ऊर्जा संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला! कमर्शियल LPG सप्लाई 50 से बढ़कर 70% तक हुई, इन इंडस्ट्रीज को होगा फायदा

वैश्विक ऊर्जा अस्थिरता के बीच यह कदम उद्योगों के लिए राहत का संकेत है। बढ़ी हुई LPG सप्लाई से उत्पादन पर दबाव कम होगा और रोजगार पर असर सीमित रहेगा। सरकार का फोकस साफ है—जरूरी सेक्टरों को सपोर्ट देकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रखना।

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By Gaurav Kumar:

पश्चिम एशिया में जारी ऊर्जा संकट के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कुल सप्लाई को बढ़ाकर प्री-क्राइसिस स्तर के 70% तक करने का फैसला किया है, जो पहले 50% पर सीमित थी। यानी अब 20% अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अस्थिरता बनी हुई है और भारत जैसे आयात-निर्भर देश सप्लाई को संतुलित रखने की कोशिश कर रहे हैं।

किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल के मुताबिक, इस अतिरिक्त LPG आवंटन का फायदा सबसे पहले श्रम-प्रधान उद्योगों को दिया जाएगा। इसमें स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, डाई, केमिकल और प्लास्टिक जैसे सेक्टर शामिल हैं।

सरकार ने खासतौर पर उन प्रोसेस इंडस्ट्रीज को प्राथमिकता देने की बात कही है, जहां LPG का इस्तेमाल विशेष हीटिंग के लिए होता है और जिसे प्राकृतिक गैस से बदला नहीं जा सकता।

पहले किन सेक्टरों को मिली थी प्राथमिकता?

23 मार्च को सरकार ने कमर्शियल LPG की सप्लाई को 50% तक बढ़ाया था। उस समय अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, कम्युनिटी किचन, होटल और रेस्तरां को प्राथमिकता दी गई थी।

इसके अलावा, प्रवासी मजदूरों के लिए रोजाना करीब 180 छोटे (5 किलो) सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि जरूरी जरूरतें प्रभावित न हों।

LPG आवंटन बढ़ाने का यह फैसला सरकार के व्यापक राहत पैकेज का हिस्सा है। इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाई थी, ताकि ग्लोबल तेल कीमतों के असर को कम किया जा सके।

साथ ही डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता दी गई है, जबकि ONGC जैसी घरेलू कंपनियों पर कोई विंडफॉल टैक्स नहीं लगाया गया है।

सप्लाई चेन मजबूत रखने पर फोकस

सरकार का फोकस साफ है- एनर्जी की उपलब्धता बनाए रखना और जरूरी उद्योगों को झटका न लगने देना। मौजूदा ग्लोबल अनिश्चितता के बीच यह कदम उत्पादन और रोजगार दोनों को सहारा देने की कोशिश माना जा रहा है।

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