40 लाख का पैकेज, BMW कार, फिर भी खुद को 'गरीब' मानता है ये युवक...

हाल ही में कैंसर एक्सपर्ट डॉ. सनी गर्ग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर की। डॉ. गर्ग के बताया कि युवक उनके पास नींद न आने और चिंता की शिकायत लेकर आया था। बातचीत के दौरान उसने कहा, डॉक्टर मुझे लगता है कि मैं बहुत गरीब हूं और इस सोच में मुझे रात में नींद नहीं आती।

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By Gaurav Kumar:

गुरुग्राम में रहने वाले एक 34 साल के युवक की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। यह युवक सालाना करीब 40 लाख रुपये कमाता है अपने खुद के 2BHK फ्लैट में रहता है और BMW जैसी अच्छी कार चलाता है। लेकिन इसके बावजूद भी उसे लगता है कि वह बहुत गरीब है और रातों को ठीक से सो भी नहीं पाता।

यह बात हाल ही में कैंसर एक्सपर्ट डॉ. सनी गर्ग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर की। डॉ. गर्ग के बताया कि युवक उनके पास नींद न आने और चिंता की शिकायत लेकर आया था। बातचीत के दौरान उसने कहा, डॉक्टर मुझे लगता है कि मैं बहुत गरीब हूं और इस सोच में मुझे रात में नींद नहीं आती।

लग्जरी लाइफस्टाइल के बाद खुद को गरीब समझ रहे लोग

डॉ. गर्ग ने बताया कि आजकल ऐसे कई लोग मिल रहे हैं जो अच्छी कमाई के बावजूद खुद को सफल महसूस नहीं कर पाते। इसकी वजह पैसे की कमी नहीं बल्कि लगातार दूसरों से कंपेयर करना है।

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डॉक्टर के अनुसार, यह युवक भारत के सबसे ज्यादा कमाने वाले लोगों में शामिल है। लेकिन अब वह अपनी तुलना गांव के किसी साधारण नौकरी करने वाले व्यक्ति से नहीं करता, बल्कि LinkedIn और सोशल मीडिया पर दिखने वाले उन युवाओं से करता है जिन्होंने कम उम्र में करोड़ों रुपये की कंपनियां खड़ी कर ली हैं या स्टार्टअप बेचकर बड़ी संपत्ति बना ली है।

डॉ. गर्ग का कहना है कि यह गरीबी पैसों की नहीं, बल्कि संतुष्टि की कमी की है। इंसान जितना कमाता है, उससे ज्यादा उसकी उम्मीदें बढ़ती जाती हैं और उसे लगता है कि वह अभी भी पीछे है। 

युवक की सोच को समझने के लिए डॉक्टर ने उससे तीन सवाल पूछे

पहला सवाल - पिछले एक साल में कितनी बार आपने खुद से कहा कि 'मैं जैसा हूं, ठीक हूं' या 'मैं पर्याप्त हूं'? युवक का जवाब था - कभी नहीं।

दूसरा सवाल - आप इतनी मेहनत और कमाई आखिर किसके लिए कर रहे हैं? कुछ देर सोचने के बाद युवक ने माना कि उसे खुद नहीं पता। वह बस दूसरों को आगे बढ़ते देखकर उनके बराबर पहुंचने की कोशिश कर रहा है।

तीसरा सवाल - क्या आपकी जिंदगी में कोई ऐसी चीज है जो आप सिर्फ खुशी के लिए करते हों, पैसे कमाने या करियर बनाने के लिए नहीं? इस सवाल का जवाब भी 'नहीं' था।

इन जवाबों के बाद डॉ. गर्ग ने कहा कि समस्या पैसे की नहीं बल्कि जीवन के उद्देश्य और बैलेंस की है। उन्होंने कहा कि जब जिंदगी की हर चीज को पैसे और करियर से जोड़ दिया जाता है, तो इंसान धीरे-धीरे मशीन बन जाता है।

कंपैरिजन की आदत ने छीना सुख-चैन

डॉक्टर की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। कई लोगों ने माना कि आज के दौर में सोशल मीडिया लोगों पर लगातार सफल दिखने का दबाव बनाता है। लोग दूसरों की महंगी कारें, आलीशान घर, विदेशी छुट्टियां और करोड़ों की सफलता देखते हैं और अपनी तरक्की व कामयाबी को छोटा समझने लगते हैं।

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा सोशल मीडिया का यही असर है। आप चाहे कितना भी कमा लें, हमेशा कोई न कोई आपसे ज्यादा अमीर दिख जाएगा। एक दूसरे यूजर ने कहा कुछ साल पहले घर और कार होना सफलता मानी जाती थी। आज लोग अपनी तुलना स्टार्टअप फाउंडर्स और इन्फ्लुएंसर्स से करने लगे हैं। 

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वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा समस्या कमाई नहीं, तुलना करने की आदत है। इसी तरह यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई और लोग अपनी-अपनी बाते रखने लगे।

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