Krishna Janmashtami 2026: 4 सितंबर या 5 सितंबर, कब मनाएं जन्माष्टमी? जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त
इस बार जन्माष्टमी की तारीख को लेकर आपका कंफ्यूजन दूर होने वाला है। 4 सितंबर को ही क्यों मनाई जाएगी जन्माष्टमी? पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त क्या रहेगा? और 15 साल बाद बनने वाला कौन सा दुर्लभ संयोग इसे खास बना रहा है? जानिए इस पर्व से जुड़ी हर जरूरी जानकारी इस पूरी खबर में।

In Short
- कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी, अष्टमी तिथि 5 सितंबर की रात तक रहेगी।
- रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा श्रीकृष्ण जन्म का सबसे शुभ मुहूर्त।
- करीब 15 साल बाद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का खास संयोग बन रहा है।
हर साल की तरह इस बार भी कृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है। कुछ लोग 4 सितंबर को तो कुछ 5 सितंबर को जन्माष्टमी मनाने की बात कर रहे हैं। ऐसे में व्रत रखने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने वाले भक्तों के मन में सही तारीख और पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर सवाल है। पंडित प्रवीण मिश्र ने इस साल जन्माष्टमी की सही तारीख और पूजा के समय के बारे में जानकारी दी है।
4 सितंबर को मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी
पंडित प्रवीण मिश्र के मुताबिक, 4 सितंबर को अर्धरात्रि में 2 बजकर 25 मिनट पर अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। ऐसे में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को ही मनाना सही रहेगा।
45 मिनट रहेगा पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त
पंडित प्रवीण मिश्र के अनुसार, इस साल कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का सबसे श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए कुल 45 मिनट का समय मिलेगा। इसी मुहूर्त में कान्हा जी और लड्डू गोपाल का जन्म कराया जाता है।
इसके अलावा जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण की पूजा के लिए सुबह से भी कई मुहूर्त रहेंगे।पहला मुहूर्त सुबह 5 बजकर 46 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
15 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल कृष्ण जन्माष्टमी पर खास संयोग बन रहा है। मान्यता है कि करीब 15 साल बाद जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है।
इसके अलावा हर्षण योग, बुधादित्य योग, हंस योग और मालव्य योग भी बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में श्रीकृष्ण का जन्म भी अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के समय हुआ था। इसलिए इस बार की जन्माष्टमी को विशेष माना जा रहा है।
ऐसे मनाएं कृष्ण जन्माष्टमी
जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा घर की सफाई करें और लड्डू गोपाल के लिए सुंदर झूला सजाएं। भगवान श्रीकृष्ण को गंगाजल, कच्चे दूध और पंचामृत से स्नान कराएं।
इसके बाद लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर कंगन, कुंडल, मुकुट और फूलों की माला से सजाएं। भगवान को फूल अर्पित करें और उन्हें झूले में बैठाकर धीरे-धीरे झुलाएं। अंत में लड्डू गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाएं और प्रसाद चढ़ाएं। पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगें।