फ्रांस में दुकानों पर धावा, फिर ऑनलाइन दिखने लगे महंगे हैंडबैग! 3,000 कारोबार प्रभावित, सरकार ने लिया बड़ा एक्शन
फ्रांस में सरकार के खिलाफ भड़के विरोध प्रदर्शनों के बीच हजारों दुकानों और कारोबारियों को नुकसान पहुंचा है। पेरिस में बड़े लग्जरी ब्रांड्स के स्टोर भी निशाने पर आए। लेकिन असली हैरानी तब हुई, जब कुछ ही घंटों बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महंगे हैंडबैग और दूसरे उत्पादों की लिस्टिंग बढ़ने लगी। आखिर सरकार को Amazon, eBay और Vinted जैसी कंपनियों को क्यों बुलाना पड़ा? जानिए पूरा मामला।

In Short
- फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान 3,000 से ज्यादा कारोबारी प्रतिष्ठानों में लूटपाट या तोड़फोड़ हुई।
- Vinted पर लग्जरी सामान की संदिग्ध लिस्टिंग बढ़ने से चोरी के उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री की आशंका गहराई।
- फ्रांस सरकार ने Amazon, eBay, Meta, TikTok और अन्य प्लेटफॉर्म से संदिग्ध लिस्टिंग हटाने को कहा।
फ्रांस में आर्थिक संकट और राजनीतिक गतिरोध के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश में एक सप्ताहांत के दौरान 3,000 से ज्यादा दुकानों और कारोबारी प्रतिष्ठानों में लूटपाट या तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि दुकानों से सामान लूटे जाने के कुछ ही घंटों बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लग्जरी हैंडबैग, कॉस्मेटिक्स और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग बढ़ने लगी। इसके बाद फ्रांस सरकार ने कई बड़ी ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया कंपनियों से जवाब मांगा है।
फ्रांस में क्यों भड़के विरोध प्रदर्शन?
फ्रांस में बढ़ते सरकारी कर्ज, स्कूलों की खराब स्थिति और राजनीतिक गतिरोध को लेकर लोगों में नाराजगी है। इन्हीं मुद्दों पर इस सप्ताह बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे।
हालांकि, इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगह हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं भी हुईं। इसका सबसे ज्यादा असर दुकानदारों और रिटेल कारोबारियों पर पड़ा।
फ्रांस के वाणिज्य मंत्री सर्ज पापिन के मुताबिक, सप्ताहांत में 3,000 से ज्यादा कारोबारी प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाया गया या वहां लूटपाट हुई।
राजधानी पेरिस के ले हॉल्स इलाके की दुकानें भी प्रभावित हुईं। इनमें Hermès, The North Face और Louis Vuitton जैसे बड़े ब्रांड्स के स्टोर शामिल थे।
दुकानों में लूटपाट, फिर ऑनलाइन दिखने लगा सामान
प्रदर्शनों के दौरान दुकानों से सामान चोरी होने के कुछ ही घंटों बाद ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लग्जरी उत्पादों की नई लिस्टिंग दिखाई देने लगीं।
इनमें हैंडबैग, कॉस्मेटिक्स और स्किनकेयर प्रोडक्ट्स जैसे सामान शामिल थे। अचानक बड़ी संख्या में महंगे उत्पादों की लिस्टिंग आने से आशंका जताई गई कि इनमें कुछ सामान लूटी गई दुकानों का हो सकता है।
हालांकि, केवल ऑनलाइन लिस्टिंग बढ़ने से यह साबित नहीं होता कि हर उत्पाद चोरी का था। यूरोप के प्रमुख सेकंडहैंड मार्केटप्लेस Vinted पर भी लग्जरी सामान की लिस्टिंग में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई।
सरकार ने Amazon और eBay समेत कई कंपनियों को बुलाया
मामला सामने आने के बाद फ्रांस सरकार ने तुरंत कार्रवाई की।
सोमवार शाम तक वाणिज्य मंत्री सर्ज पापिन और डिजिटल मामलों की मंत्री ऐन ले हेनाफ ने कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की।
इस बैठक में Vinted, फ्रांस के सेकंडहैंड मार्केटप्लेस Leboncoin, Amazon, eBay, Meta और TikTok जैसी कंपनियों को बुलाया गया।
सरकार ने इन प्लेटफॉर्म से संदिग्ध लिस्टिंग हटाने और चोरी के सामान की ऑनलाइन बिक्री रोकने के लिए कदम उठाने को कहा।
Vinted ने क्या कहा?
Vinted ने स्पष्ट किया है कि उसके प्लेटफॉर्म पर चोरी का सामान बेचना या उसकी मांग करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। कंपनी के प्रवक्ता ने Fortune को दिए बयान में कहा कि चोरी के सामान की बिक्री के प्रति उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है।
कंपनी ने यह भी बताया कि वह फ्रांस के अधिकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। Vinted के मुताबिक, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और उन्हें रोकने के लिए उसके सिस्टम में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं।
इससे पहले कंपनी के एक प्रवक्ता ने RetailDetail को बताया था कि प्लेटफॉर्म पर लग्जरी सामान की लिस्टिंग में स्पष्ट उछाल देखा गया है। सामान्य परिस्थितियों में इतनी बड़ी संख्या में ऐसे उत्पाद बिक्री के लिए नहीं आते।
ऑनलाइन चोरी का सामान बेचना कितनी बड़ी समस्या?
दुकानों से चोरी किए गए सामान की ऑनलाइन बिक्री सिर्फ फ्रांस तक सीमित समस्या नहीं है।
सिक्योरिटी कंपनी Pinkerton के अनुमान के मुताबिक, रिटेल चोरी से जुड़ा आर्थिक नुकसान 2024 में करीब 45 अरब डॉलर था। इसके 2027 तक बढ़कर 53 अरब डॉलर पहुंचने का अनुमान है। अमेरिका के National Retail Federation के मुताबिक, संगठित रिटेल अपराध करने वाले समूह अब पहले से ज्यादा जटिल तरीके अपना रहे हैं।
इनमें गिफ्ट कार्ड धोखाधड़ी, फोन स्कैम और सप्लाई चेन से सामान चोरी करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। ब्रिटेन की British Independent Retailers Association ने 2024 में अनुमान लगाया था कि उसके सदस्य कारोबारियों की दुकानों से चोरी हुए लगभग 60% उत्पाद आखिरकार ऑनलाइन बेचे जाते हैं।
फ्रांस को कितना आर्थिक नुकसान हो सकता है?
फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और दुकानों को नुकसान पहुंचाए जाने का आर्थिक असर भी बड़ा हो सकता है।
रेटिंग एजेंसी Morningstar DBRS के अनुमान के मुताबिक, अगर आगे हिंसा नहीं बढ़ती है, तो इन घटनाओं से बीमा के तहत आने वाला नुकसान करीब 1.2 अरब यूरो यानी लगभग 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
वहीं, फ्रांस के प्रमुख रिटेल संगठन Fédération du commerce et de la distribution ने प्रत्यक्ष नुकसान कई सौ मिलियन यूरो होने का अनुमान जताया है।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि हिंसक प्रदर्शन केवल दुकानों के सामान तक सीमित नुकसान नहीं पहुंचा रहे, बल्कि कारोबार, बीमा कंपनियों और पूरी रिटेल सप्लाई चेन पर आर्थिक दबाव बढ़ा सकते हैं।
सरकार के सामने अब क्या है बड़ी चुनौती?
फ्रांस सरकार के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, हिंसा और लूटपाट से प्रभावित कारोबारियों को राहत देना और दूसरी, चोरी के सामान की ऑनलाइन बिक्री रोकना।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध उत्पादों की पहचान करना आसान नहीं है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में वैध सेकंडहैंड सामान भी बेचा जाता है।
ऐसे में सरकार और कंपनियों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण होगा, ताकि चोरी के सामान की बिक्री पर रोक लगाई जा सके और सामान्य विक्रेताओं को अनावश्यक परेशानी न हो।
फ्रांस की इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा किया है कि जब दुकानों से चोरी किया गया सामान कुछ ही घंटों में ऑनलाइन बिक्री के लिए पहुंच सकता है, तो डिजिटल मार्केटप्लेस ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए कितने तैयार हैं?