Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने जा रहे हैं, तो इन जरूरी नियमों का रखें ध्यान
जन्माष्टमी के मौके पर भक्त भगवान श्रीकृष्ण को श्रद्धा से 56 तरह के व्यंजनों का भोग लगाते हैं। इसके पीछे गोवर्धन पर्वत से जुड़ी पौराणिक कथा बताई जाती है। अगर आप भी इस बार कान्हा को छप्पन भोग अर्पित करने जा रहे हैं, तो इससे जुड़े जरूरी नियम पहले जान लें।

In Short
- Janmashtami पर श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाने की है खास परंपरा।
- भोग में तुलसी दल रखना और सात्विकता का ध्यान रखना जरूरी।
- भोग लगाने के बाद 5 से 10 मिनट में प्रसाद हटा दें।
Krishna Bhog Rules: जन्माष्टमी के मौके पर घर-घर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारी होती है। भक्त व्रत रखते हैं, बाल गोपाल का श्रृंगार करते हैं और उन्हें उनकी पसंद की चीजों का भोग लगाते हैं। इस दिन कई लोग श्रीकृष्ण को छप्पन भोग भी अर्पित करते हैं। अगर आप भी जन्माष्टमी पर कान्हा को 56 भोग लगाने की तैयारी कर रहे हैं, तो भोग से जुड़े कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
जन्माष्टमी पर क्यों लगाया जाता है 56 भोग ?
श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने की परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा बताई जाती है। मान्यता के अनुसार माता यशोदा बालकृष्ण को दिन में आठ पहर भोजन कराती थीं। एक बार ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को सात दिनों तक अपनी उंगली पर उठाए रखा।
इस दौरान उन्होंने सात दिन और आठ पहर तक कुछ नहीं खाया। जब इंद्र का अहंकार खत्म हुआ और बारिश शांत हुई तो ब्रजवासियों ने श्रीकृष्ण के लिए सात दिन और आठ पहर के हिसाब से 56 तरह के व्यंजन तैयार किए। इसी वजह से छप्पन भोग की परंपरा को इस कथा से जोड़कर देखा जाता है।
भोग में रखें शुद्धता का ध्यान
छप्पन भोग के लिए बनाए जाने वाले सभी व्यंजन शुद्ध और सात्विक होने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोग के व्यंजनों में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। 56 भोग के व्यंजन देसी घी में बनाए जाने की बात भी कही गई है।
हर भोग के साथ तुलसी दल जरूरी
श्रीकृष्ण को भोग लगाते समय तुलसी दल का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण को अर्पित किए जाने वाले हर भोग में तुलसी का पत्ता रखा जाना चाहिए। कहा जाता है कि तुलसी के बिना भगवान भोग स्वीकार नहीं करते।
किन बर्तनों में लगाएं भोग?
भोग अर्पित करने के लिए बर्तनों का भी ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल, लकड़ी या मिट्टी के पात्र में भोग लगाया जा सकता है। वहीं स्टील या प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
भोग के साथ रखें जल का पात्र
श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाते समय उनके सामने एक छोटा जल से भरा पात्र भी रखना चाहिए। इसे जल प्रक्षालन के लिए आदरपूर्वक रखने की बात कही गई है।
5 से 10 मिनट बाद हटा दें भोग
भोग लगाने के बाद उसे भगवान के सामने कुछ समय के लिए रखा जाता है। इस दौरान घंटी बजाकर या ताली बजाकर भगवान का आह्वान करने की बात कही गई है। इसके बाद करीब 5 से 10 मिनट के लिए पूजा घर या मंदिर का पर्दा बंद किया जा सकता है या वहां से हट सकते हैं।
भोग को बहुत देर तक या पूरे दिन भगवान के सामने नहीं छोड़ना चाहिए। करीब 5 से 10 मिनट के भीतर इसे हटाकर प्रसाद के रूप में बांट देना चाहिए।