₹52 लाख की नौकरी छोड़ बेचने लगे मोमोज! ढाई साल में ₹5 करोड़ का कारोबार, गुरुग्राम के शख्स की कहानी
गुरुग्राम के 33 वर्षीय साकेत सौरभ ने सालाना ₹52 लाख की नौकरी छोड़कर मोमोज का कारोबार शुरू किया। शुरुआत एक छोटी सी रेहड़ी से हुई, जहां रोजाना हजारों रुपये की बिक्री होने लगी। आज उनका ब्रांड The Momos Mafia सात राज्यों तक पहुंच चुका है और ढाई साल में ₹5 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल कर चुका है। जानिए उनकी सफलता का पूरा सफर।

In Short
- साकेत सौरभ ने ₹52 लाख सालाना सैलरी वाली नौकरी छोड़कर मोमोज का बिजनेस शुरू किया।
- एक रेहड़ी से शुरू हुआ The Momos Mafia अब सात राज्यों में फैल चुका है।
- ढाई साल में कारोबार का कुल रेवेन्यू ₹5 करोड़ के पार पहुंच गया।
गुरुग्राम के 33 वर्षीय साकेत सौरभ ने सालाना ₹52 लाख की नौकरी छोड़कर मोमोज बेचने का फैसला किया। शुरुआत एक छोटी सी रेहड़ी से हुई, लेकिन आज उनका कारोबार सात राज्यों तक पहुंच चुका है। महज ढाई साल में उनके फूड ब्रांड The Momos Mafia ने ₹5 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू हासिल किया है।
₹52 लाख की नौकरी छोड़ने का फैसला क्यों लिया?
साकेत सौरभ ने दिल्ली के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से पढ़ाई की है। साल 2014 में उन्होंने Wowflux नाम की कंपनी शुरू की थी। बाद में FlixStock ने इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया।
इसके बाद साकेत FlixStock में प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम करने लगे, जहां उनकी सालाना सैलरी ₹52 लाख थी। हालांकि, सितंबर 2023 में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना फूड बिजनेस आगे बढ़ाने का फैसला किया।
छोटी सी रेहड़ी से कैसे शुरू हुआ कारोबार?
साकेत अपनी बहन और जीजा के साथ गुरुग्राम में Bamboo Cafe चलाने में मदद करते थे। इस कैफे में पराठे से लेकर बिरयानी तक कई तरह के खाने मिलते थे, लेकिन सबसे ज्यादा बिक्री मोमोज की होती थी।
इसी को देखते हुए उन्होंने कैफे के बाहर एक छोटा स्टॉल लगाया, जहां सिर्फ मोमोज बेचे जाते थे। इसके बाद गुरुग्राम के Infotech इलाके में मोमोज की रेहड़ी लगाई गई। साकेत के मुताबिक, इस रेहड़ी से रोजाना ₹10,000 से ₹12,000 तक की बिक्री होने लगी।
कैसे सात राज्यों तक पहुंचा The Momos Mafia?
मोमोज की बढ़ती मांग देखकर कई ऑफिस कर्मचारियों ने साकेत से खुद की रेहड़ी खोलने की इच्छा जताई। यहीं से फ्रेंचाइजी मॉडल का आइडिया आया।
जनवरी 2024 में The Momos Mafia को आधिकारिक तौर पर रजिस्टर किया गया। कंपनी में साकेत समेत पांच पार्टनर हैं। आज यह ब्रांड सात राज्यों में करीब 40 रेहड़ियां, 20 छोटे आउटलेट और दो क्विक सर्विस रेस्टोरेंट संचालित करता है।
शुरुआत में रेहड़ियां हटाए जाने, कर्मचारियों की कमी और मौसम जैसी चुनौतियों के चलते कंपनी ने नया मॉडल अपनाया। इसमें छोटी दुकानों के बाहर रेहड़ी लगाई जाती है। इसे CSR यानी Cart Service Restaurant मॉडल नाम दिया गया।
ढाई साल में ₹5 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू
साकेत के मुताबिक, कारोबार ने वित्त वर्ष 2023-24 के शुरुआती तीन महीनों में ₹16 लाख की कमाई की। अगले साल रेवेन्यू ₹2.2 करोड़ रहा। चालू वित्त वर्ष में भी कंपनी ₹2.2 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज कर चुकी है और साल के अंत तक ₹3 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
साकेत का कहना है कि ढाई साल में कारोबार का कुल रेवेन्यू ₹5 करोड़ पार कर चुका है। हालांकि, यह बिक्री से हुई आय है, कंपनी का शुद्ध मुनाफा नहीं।