अश्वगंधा को लेकर बड़ी रिसर्च! 24 हफ्तों में 1200 लोगों पर हुई स्टडी; लिवर-किडनी पर आया ये अपडेट
अश्वगंधा का इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ी खबर है। आयुष मंत्रालय के सहयोग से 1,200 लोगों पर हुई रिसर्च में इसकी सुरक्षा को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। 24 हफ्तों तक रोजाना अश्वगंधा का खास अर्क लेने से लिवर और किडनी पर क्या असर पड़ा? जानिए रिसर्च में क्या खुलासा हुआ।

In Short
- आयुष मंत्रालय के सहयोग से 1,200 लोगों पर हुआ अश्वगंधा का क्लिनिकल ट्रायल।
- 24 हफ्तों तक अश्वगंधा का खास अर्क लेने से लिवर और किडनी को नुकसान का सबूत नहीं मिला।
- रिसर्च में कोविशील्ड वैक्सीन के बाद इम्युनिटी बढ़ाने में अश्वगंधा का कोई अतिरिक्त फायदा नहीं मिला।
भारत के साथ-साथ दुनियाभर में अश्वगंधा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच आयुष मंत्रालय के सहयोग से हुई एक बड़ी रिसर्च में इसकी सुरक्षा को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। 1,200 लोगों पर किए गए क्लिनिकल ट्रायल में पाया गया कि 24 हफ्तों तक रोजाना अश्वगंधा की जड़ का एक खास अर्क लेने से लिवर या किडनी को कोई नुकसान नहीं हुआ, जिसे इस अर्क से जोड़ा जा सके।
1,200 लोगों पर हुआ ट्रायल
यह रिसर्च भारत के सात केंद्रों पर की गई। इसमें कोविड-19 वैक्सीन लगवा चुके 18 से 70 साल के 1,200 वयस्क शामिल थे। शोधकर्ताओं का मकसद लंबे समय तक अश्वगंधा लेने की सुरक्षा और कोविशील्ड वैक्सीन से बनी इम्युनिटी पर इसके असर की जांच करना था।
20 अगस्त को Frontiers in Medicine में प्रकाशित इस अध्ययन में कुछ लोगों को रोजाना 500 मिलीग्राम अश्वगंधा की जड़ का अर्क दिया गया। यह करीब 4 ग्राम जड़ के पाउडर के बराबर था। बाकी लोगों को बिना अश्वगंधा वाला प्लेसीबो दिया गया। कुल 28 हफ्तों तक निगरानी की गई, जिसमें 24 हफ्ते इलाज के थे।
लिवर और किडनी पर क्या हुआ असर?
ट्रायल में शामिल 1,200 लोगों में से 1,032 यानी 86% ने अध्ययन पूरा किया। जांच में लिवर और किडनी से जुड़े ब्लड टेस्ट के नतीजे तय सामान्य सीमा में रहे। अश्वगंधा के अर्क से इन अंगों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला।
हालांकि, अश्वगंधा लेने वालों में 337 और प्लेसीबो लेने वालों में 309 प्रतिकूल घटनाएं दर्ज हुईं। ज्यादातर समस्याएं हल्की या मध्यम थीं और पाचन से जुड़ी थीं। आठ गंभीर घटनाएं भी सामने आईं, लेकिन किसी को इलाज से जुड़ा नहीं माना गया। किसी की मौत नहीं हुई।
क्या इम्युनिटी बढ़ाने में मिला फायदा?
रिसर्च में अश्वगंधा से कोविशील्ड वैक्सीन के बाद इम्युनिटी में कोई अतिरिक्त फायदा नहीं मिला। दोनों समूहों में वायरस को रोकने वाली एंटीबॉडी का स्तर ऊंचा रहा और उनके बीच कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं था।
कितनी बड़ी हो सकती है अश्वगंधा की मार्केट?
ग्रैंड व्यू रिसर्च के मुताबिक, भारत में अश्वगंधा सप्लीमेंट्स का बाजार 2025 में करीब 657 करोड़ रुपये था, जो 2033 तक 1,421 करोड़ रुपये पहुंच सकता है। वहीं, वैश्विक बाजार 2025 के करीब 7,296 करोड़ रुपये से बढ़कर 2030 तक 11,328 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
क्या हर अश्वगंधा प्रोडक्ट सुरक्षित है?
रिसर्च के प्रमुख लेखक डॉ. अरविंद चोपड़ा के मुताबिक, अध्ययन से 24 हफ्तों तक इस्तेमाल किए गए खास अर्क की सुरक्षा से जुड़े सबूत मिले हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि बाजार में मौजूद हर अश्वगंधा प्रोडक्ट सुरक्षित है। तनाव, चिंता या नींद की समस्याओं में इसके फायदे साबित करने के लिए भी आगे रिसर्च जरूरी है।