खाने-पीने की चीजों पर सरकार सख्त! रेस्टोरेंट्स पर छापे के बाद अब पैकेज्ड फूड कंपनियों की Warning Label पर नजर

भारत में खाने की सुरक्षा को लेकर अचानक सख्ती बढ़ गई है। रेस्टोरेंट से लेकर पैकेज्ड फूड कंपनियों तक जांच और कार्रवाई तेज हो रही है। अब खाने के पैकेट पर नए चेतावनी लेबल का प्रस्ताव भी चर्चा में है। आखिर फूड सेफ्टी पर इतना जोर क्यों बढ़ा और इंडस्ट्री क्यों परेशान है, जानिए पूरी बात।

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In Short

  • देशभर में फूड सेफ्टी जांच तेज, हजारों फूड बिजनेस लाइसेंस रद्द होने के बाद बढ़ी सख्ती
  • FSSAI की छापेमारी से रेस्टोरेंट और फूड कंपनियों पर बढ़ा दबाव, कई बड़े नाम जांच के दायरे में
  • शुगर, नमक और फैट वाले पैकेज्ड फूड पर चेतावनी लेबल के प्रस्ताव को लेकर इंडस्ट्री और एक्टिविस्ट आमने-सामने

By Gungun Mishra:

भारत में खाने की सुरक्षा को लेकर नियमों की सख्ती बढ़ती जा रही है। एक तरफ फूड सेफ्टी रेगुलेटर रेस्टोरेंट और लोकल दुकानों पर छापेमारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पैकेज्ड फूड कंपनियों के लिए नए चेतावनी लेबल का प्रस्ताव चर्चा में है। देश में हर साल बड़ी संख्या में खाने के सैंपल जांचे जा रहे हैं और कई मामलों में गड़बड़ी सामने आ रही है।

1.4 अरब आबादी वाले देश में फूड सेफ्टी बड़ी चुनौती

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के मुताबिक, 1.4 अरब लोगों वाले देश में हर साल करीब 1.5 ट्रिलियन मील यानी भोजन की खपत होती है। इतने बड़े स्तर पर खाने की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।

लोग लंबे समय से रेस्टोरेंट, कैफे और स्ट्रीट फूड की साफ-सफाई को लेकर शिकायत करते रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई बार मिलावटी या खराब खाने से जुड़े मामले सामने आते हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2020 से हर साल 1 लाख से ज्यादा फूड सैंपल की जांच की गई है। इनमें करीब हर पांचवां सैंपल असुरक्षित, घटिया गुणवत्ता वाला या सही लेबलिंग के बिना पाया गया। पिछले तीन साल में करीब 8,000 फूड बिजनेस लाइसेंस रद्द किए गए हैं।

रेस्टोरेंट और कंपनियों पर बढ़ी कार्रवाई

FSSAI और कई राज्यों के फूड रेगुलेटर्स ने हाल के समय में जांच अभियान तेज कर दिए हैं। अधिकारियों की छापेमारी के वीडियो और तस्वीरें भी सार्वजनिक की जा रही हैं, जिससे ये कार्रवाई चर्चा में आ रही है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश में एक अस्वच्छ यूनिट पर छापेमारी के दौरान FSSAI ने 1,300 किलो मिलावटी पनीर जब्त किया। इसके अलावा कुछ शराब कंपनियों पर गलत लेबलिंग और एनर्जी ड्रिंक कंपनियों पर प्रोडक्ट प्रमोशन को लेकर भी कार्रवाई की गई है। 

महाराष्ट्र के फूड कमिश्नर तुकाराम मुंढे चर्चा में

महाराष्ट्र के फूड कमिश्नर तुकाराम मुंढे इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। उनकी टीम ने मुंबई और आसपास के इलाकों में कई बड़े रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट्स की जांच की है।

उनकी कार्रवाई में Domino's, Pizza Hut और McDonald's जैसे आउटलेट्स के अलावा बड़े क्लब और रेस्टोरेंट भी शामिल रहे हैं। हाल ही में उनकी टीम ने एक वेयरहाउस पर छापा मारा, जहां एक्सपोर्ट किए जाने वाले फूड प्रोडक्ट्स की एक्सपायरी डेट और न्यूट्रिशन जानकारी में गड़बड़ी पाई गई थी।

पैकेज्ड फूड पर आएगा चेतावनी लेबल?

भारत में पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव कई सालों से चर्चा में है। इसका मकसद ऐसे प्रोडक्ट्स की पहचान करना है जिनमें शुगर, नमक और फैट की मात्रा ज्यादा हो।

FSSAI ने अब ऐसे प्रोडक्ट्स के लिए लाल रंग के हेक्सागोन स्टैंप का प्रस्ताव रखा है, जिसमें दो या उससे ज्यादा पोषक तत्व तय सीमा से अधिक होने पर चेतावनी दी जाएगी। 

Image Credit: ITG

इंडस्ट्री और हेल्थ एक्टिविस्ट दोनों को आपत्ति

फूड इंडस्ट्री का कहना है कि प्रस्तावित नियम काफी सख्त हैं और इससे बड़ी संख्या में पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स पर चेतावनी लेबल लग सकता है। इंडस्ट्री का कहना है कि नमक, चीनी और फैट कई पारंपरिक उत्पादों का हिस्सा हैं।

वहीं हेल्थ एक्टिविस्ट का मानना है कि नियम अभी भी काफी नरम हैं। उनका कहना है कि केवल दो या उससे ज्यादा पोषक तत्वों की सीमा पार होने पर चेतावनी देना पर्याप्त नहीं है।

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट 10 सितंबर को सुनवाई करने वाला है।

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