होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 3 बड़ी शर्तें, ओमान के साथ शिपिंग लेन डील लगभग फाइनल

दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज को दोबारा खोलने की उम्मीद बढ़ गई है। ईरान और ओमान की डील फाइनल स्टेज में है, लेकिन असली पेंच अमेरिका पर फंसा है। तेहरान ने ऐसी कई शर्तें रख दी हैं, जिन्हें मानना वॉशिंगटन के लिए आसान नहीं होगा।

Advertisement
Image Credit: Reuters

In Short

  • ईरान और ओमान के बीच होर्मुज में नई शिपिंग लेन को लेकर समझौता अंतिम चरण में पहुंचा
  • ईरान ने रास्ता खोलने के लिए अमेरिका से मुआवजा, प्रतिबंध हटाने और फ्रीज संपत्ति जारी करने जैसी शर्तें रखीं
  • अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत नहीं, मध्यस्थों के जरिए संदेशों का हो रहा आदान-प्रदान

By Gaurav Kumar:

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन इसका रास्ता अभी अमेरिका की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर अटका है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका से मुआवजा मिलने, प्रतिबंध हटने और आगे सैन्य हमले की धमकी बंद होने जैसी मांगें पूरी होने के बाद ही इस अहम समुद्री रास्ते को खोलने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। दूसरी ओर ओमान के साथ नई शिपिंग लेन को लेकर ईरान की डील लगभग फाइनल हो चुकी है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा है कि ओमान के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नई शिपिंग लेन तय करने वाला समझौता अपने फाइनल स्टेज में है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तुरंत जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा।

अमेरिका से मुआवजा चाहता है ईरान

ईरान की सबसे बड़ी मांग अमेरिका से मुआवजे की है। अराकची के मुताबिक, अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों में हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी। तेहरान का कहना है कि इसके बिना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।

ईरान की शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा संस्था के सचिव मोहम्मद बाकेर जोलकद्र ने भी अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं। इनमें ईरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई की धमकी खत्म करना भी शामिल है।

प्रतिबंध हटाने और फ्रीज संपत्ति जारी करने की मांग

ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध हटाए। इसके साथ ही अमेरिका और दूसरे देशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियों को भी जारी किया जाए।तेहरान ने खाड़ी में ईरानी जहाजों और बंदरगाहों से जुड़ी अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करने की मांग भी की है। ईरान का कहना है कि जब तक ये मुद्दे हल नहीं होते, तब तक सिर्फ ओमान के साथ समझौता होने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुलेगा।

ओमान के साथ डील में क्या होगा?

रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान और ओमान के बीच होने वाला समझौता मुख्य रूप से नई शिपिंग लेन तय करेगा। यानी अगर अमेरिका और ईरान के बीच बाकी शर्तों पर सहमति बनती है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने के बाद जहाज किन रास्तों से गुजरेंगे, इसका सिस्टम पहले से तय होगा।

एक अमेरिकी अधिकारी ने भी कहा है कि ईरान और ओमान के बीच समझौता जल्द हो सकता है। इसके बाद कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने का रास्ता बन सकता है।

अमेरिका भी पहले चाहता है ईरान से कदम

मामला सिर्फ ईरान की शर्तों तक सीमित नहीं है। अमेरिका भी चाहता है कि तेहरान पहले अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू करे। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ईरान के कदमों के साथ ही अमेरिका की कार्रवाई भी जुड़ी होगी।

यानी दोनों देशों के बीच पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ सकती है। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले प्रतिबंध, नाकेबंदी और मुआवजे जैसे मुद्दों पर कदम उठाए, जबकि अमेरिका पहले ईरान की ओर से ठोस कार्रवाई देखना चाहता है।

सीधे बात नहीं कर रहे अमेरिका और ईरान

फिलहाल दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही है। अराकची के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए संदेश भेजे जा रहे हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि अमेरिका ईरान के मामले में फिलहाल लो-की तरीके से आगे बढ़ रहा है और दोनों देशों के बीच सीमित स्तर पर बातचीत चल रही है।

दुनिया के लिए क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री एनर्जी रूट्स में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाला बड़ी मात्रा में तेल और गैस इसी रास्ते से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचता है।यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सामान्य करने वाली किसी भी डील पर पूरी दुनिया की नजर है।

ओमान के साथ नई शिपिंग लेन की डील लगभग तैयार है, लेकिन अब असली सवाल अमेरिका और ईरान के बीच शर्तों पर सहमति बनने का है। जब तक यह पेंच नहीं सुलझता, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने का रास्ता साफ होना मुश्किल है।

Read more!
Advertisement