अमेरिका और ईरान ने संघर्ष रोकने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए, लेकिन इजरायल का क्या?

अमेरिका और ईरान ने सालों पुराना तनाव खत्म करने के लिए एक बड़ा शांति समझौता (MoU) साइन किया है। दोनों देशों ने लड़ाई रोककर आगे बातचीत और शांति की राह चुनने की कोशिश की है। लेकिन इस डील के बाद पश्चिम एशिया में नया विवाद खड़ा हो गया है। पढ़ें पूरी खबर।

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अब जब अमेरिका और ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, तो इजरायल क्या करेगा?
अब जब अमेरिका और ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, तो इजरायल क्या करेगा?

In Short

  • अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते (MoU) पर दस्तखत कर दिए हैं।
  • इस समझौते की वजह से अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में खटास साफ दिखने लगी है।
  • इस शांति समझौते का क्या होगा, इस पर सस्पेंस बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

By Gaurav Kumar:

US-Iran peace deal: अमेरिका और ईरान ने बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को खत्म करने के उद्देश्य से एक शांति समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस बड़े और ऐतिहासिक कदम के बाद पूरे पश्चिम एशिया में राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। इस समझौते के सामने आते ही अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इजराइल इस शांति समझौते के बीच में आएगा या फिर इसे पूरी तरह से फ्लॉप कर देगा?

नेतन्याहू का सख्त रुख 

इस पूरे मामले पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं। उन्होंने दो टूक कहा है कि लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइल की जो सैन्य कार्रवाई चल रही है, वो अमेरिका-ईरान के किसी भी समझौते से रुकने वाली नहीं है।

दरअसल, इजराइल शुरू से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने देश के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता आया है। इसलिए इजराइल इस डील के पूरी तरह खिलाफ है। उसे डर है कि इससे ईरान को परमाणु बम बनाने की छूट मिल जाएगी और उस पर लगी पाबंदियां भी हट जाएंगी।

अमेरिका-इजराइल संबंधों में बढ़ता तनाव

इस नए शांति समझौते के कारण अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में कूटनीतिक खटास के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में नेतन्याहू के इस सख्त रुख की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है।

जी7 समिट (G7 Summit) के दौरान ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि लेबनान में इजराइल का रवैया कई बार जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो जाता है। इस बीच मीडिया में यह खबर भी सामने आई कि इस समझौते को लेकर इजराइल को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया था, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव की अटकलें और तेज हो गईं।

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वाशिंगटन ने इजराइल के साथ समझौते की पूरी जानकारी साझा की थी और उन्हें समझौते की एक कॉपी (प्रति) भी भेजी थी।

लेबनान में शांति के बिना समझौता अधूरा

वर्तमान में लेबनान के जमीनी हालात इस पूरे शांति समझौते की सफलता के लिए एक बड़ा मुद्दा बने हुए हैं। इस मामले पर ईरान का स्पष्ट कहना है कि किसी भी समझौते को लागू करने के लिए लेबनान में युद्धविराम होना बेहद जरूरी है।

दूसरी तरफ, इजराइल और हिज्बुल्लाह का झगड़ा कभी भी दोबारा बढ़ सकता है, जिससे यह पूरी डील चौपट हो सकती है। इजराइल की सबसे बड़ी मुसीबत ईरान का परमाणु प्रोग्राम ही है। उसका मानना है कि अगर ईरान को परमाणु ताकत बनने की छूट मिली या पैसों का फायदा हुआ, तो इससे पूरे इलाके की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

अमेरिका-इजराइल में ठनी, कूटनीतिक रिश्ते हुए तल्ख

दोनों देशों के बीच बढ़ते झगड़े के बाद भी ट्रंप ने नेतन्याहू को एक "अच्छा इंसान, लेकिन कभी-कभी थोड़ा गरम दिमाग वाला नेता" बताया है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका और इजराइल के पुराने रिश्तों को एक "शानदार पार्टनरशिप" कहा है।

लेकिन, ट्रंप के इस बयान के बाद भी दोनों देशों के बीच की दरार अब पूरी दुनिया के सामने आ चुकी है। कूटनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस मतभेद के चलते अब इस पूरे शांति समझौते के भविष्य पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।

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