Israel Election 2026:इजरायल में आज बड़ा चुनाव, क्या सत्ता बदलने से फिर छिड़ेगी ईरान से जंग?
इजरायल में 2023 के हमास हमले के बाद पहली बार हो रहे चुनाव ने सियासी हलचल तेज कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में है और विपक्ष सत्ता बदलने की तैयारी में है। लेकिन चुनावी नतीजों से ईरान के साथ तनाव फिर क्यों बढ़ सकता है? जानिए पूरा मामला।

In Short
- इजरायल में नेतन्याहू और विपक्ष के बीच कांटे की टक्कर, सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत।
- चुनाव में इजरायली अरब समुदाय की भूमिका अहम, करीब 20% आबादी बदल सकती है सत्ता का समीकरण।
- चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा हमले की आशंका, नेतन्याहू और ट्रंप पहले ही दे चुके हैं चेतावनी।
इजरायल में 2023 के हमास हमले के बाद पहली बार आम चुनाव हो रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह चुनाव सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती बन गया है। विपक्ष भी सरकार बनाने की कोशिश में जुटा है। इस चुनाव का असर इजरायल की राजनीति से लेकर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव तक पड़ सकता है। ऐसे में जानिए चुनाव से जुड़े बड़े समीकरण और चुनौतियां।
नेतन्याहू के सामने कितनी बड़ी चुनौती?
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, 77 साल के बेंजामिन नेतन्याहू दोबारा प्रधानमंत्री बनने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि पिछले तीन साल की सैन्य कार्रवाई से इजरायल की सुरक्षा मजबूत हुई है। वहीं, 66 साल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट विपक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नेतन्याहू की नीतियां देश को नुकसान पहुंचा रही हैं। नेतन्याहू पर रिश्वतखोरी के आरोप भी हैं।
क्या चुनाव के बाद भी नहीं बनेगी सरकार?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, चुनावी सर्वे में मुकाबला बेहद करीबी है। सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय संसद में 61 सीटें चाहिए, लेकिन किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में कई हफ्तों तक बातचीत चल सकती है या दोबारा चुनाव भी हो सकते हैं। इस दौरान नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इजरायल की करीब 20% आबादी अरब समुदाय की है। इस बार उनका मतदान बढ़ने की उम्मीद है। दो अरब पार्टियों ने आइजनकोट को समर्थन देने की पेशकश की है, हालांकि उनके कुछ सहयोगी इसके खिलाफ हैं।
क्या ईरान पर फिर हमला करेगा इजरायल?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दोबारा हमले की चेतावनी दे चुके हैं। ट्रंप दो बार नेतन्याहू का समर्थन कर चुके हैं। नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार में ईरान के न्यूक्लियर खतरे को भी बड़ा मुद्दा बनाया है।
ब्लूमबर्ग के अनुसार, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी का दावा है कि इजरायल ने गाजा के दो-तिहाई हिस्से पर नियंत्रण कर लिया है। हिजबुल्लाह को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। अमेरिका के साथ मिलकर ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताओं को भी नुकसान पहुंचाया गया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले में 1,200 लोग मारे गए और 250 को बंधक बनाया गया था। इसके बाद गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई में कम से कम 74,000 लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा गाजा के हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का है।
आर्थिक प्रतिबंध और सत्ता परिवर्तन पर क्या है विवाद?
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, नेतन्याहू ने आशंका जताई है कि इजरायल पर आर्थिक प्रतिबंध लग सकते हैं। उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी के जरिए इनसे बचने की बात कही। हालांकि, बैंक ऑफ इजरायल ने इसे गलत रास्ता बताते हुए प्रमुख व्यापारिक साझेदारों से रिश्ते बनाए रखने की सलाह दी।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष ने नेतन्याहू पर डर फैलाने का आरोप लगाया है। आइजनकोट ने चुनाव हारने की स्थिति में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण को लेकर भी चिंता जताई है। वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ सेटलर्स की हिंसा भी चुनावी बहस का हिस्सा है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, मंगलवार रात 10 बजे मतदान खत्म होने के बाद एग्जिट पोल आएंगे। बड़ी संख्या में विदेश में रहने वाले इजरायली भी मतदान के लिए लौट रहे हैं। ऐसे में चुनावी नतीजे तय करेंगे कि नेतन्याहू सत्ता बचा पाएंगे या इजरायल को नया नेतृत्व मिलेगा।