IIT Bombay पहुंचकर टूटा टॉपर होने का भ्रम, कहा- घर पर टॉपर थी, यहां सब...शेयर की ये खास वीडियो
IIT Bombay की पूर्व छात्रा मिसाकी ने बताया कि देश के सबसे प्रतिभाशाली छात्रों के बीच पहुंचने के बाद उनका आत्मविश्वास डगमगा गया था। स्कूल की टॉपर होने के बावजूद उन्हें लगा कि वह अब खास नहीं हैं। हालांकि, असफलताओं और अनुभवों ने उनकी सोच बदली और उन्हें अपनी राह चुनने का हौसला दिया।

In Short
- आईआईटी की पूर्व छात्रा ने बताया कि देश के टॉप छात्रों के बीच पहुंचकर उनका आत्मविश्वास डगमगा गया था
- उन्होंने कहा कि करियर हमेशा डिग्री के हिसाब से नहीं चलता और असफलताएं आगे बढ़ने का हिस्सा होती हैं।
- पूर्व छात्रा ने युवाओं को दूसरों की सैलरी और सफलता से तुलना करने के बजाय अपनी राह चुनने की सलाह दी।
स्कूल में हमेशा टॉप करने वाले छात्रों के लिए बड़े संस्थान में कदम रखना कई बार आत्मविश्वास की परीक्षा बन जाता है। IIT Bombay की एक पूर्व छात्रा मिसाकी ने अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि कैसे देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पहुंचने के बाद उन्हें लगा कि वह अब सबसे अलग नहीं हैं, लेकिन इसी अनुभव ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की।
IIT पहुंचकर बदला नजरिया
आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई करने वाली इस पूर्व छात्रा ने 10 साल बाद पवई कैंपस लौटने पर अपने शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि 2016 में जब उन्होंने संस्थान में दाखिला लिया था, तब वह खुद को लेकर काफी असहज महसूस करती थीं।
एक वीडियो में आईआईटी की पूर्व छात्रा ने कहा कि घर पर शायद मैं टॉपर थी, लेकिन यहां मेरे आसपास देशभर के टॉपर और बेहद प्रतिभाशाली लोग थे। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी में बातचीत करने को लेकर भी उन्हें आत्मविश्वास की कमी महसूस होती थी और पढ़ाई को लेकर वह खुद पर ज्यादा दबाव डालती थीं। उस समय उन्हें लगा कि मैं अब खास नहीं हूं।
दस साल बाद उनकी सोच काफी बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने कई बार असफलताओं का सामना किया, लेकिन यही अनुभव उनके विकास का हिस्सा बने।
उन्होंने बताया कि आज वह अंग्रेजी में ज्यादा आत्मविश्वास से बात करती हैं और पेशेवर व आर्थिक रूप से भी अच्छा कर रही हैं। खास बात यह है कि उनका मौजूदा करियर IIT Bombay में पढ़ाई गई डिग्री से जुड़ा नहीं है।
उन्होंने कहा कि कई IIT ग्रेजुएट्स का करियर उनकी डिग्री से अलग दिशा में जाता है। उनके मुताबिक, छात्रों को यह नहीं मानना चाहिए कि उनकी डिग्री ही पूरी जिंदगी का करियर तय करेगी।
दूसरों की सफलता से अपनी तुलना न करें
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपनी यात्रा की तुलना दूसरों से न करें। उन्होंने कहा, "दूसरों से तुलना करके खुद पर ज्यादा दबाव मत डालिए। अपनी गति से अपना रास्ता खोजिए, क्योंकि हर व्यक्ति अलग होता है।" उनका कहना है कि नौकरी, सैलरी, प्रमोशन और पद की तुलना में फंसने से युवा अपने असली लक्ष्य से दूर हो सकते हैं।
रेस में नहीं, अपनी पसंद के रास्ते पर चलें
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे समाज और दूसरों की उम्मीदों के दबाव में आकर फैसले न लें। उनके अनुसार, हर अगली नौकरी, प्रमोशन या सैलरी बढ़ोतरी जरूरी नहीं कि वही हो जो व्यक्ति वास्तव में चाहता है।
उन्होंने कहा, "धैर्य रखें और खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। जिंदगी का आनंद लें और चीजों को समझने का समय दें। सब ठीक हो जाएगा।"