28 साल के अरशदीप सिंह डांग ने रचा इतिहास, RAF में दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने पहले सिख फाइटर पायलट

भारतीय मूल के अरशदीप सिंह डांग ने ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स में इतिहास रच दिया है। 28 साल के अरशदीप द्वितीय विश्व युद्ध के बाद RAF में फाइटर पायलट के रूप में ग्रेजुएट होने वाले पहले सिख बने हैं। उनकी यह उपलब्धि परिवार और समुदाय के लिए गर्व का पल है।

Advertisement

In Short

  • भारतीय मूल के अरशदीप सिंह डांग RAF में फाइटर पायलट बनने वाले द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहले सिख बने।
  • चंडीगढ़ में जन्मे अरशदीप ने कई साल की ट्रेनिंग के बाद 14 अगस्त को फास्ट जेट पायलट विंग्स हासिल किए।
  • अरशदीप ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के समर्थन और पंजाबी संस्कृति से मिली प्रेरणा को दिया।

By Gaurav Kumar:

Arshdeep Singh Dang: भारतीय मूल के फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरशदीप सिंह डांग ने ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (RAF) में नया इतिहास बनाया है। 28 साल के अरशदीप द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फाइटर पायलट के रूप में ग्रेजुएट होने वाले पहले सिख बन गए हैं। उन्होंने 14 अगस्त को नॉर्थ वेल्स के RAF वैली में आयोजित फास्ट जेट पायलट ग्रेजुएशन समारोह में अपने पंख यानी विंग्स हासिल किए।

ब्रिटिश एयर फोर्स ने समारोह के दौरान उनकी उपलब्धि की जानकारी दी। अरशदीप अपने बैच में भारतीय मूल के एकमात्र पायलट थे।

दादा का सपना अरशदीप ने किया पूरा

अरशदीप ने बताया कि उनके पिता को पायलट बनाने का सपना उनके दादा सरदार संतोख सिंह डांग का था, लेकिन दादा का निधन तब हो गया था जब उनके पिता सिर्फ 6 साल के थे। इसके बाद वह सपना पूरा नहीं हो पाया।

अरशदीप ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि वह पायलट बन सकते हैं।

चंडीगढ़ से ब्रिटेन तक का सफर

अरशदीप का जन्म 1998 में चंडीगढ़ में हुआ था। उनके पिता जगदीप सिंह डांग लुधियाना से हैं, जबकि उनकी मां गगनदीप कौर अमृतसर से हैं।

जब अरशदीप 6 साल के थे, तब उनका परिवार ब्रिटेन चला गया। उनका परिवार अब इंग्लैंड के साउथॉल में रहता है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल से गणित और दर्शनशास्त्र में बीएससी ऑनर्स की डिग्री हासिल की।

कई साल की ट्रेनिंग के बाद मिली कामयाबी

अरशदीप ने फरवरी 2022 में ऑफिसर ट्रेनिंग पूरी की। इसके बाद 2023 में एलिमेंट्री फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी की। 2024 में उन्हें फास्ट जेट ट्रेनिंग स्ट्रीम के लिए चुना गया।

उन्होंने मार्च 2025 में फास्ट जेट लीड इन ट्रेनिंग शुरू की और जुलाई 2025 में बेसिक फास्ट जेट ट्रेनिंग पूरी की। अक्टूबर 2025 में उन्हें टेक्सास में अकेले उड़ान भरने का मौका मिला। जुलाई 2026 में उन्होंने विंग्स टेस्ट पास किया।

अब अरशदीप फाइटर जेट उड़ाने से पहले एक साल की और ट्रेनिंग करेंगे।

पंजाबी और सिख पहचान को रखा कायम

अरशदीप ने कहा कि वह अपनी उपलब्धि से समुदाय के युवाओं को प्रेरित करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके घर में आज भी पंजाबी भाषा बोली जाती है और गुरुद्वारा जाना व लंगर में हिस्सा लेना उनके जीवन का हिस्सा रहा है।

उन्होंने कहा कि कठिन उड़ानों के दौरान पंजाबी भावना "चढ़दी कला" ने उन्हें मजबूत बनाए रखा।

सिख पायलटों की परंपरा को आगे बढ़ाया

इससे पहले भी कई सिख पायलटों ने ब्रिटिश एयर फोर्स में योगदान दिया था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट हार्डित सिंह मलिक और लेफ्टिनेंट इंद्र लाल रॉय जैसे पायलटों ने इतिहास बनाया था।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान स्क्वाड्रन लीडर मोहिंदर सिंह पुज्जी भी RAF के शुरुआती भारतीय सिख फाइटर पायलटों में शामिल थे। अब अरशदीप सिंह डांग ने इस विरासत को आगे बढ़ाया है।
 

Read more!
Advertisement