।

प्रतीकात्मक तस्वीर

नियम तोड़ने पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना

एफडीए के मुताबिक, भ्रामक विज्ञापन देने या बिना लाइसेंस कारोबार करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। सबस्टैंडर्ड फूड के मामले में 5 लाख रुपये और गलत ब्रांडिंग यानी मिसब्रांडिंग पर 3 लाख रुपये तक की पेनल्टी लग सकती है।

यह आदेश मैन्युफैक्चरर, ब्रांड ओनर, इम्पोर्टर, रिपैकर, डिस्ट्रीब्यूटर, रिटेलर, फार्मेसी, हॉस्पिटल सप्लायर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए भी नियम

कंपनियां डॉक्टरों, अस्पतालों या मेडिकल एसोसिएशन को कॉन्फ्रेंस, सेमिनार, CME/CPD प्रोग्राम या रिसर्च के लिए स्पॉन्सरशिप, हॉस्पिटैलिटी, स्पीकर फीस या ग्रांट नहीं दे सकेंगी।

बेबी फूड में प्रिजर्वेटिव, अतिरिक्त रंग और फ्लेवरिंग पदार्थों पर भी रोक लगाई गई है। अतिरिक्त सुक्रोज का इस्तेमाल जरूरत होने पर ही किया जा सकेगा और यह कुल कार्बोहाइड्रेट के 20 फीसदी के भीतर होना चाहिए। गलत "no added sugar" दावे भी नहीं किए जा सकेंगे।

गंभीर मामले की 48 घंटे में देनी होगी जानकारी

अस्पतालों और पीडियाट्रिशियन को फॉर्मूला मिल्क लेने वाले बच्चों में किसी संदिग्ध प्रतिकूल घटना की जानकारी देनी होगी। गंभीर मामले में मैन्युफैक्चरर को 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट करना होगा। कंपनियों को बैच के हिसाब से ट्रेसबिलिटी, शिकायत और एडवर्स इवेंट सिस्टम के साथ प्रोडक्ट रिकॉल की व्यवस्था भी रखनी होगी।

इसके अलावा एफडीए ने बुलढाणा के खामगांव में M/s Am Oels Pvt Ltd के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 3.51 करोड़ रुपये का रिफाइंड सोयाबीन ऑयल जब्त किया। एक अन्य कार्रवाई में पालघर से कसारा घाट तक वाहन का पीछा करने के बाद 1.26 करोड़ रुपये का प्रतिबंधित गुटखा भी जब्त किया गया।

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