हरियाणा में 3 दिन बिजली गुल होने का खतरा! निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का हड़ताल का ऐलान

हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर विवाद बढ़ गया है। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को 25 साल का लाइसेंस मिलने से बिजली कर्मचारी नाराज हैं। इसके विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया गया है। इससे बिजली सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है।

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In Short

  • हरियाणा में 22 से 24 अक्टूबर तक बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का ऐलान।
  • गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के निजीकरण का विरोध।
  • तीन दिन की हड़ताल से बिजली सप्लाई प्रभावित होने की आशंका।

By Sonam:

हरियाणा में बिजली वितरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी 'इलेवन पावर' को 25 साल का समानांतर लाइसेंस दिया है। इस फैसले के बाद बिजली कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। कर्मचारियों ने इसके विरोध में 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिन की पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है।

क्या है पूरा मामला?

हरियाणा बिजली नियामक आयोग ने दशहरा से ठीक पहले गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर को 25 साल का समानांतर लाइसेंस देने का फैसला किया।

इस फैसले का बिजली निगम कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चा ने कड़ा विरोध किया है। कर्मचारियों ने इसे जन-विरोधी और कर्मचारी-विरोधी बताया है।

उनका आरोप है कि सरकार सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले इलाकों में निजी कंपनी को मौका देकर सरकारी बिजली निगम दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को कमजोर कर रही है।

22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल का ऐलान

बिजली कर्मचारियों ने इस फैसले के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।

इंजीनियर एसोसिएशन के महासचिव रविंद्र घणघस के मुताबिक, 19 अक्टूबर को हुई आपात बैठक में आंदोलन की रणनीति तैयार की गई थी।

इसके तहत 21 अक्टूबर को आयोग के आदेश की प्रतियां जलाई जाएंगी। इसके बाद 22, 23 और 24 अक्टूबर को लगातार तीन दिन पूर्ण हड़ताल की जाएगी।

कर्मचारी संगठनों ने बताया कि 24 अक्टूबर को हड़ताल के तीसरे दिन अगले चरण के बड़े आंदोलन की घोषणा भी की जाएगी।

40 हजार कर्मचारियों के भविष्य पर संकट का दावा

बिजली कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चा का कहना है कि निजीकरण के इस फैसले से हरियाणा के करीब 40 हजार कर्मचारियों और इंजीनियरों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। इनमें स्थायी, अस्थायी और आउटसोर्सिंग कर्मचारी शामिल हैं।

कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि निजी कंपनी मुनाफे वाले क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देगी, जबकि घाटे वाले ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों की जिम्मेदारी सरकारी बिजली निगमों पर बनी रहेगी।

क्या आम लोगों के लिए महंगी होगी बिजली?

संयुक्त मोर्चा ने आशंका जताई है कि निजीकरण से आम उपभोक्ताओं, किसानों और छोटे दुकानदारों पर महंगी बिजली का बोझ बढ़ सकता है।

कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि जनता के पैसों से तैयार बिजली के बुनियादी ढांचे का फायदा निजी कंपनी को मिलेगा।

क्या हरियाणा में बिजली सप्लाई होगी प्रभावित?

तीन दिन की पूर्ण हड़ताल की चेतावनी के बाद राज्य में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

कर्मचारी संगठनों के आंदोलन से बिजली वितरण व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। हालांकि, हड़ताल के दौरान बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

फिलहाल बिजली कर्मचारियों का संयुक्त मोर्चा अपने विरोध पर कायम है और 24 अक्टूबर को आंदोलन के अगले चरण की रणनीति सामने आने वाली है।

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