Monsoon Update: देश में अब तक सामान्य से कम बारिश, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित
देश में इस साल मानसून के दौरान अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। IMD के मुताबिक, सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में दर्ज की गई है। वहीं, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत में भी बारिश कम रही, जबकि मध्य भारत में बारिश सामान्य स्तर पर रही। पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- देश में मानसून के दौरान अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
- पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य से 26% कम रही है।
- उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत में भी बारिश कम रही जबकि मध्य भारत में बारिश सामान्य रही।
Monsoon Update: भारत में इस साल मानसून के दौरान अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 7 अगस्त तक के आंकड़े बताते हैं कि जून से सितंबर तक चलने वाले मानसून सीजन में देश में अब तक 451.9 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 509.6 मिलीमीटर बारिश होती है।
अब तक कितनी हुई बारिश?
IMD के आंकड़ों के मुताबिक, मानसून सीजन के दौरान अब तक देश में 451.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह सामान्य 509.6 मिलीमीटर के मुकाबले कम है। ये आंकड़े 7 अगस्त तक की स्थिति को दर्शाते हैं।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा कमी
बारिश की सबसे ज्यादा कमी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में दर्ज की गई है। इस क्षेत्र में सामान्य से 26% कम बारिश हुई है। यह सभी क्षेत्रों में सबसे बड़ी कमी है।
उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी हिस्सों का हाल
उत्तर-पश्चिम भारत में भी मानसून सामान्य से कमजोर रहा। यहां अब तक 10% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
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वहीं, दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से 18% कम रही।
मध्य भारत में सामान्य रही बारिश
देश के बाकी हिस्सों की तुलना में मध्य भारत में मानसून की स्थिति बेहतर रही। IMD के अनुसार, इस क्षेत्र में बारिश सामान्य स्तर पर दर्ज की गई है। यानी यहां वर्षा में किसी तरह की कमी या अधिकता नहीं रही।
देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसा रहा मानसून
यह मौसमी बारिश के आंकड़े भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा तैयार किए गए हैं। ये आंकड़े जून से सितंबर तक चलने वाले पूरे मानसून सीजन के दौरान हुई संचयी (क्यूम्युलेटिव) बारिश को दर्शाते हैं। 7 अगस्त तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का वितरण समान नहीं रहा और कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई।