H-1B लॉटरी हारी फिर भी नहीं छोड़ी उम्मीद; EB-1A वीजा से भारतीय इंजीनियर बने अमेरिकी नागरिक
H-1B वीजा लॉटरी में असफलता और USCIS जांच जैसी मुश्किलों के बाद भी भारतीय मूल के साइमन शेट्टी ने हार नहीं मानी। उन्होंने EB-1A वीजा के जरिए अपनी पहचान बनाई और अब अमेरिकी नागरिक बन चुके हैं। उनकी कहानी कुशल प्रवासियों के संघर्ष और सफलता को दिखाती है।

In Short
- H-1B लॉटरी में असफल होने के बाद साइमन शेट्टी ने EB-1A वीजा का रास्ता चुना।
- USCIS जांच के बाद भी उनके खिलाफ कोई गलती नहीं मिली और मामला बंद हो गया।
- Tesla Lyft और Nuro जैसी कंपनियों में काम करने के बाद उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया।
भारतीय मूल के उद्यमी साइमन शेट्टी की अमेरिका तक पहुंचने की कहानी आसान नहीं रही। H-1B वीजा लॉटरी में असफलता आर्थिक दबाव और USCIS जांच जैसी चुनौतियों के बाद भी उन्होंने अपनी राह बनाई और अब वह अमेरिकी नागरिक बन चुके हैं। उनकी यह यात्रा कई कुशल प्रवासियों के लिए एक मिसाल बन गई है।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद शुरू हुआ अमेरिका का सफर
साइमन शेट्टी ने 2013 में विश्वेश्वरैया तकनीकी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद अमेरिका का रुख किया। इसके बाद उन्होंने एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की।
भारत से अमेरिका आने वाले वह अपने परिवार के पहले व्यक्ति थे। ऐसे में उनके सामने शुरुआत से ही खुद का करियर बनाने और अमेरिका में रहने का रास्ता तैयार करने की बड़ी चुनौती थी।
टेस्ला लिफ्ट और न्यूरो जैसी कंपनियों में किया काम
पढ़ाई पूरी करने के बाद साइमन ने तकनीकी क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों में काम किया। उन्होंने टेस्ला लिफ्ट और न्यूरो जैसी कंपनियों के साथ काम करते हुए अपना अनुभव बढ़ाया।
बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना कारोबार शुरू किया। उन्होंने रिज्यूमपप्पी नाम का मंच शुरू किया जो तकनीकी पेशेवरों को नौकरी के लिए बेहतर आवेदन तैयार करने में मदद करता है।इसके बाद उन्होंने स्मार्ट इमिग्रेशन एआई शुरू किया जो कुशल प्रवासियों को अमेरिका की आव्रजन प्रक्रिया समझने और करियर बनाने में मदद करता है।
H-1B लॉटरी में हार के बाद चुना EB-1A वीजा का रास्ता
साइमन के लिए अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का रास्ता आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि H-1B वीजा लॉटरी में उनका चयन नहीं हुआ था। इसके अलावा उन्हें नौकरी आर्थिक दबाव और आव्रजन प्रक्रिया में देरी जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा।
इसके बाद उन्होंने EB-1A वीजा का रास्ता चुना। यह रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड श्रेणी है जिसमें किसी व्यक्ति को अपने क्षेत्र में असाधारण क्षमता साबित करनी होती है।
इस वीजा की खास बात यह है कि इसमें किसी कंपनी के प्रायोजक की जरूरत नहीं होती। आवेदक खुद अपना आवेदन दाखिल कर सकता है और अपनी उपलब्धियों के आधार पर पात्रता साबित कर सकता है।
USCIS जांच के बाद भी मिली सफलता
साइमन को आगे चलकर एक और चुनौती का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार कुछ लोगों ने उनके आव्रजन मंच को लेकर अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा यानी USCIS में शिकायत की थी।
USCIS ने मामले की जांच की लेकिन जांच में कोई गलती नहीं मिली और मामला उनके पक्ष में बंद हो गया।
इसके बाद उन्होंने अपनी अमेरिकी नागरिकता हासिल की। उनका कहना है कि यह सफर उन्हें यह समझाने वाला था कि कई कुशल प्रवासियों को इस प्रक्रिया में मदद की जरूरत होती है।
EB-1A वीजा क्या है और कैसे मिलता है
EB-1A वीजा को अक्सर "आइंस्टीन वीजा" भी कहा जाता है। यह उन लोगों के लिए होता है जो विज्ञान कारोबार शिक्षा कला या खेल जैसे क्षेत्रों में असाधारण क्षमता साबित कर सकते हैं।
इसके लिए आवेदक को अपनी उपलब्धियों के सबूत देने होते हैं। इसमें बड़े पुरस्कार अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान प्रकाशित काम दूसरों के काम को परखना नेतृत्व की भूमिका शैक्षणिक लेख या अपने साथियों की तुलना में ज्यादा कमाई जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं।
नोबेल पुरस्कार ऑस्कर ग्रैमी या ओलंपिक पदक जैसी बड़ी उपलब्धियां रखने वाले लोगों को इस श्रेणी में विशेष मान्यता मिल सकती है।