2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में बड़ा फैसला, गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी बरकरार रखी
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में 18 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला आया है। यह फैसला उन परिवारों के लिए भी अहम है, जो इस हमले के बाद से इंसाफ का इंतजार कर रहे थे। हाईकोर्ट ने सजा और मुआवजे को लेकर बड़ी बात कही है। आइए जानते हैं।

In Short
- गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है, जबकि 11 दोषियों की उम्रकैद भी जारी रहेगी।
- 2008 में अहमदाबाद में 70 मिनट के अंदर 21 धमाके हुए थे, जिनमें 56 लोगों की मौत हुई और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए।
- कोर्ट ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का आदेश दिया है। मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और घायलों को 1-1 लाख रुपये मिलेंगे।
2008 Ahmedabad Blast Verdict: अहमदाबाद में 2008 में हुए धमाकों की याद आज भी कई परिवारों के लिए दर्द से जुड़ी है। इतने सालों से लोग इस केस में बड़े फैसले का इंतजार कर रहे थे। अब गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह मामला फिर चर्चा में है। ऐसे में सवाल है कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में 38 लोगों की फांसी की सजा बरकरार रखी है। साथ ही 11 लोगों की उम्रकैद की सजा भी जारी रहेगी। हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए यह आदेश दिया।
कोर्ट ने धमाकों में जान गंवाने वालों के परिवारों और घायलों के लिए मदद की रकम भी तय की है। 56 मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपये दिए जाएंगे। अब सवाल है कि 2008 में अहमदाबाद में उन 70 मिनटों के दौरान क्या हुआ था?
70 मिनट में हुए थे 21 धमाके
यह मामला 26 जुलाई 2008 का है। उस दिन अहमदाबाद में करीब 70 मिनट के अंदर एक के बाद एक 21 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों से पूरा शहर डर और अफरा-तफरी में आ गया था। इस हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
बम साइकिल पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाए गए थे। शहर की बसों, बाजारों और अस्पताल जैसी जगहों को निशाना बनाया गया था। धमाकों के बाद अहमदाबाद और सूरत से भी कई बम मिले थे। अब सवाल है कि इन धमाकों की जिम्मेदारी किस संगठन ने ली थी?
इंडियन मुजाहिदीन ने ली थी जिम्मेदारी
इन धमाकों की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन नाम के संगठन ने ली थी। कहा गया कि ये हमले 2002 के गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए किए गए थे। धमाकों के बाद जांच एजेंसियों ने तेजी से काम शुरू किया और कई लोगों को पकड़ा गया।
यह मामला कोर्ट में लंबे समय तक चला। बाद में स्पेशल कोर्ट ने मामले में शामिल लोगों को सख्त सजा सुनाई थी। अब गुजरात हाईकोर्ट ने भी उसी फैसले को बरकरार रखा है। अब सवाल है कि इस फैसले से पीड़ित परिवारों को क्या राहत मिली?
पीड़ित परिवारों को मिला इंतजार का जवाब
हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली है। 18 साल पहले हुए इस हमले का दर्द आज भी कई परिवारों के दिल में है। कोर्ट के फैसले के बाद अब सजा जारी रहेगी और पीड़ित परिवारों को मदद की रकम भी मिलेगी।