रेलवे का बड़ा दावा: 12 साल में गंभीर ट्रेन हादसे 88 फीसदी कम, जानें कैसे बढ़ी ट्रेनों की सुरक्षा
भारतीय रेलवे का दावा है कि बीते 12 साल में गंभीर ट्रेन हादसों में बड़ी कमी आई है। नई तकनीक, बेहतर ट्रैक देखभाल, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और कवच जैसे सिस्टम ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- रेलवे के मुताबिक पिछले 12 साल में गंभीर ट्रेन हादसों की संख्या 88 फीसदी कम हुई है।
- रेलवे का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक केवल दो गंभीर रेल हादसे दर्ज किए गए हैं।
- रेलवे का कहना है कि 6,671 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया गया है।
Indian Railways: भारतीय रेलवे ने दावा किया है कि पिछले 12 साल में गंभीर ट्रेन हादसों की संख्या 88 फीसदी कम हुई है। रेलवे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक केवल दो ऐसे हादसे दर्ज किए गए हैं। रेल मंत्रालय का कहना है कि नई तकनीक, रेलवे ट्रैक की बेहतर देखभाल और सिग्नल सिस्टम में सुधार से हादसों को कम करने में मदद मिली है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्रेन में सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा रेलवे की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी वजह से पिछले कई साल से रेलवे में सुरक्षा से जुड़े काम लगातार किए जा रहे हैं।
किन घटनाओं को बड़ा ट्रेन हादसा माना जाता है?
रेलवे की भाषा में गंभीर हादसों को ‘कन्सीक्वेंशियल ट्रेन एक्सीडेंट’ कहा जाता है। इनमें ट्रेनों की टक्कर, ट्रेन का पटरी से उतरना, आग लगना और रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाले बड़े हादसे शामिल हैं।
ऐसे हादसों से ट्रेनों की आवाजाही पर असर पड़ता है और लोगों की जान को भी खतरा हो सकता है। रेलवे का कहना है कि पिछले एक दशक में इस तरह की घटनाएं लगातार कम हुई हैं।
6,671 स्टेशनों पर लगाया गया नया सिस्टम
रेलवे के मुताबिक, 6,671 रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम ट्रेनों के लिए सही रास्ता तय करने और सिग्नल को कंट्रोल करने में मदद करता है। इससे कर्मचारियों से होने वाली गलती का खतरा कम होता है।
इसके अलावा ब्रॉड गेज रेलवे नेटवर्क से बिना कर्मचारी वाले सभी रेलवे क्रॉसिंग हटा दिए गए हैं। रेलवे का कहना है कि इससे रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाले हादसों को कम करने में मदद मिली है।
सुरक्षित LHB कोच का इस्तेमाल बढ़ा
रेलवे ने पुराने ट्रेन डिब्बों की जगह LHB कोच का इस्तेमाल बढ़ाया है। इन कोच को हादसे के दौरान बेहतर सुरक्षा देने के लिए तैयार किया गया है।
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इसके साथ ही रेलवे ट्रैक की जांच और मरम्मत के तरीकों में भी सुधार किया गया है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, रेलवे ट्रैक की वेल्डिंग में होने वाली खराबी भी पहले के मुकाबले काफी कम हुई है।
2,490 किलोमीटर रूट पर कवच 4.0
देश में तैयार ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच 4.0 को अब तक 2,490 रूट किलोमीटर पर शुरू किया जा चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रेलवे रूट के कुछ हिस्से शामिल हैं।
रेलवे ने बताया कि 21,937 रूट किलोमीटर पर कवच लगाने का काम चल रहा है। इसके अलावा 7,435 रेल इंजनों और 1,200 EMU और MEMU ट्रेनों में भी यह सिस्टम लगाया जा रहा है।
रेलवे सुरक्षा पर बढ़ाया गया खर्च
रेल मंत्रालय का कहना है कि पिछले एक दशक में रेलवे ट्रैक बदलने, पुलों को मजबूत करने, सिग्नल सिस्टम सुधारने और नए रेल डिब्बे बनाने पर निवेश बढ़ाया गया है। LHB कोच का उत्पादन भी बढ़ाया गया है।
रेलवे के मुताबिक, लंबे समय से किए जा रहे इन बदलावों का असर अब हादसों के आंकड़ों में दिख रहा है। आगे भी कवच का दायरा बढ़ाने और रेलवे नेटवर्क को बेहतर बनाने पर काम जारी रहेगा।