भारतीयों के खर्च करने का बदला तरीका! विदेश यात्रा और डिजिटल शौक पर बहा रहे करोड़ों, जानें निलेश शाह की राय

भारतीय अब विदेश ट्रैवल पर सालाना करीब ₹1.45 लाख करोड़ खर्च कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह रकम देश की पूरी बिल्डिंग मटेरियल इंडस्ट्री यानी प्लाईवुड, टाइल्स, पाइप्स और लैमिनेट्स जैसे सेक्टर से भी ज्यादा है।

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By Gaurav Kumar:

भारत तेजी से बदल रहा है और सिर्फ टेक्नोलॉजी या लाइफस्टाइल में ही नहीं, बल्कि लोगों के खर्च करने के तरीके में भी। कोटक म्यूचुअल फंड के मैनेजिंग डायरेक्टर निलेश शाह ने रविवार को कुछ ऐसे आंकड़े शेयर किए जिन्होंने यह दिखाया कि भारतीयों की प्राथमिकताएं अब पहले जैसी नहीं रहीं। विदेश यात्रा, ऑनलाइन ट्रेडिंग, लाइव इवेंट्स और डिजिटल खर्च अब लोगों की जेब पर पहले से कहीं ज्यादा असर डाल रहे हैं।

शाह ने कहा कि भारतीय अब विदेश ट्रैवल पर सालाना करीब ₹1.45 लाख करोड़ खर्च कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह रकम देश की पूरी बिल्डिंग मटेरियल इंडस्ट्री यानी प्लाईवुड, टाइल्स, पाइप्स और लैमिनेट्स जैसे सेक्टर से भी ज्यादा है। उनका कहना था कि यह बदलाव दिखाता है कि अब लोगों का खर्च जरूरत से ज्यादा अनुभव पर बढ़ रहा है।

रिटेल ट्रेडिंग में ₹2.87 लाख करोड़ का नुकसान

शाह ने छोटे निवेशकों यानी रिटेल ट्रेडर्स के बढ़ते नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि FY 2022 से 2025 के बीच रिटेल ट्रेडर्स ने करीब ₹2.87 लाख करोड़ गंवा दिए।

इसे आसान भाषा में समझाने के लिए  शाह ने कहा कि यह रकम देश के वार्षिक FMCG खर्च के आधे से ज्यादा के बराबर है। इतना पैसा करीब 35 से 36 करोड़ वॉशिंग मशीन खरीदने में इस्तेमाल हो सकता था और लगभग हर भारतीय घर में एक वॉशिंग मशीन पहुंच सकती थी।

डिजिटल फ्रॉड भी खा रहा है लोगों का पैसा

निलेश ने डिजिटल धोखाधड़ी को भी बड़ी आर्थिक चिंता बताया। पिछले छह वर्षों में डिजिटल फ्रॉड के जरिए करीब ₹53,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। यह रकम भारत की पूरी ब्रांडेड Quick Service Restaurant आसान शब्दों में फास्ट-फूड रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के बराबर मानी जा सकती है। पैसा खपत से हटकर सीधे धोखाधड़ी की तरफ जा रहा है।

 भारत में तेजी से बढ़ रहा Apple का कारोबार

भारत में Apple के तेजी से बढ़ते बिजनेस को भी  निलेश ने एक बड़ा संकेत बताया। निलेश के मुताबिक Apple India ने पिछले पांच सालों में ₹1.2 लाख करोड़ से ज्यादा का अतिरिक्त राजस्व  (Incremental Revenue) जोड़ा है। उन्होंने कहा कि यह लगभग दो नए HUL (Hindustan Unilever) जैसे बड़े बिजनेस को शून्य से खड़ा करने जितना बड़ा विस्तार है।

 लोग कपड़ों से ज्यादा ‘वीकेंड एक्सपीरियंस’ पर कर रहे खर्च

भारतीयों की लाइफस्टाइल और खर्च की आदतें तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने बताया कि भारत का लाइव इवेंट इंडस्ट्री अब करीब ₹20,800 करोड़ की हो चुकी है, जो देश के संगठित फुटवियर बाजार के लगभग बराबर है। लोग अब सिर्फ कपड़ों या सामान पर नहीं, बल्कि कॉन्सर्ट, इवेंट्स और अनुभवों पर भी ज्यादा खर्च कर रहे हैं।

भारतीयों की खर्च करने की आदतों में दिख रहे 3 बड़े बदलाव

निलेश शाह के मुताबिक ये आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था में तीन बड़े बदलाव दिखाते हैं।

  1. जरूरतों से हटकर डिजिटल और लाइफस्टाइल खर्च बढ़ रहा - भारतीयों का खर्च अब अनाज और दाल जैसी पारंपरिक जरूरतों से हटकर डेटा, OTT प्लेटफॉर्म और मोबाइल सेवाओं की तरफ बढ़ रहा है।
  2. आय बढ़ रही है, लेकिन सबके लिए नहीं-  देश में इनकम बढ़ तो रही है, लेकिन उसका फायदा पूरी आबादी तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा।
  3. फ्रॉड और सट्टेबाजी रोकना अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा फायदा हो सकता है- अगर सट्टेबाजी में होने वाले नुकसान, डिजिटल फ्रॉड और पोंजी स्कीम्स को रोका जाए, तो इसका असर कई सरकारी आर्थिक कदमों से भी बड़ा हो सकता है।

शाह ने यहां तक कहा कि इन चीजों को रोकना सितंबर 2024 में घोषित GST कटौती से भी ज्यादा अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचा सकता है।

कुल मिलाकर, निलेश शाह के आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं हैं, बल्कि यह दिखाते हैं कि भारत का मिडिल क्लास और युवा पीढ़ी अब किस तरह नई प्राथमिकताओं, डिजिटल आदतों और बदलती लाइफस्टाइल की ओर बढ़ रही है।

 

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