विदेशी फंडिंग पर सरकार की बड़ी तैयारी! आज ससंद में पेश हो सकता है FCRA संशोधन बिल

इंडिया टुडे के पत्रकार जीतेन्द्र सिंह के रिपोर्ट के मुताबिक सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े सांसदों और सरकार के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, सरकार अब संसद में लंबित अहम विधेयकों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

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By BT बाज़ार डेस्क:

केंद्र सरकार विदेशी फंडिंग पाने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के लिए नियमों को और कड़ा करने की तैयारी में है। इसी दिशा में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है।

इंडिया टुडे के पत्रकार जीतेन्द्र सिंह के रिपोर्ट के मुताबिक सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े सांसदों और सरकार के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, सरकार अब संसद में लंबित अहम विधेयकों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

पारदर्शिता और निगरानी पर रहेगा जोर

संसदीय सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन का मकसद विदेशी धन प्राप्त करने वाले संगठनों की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना है। इसके तहत केंद्र सरकार को एक नामित केंद्रीय प्राधिकरण गठित करने का अधिकार मिल सकता है। यह प्राधिकरण विदेशी सहायता पाने वाले एनजीओ की गतिविधियों, वित्तीय लेनदेन और नियमों के अनुपालन की निगरानी करेगा। सरकार का कहना है कि इससे विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता आएगी और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

प्रस्तावित संशोधन में यह भी व्यवस्था है कि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द, समाप्त, सरेंडर या नवीनीकरण न होने की स्थिति में विदेशी फंड और उससे बनी संपत्तियां नामित प्राधिकरण के नियंत्रण में जा सकती हैं। जरूरत पड़ने पर सरकार ऐसी संपत्तियों को स्थानांतरित या बेच भी सकेगी और बिक्री से प्राप्त राशि भारत की समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा होगी।

विधेयक में विदेशी फंड के उपयोग की समय-सीमा तय करने, निलंबन के दौरान संपत्तियों के हस्तांतरण पर रोक, जांच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति, दंड प्रावधानों में बदलाव और नियमों के उल्लंघन पर प्रमुख पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं।

विपक्ष के विरोध के आसार

विपक्षी दलों के इस विधेयक का विरोध करने की संभावना है। उनका मानना है कि इससे गैर-सरकारी संगठनों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। हालांकि सरकार को भरोसा है कि सदन में आवश्यक समर्थन मिलने के कारण विधेयक को आगे बढ़ाने में बड़ी बाधा नहीं आएगी। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर संसद में विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।

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