विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार अलर्ट, सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट और वीडियो के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अहम एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने कुछ खास तरह के ऑनलाइन कंटेंट को लेकर चिंता जताई है। आखिर किन पोस्ट और वीडियो पर कार्रवाई हो सकती है और कंपनियों को क्या निर्देश मिले हैं? जानिए।

In Short
- विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को अहम एडवाइजरी जारी की।
- फर्जी, भ्रामक और संदर्भ से हटकर पेश किए गए कंटेंट पर कार्रवाई को प्राथमिकता देने की सलाह।
- AI से तैयार कंटेंट पर लेबल लगाने और जांच एजेंसियों को समय पर सहयोग देने के निर्देश।
देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को अहम सलाह जारी की है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से कहा है कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी गैरकानूनी, फर्जी और भ्रामक जानकारी पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए। खासतौर पर उन पोस्ट और वीडियो पर ध्यान देने को कहा गया है, जिनके खिलाफ पुलिस या दूसरी अधिकृत सरकारी एजेंसियों की ओर से शिकायत मिलती है।
IT मंत्रालय ने 8 अक्टूबर को जारी की एडवाइजरी
सूत्रों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 8 अक्टूबर को सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी ऐसी ऑनलाइन सामग्री पर चिंता जताई गई है, जिसमें गलत जानकारी फैलाई जा रही है या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
मंत्रालय ने उन पोस्ट को लेकर भी चिंता जताई है, जिनमें किसी जानकारी को उसके सही संदर्भ से अलग करके दिखाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि ऐसी सामग्री लोगों के बीच गलतफहमी पैदा कर सकती है।
कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका
IT मंत्रालय ने आशंका जताई है कि सोशल मीडिया पर फैल रही इस तरह की गैरकानूनी सामग्री से सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक शांति प्रभावित हो सकती है। इससे कानून-व्यवस्था से जुड़ी परेशानियां बढ़ने और हिंसा भड़कने का भी खतरा हो सकता है।
मामले की जानकारी रखने वाले एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक, मंत्रालय ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को सलाह दी है कि वे ऐसी गैरकानूनी सामग्री की पहचान करें और अधिकृत सरकारी संस्थाओं से मिलने वाली शिकायतों पर प्राथमिकता से कार्रवाई करें।
AI से तैयार वीडियो और तस्वीरों पर भी नजर
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या दूसरी तकनीकों की मदद से तैयार किए गए कंटेंट को लेकर भी निर्देश दिए हैं।
एडवाइजरी में कहा गया है कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सिंथेटिक यानी तकनीक से तैयार सामग्री की स्पष्ट पहचान करें और उस पर लेबल लगाएं। खासतौर पर ऐसी सामग्री पर ध्यान दिया जाए, जिसे मौजूदा विरोध प्रदर्शनों की वास्तविक घटना के तौर पर दिखाया जा रहा हो।
जांच एजेंसियों को समय पर देनी होगी जानकारी
मंत्रालय ने सोशल मीडिया कंपनियों को कानून लागू करने वाली एजेंसियों और दूसरी अधिकृत सरकारी संस्थाओं के साथ समय पर सहयोग करने की सलाह भी दी है।
सूत्रों के अनुसार, कंपनियों को IT Rules, 2021 के तहत लागू कानूनी प्रावधानों और निर्धारित समयसीमा का पालन करते हुए जरूरी जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है।
सरकार की एडवाइजरी का मुख्य जोर विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी गैरकानूनी ऑनलाइन सामग्री की पहचान, शिकायतों पर प्राथमिकता से कार्रवाई और संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ समय पर सहयोग सुनिश्चित करने पर है।