नकली बैंकिंग ऐप्स से ₹64 करोड़ की ठगी, पुलिस ने आखिर कैसे खोला पूरे नेटवर्क का राज?
AI और YouTube से कोडिंग सीखने वाले 18 साल के एक लड़के पर नकली बैंकिंग और सरकारी ऐप्स बनाने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि इन ऐप्स के जरिए हजारों मोबाइल फोन को निशाना बनाया गया और करोड़ों रुपये की साइबर ठगी हुई।

In Short
- आरोपी ने 121 नकली APK ऐप्स तैयार किए थे।
- ये ऐप्स 21,672 मोबाइल फोन में इंस्टॉल किए गए थे।
- इस नेटवर्क से करीब ₹64.38 करोड़ की ठगी जुड़ी बताई गई है।
WhatsApp APK Scam: सूरत पुलिस ने 18 साल के एक लड़के को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह AI की मदद से नकली Android ऐप्स बनाता था और इन्हें साइबर ठगी करने वाले गिरोहों तक पहुंचाता था। पुलिस की जांच में इस नेटवर्क से ₹64 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी जुड़ी होने की बात सामने आई है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ऐसे APK ऐप्स तैयार करता था, जो देखने में बैंकिंग, पेमेंट और सरकारी ऐप्स जैसे लगते थे। लोग इन्हें असली ऐप समझकर अपने फोन में इंस्टॉल कर लेते थे। इसके बाद ठग उनके OTP, बैंकिंग पासवर्ड और दूसरी निजी जानकारी तक पहुंच बना लेते थे और खाते से पैसे निकाल लेते थे।
YouTube और AI टूल से सीखी कोडिंग
आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के रोहित वीरेंद्र सिंह शाक्य के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, उसने 11वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद उसने YouTube वीडियो और AI टूल की मदद से कोडिंग सीखनी शुरू की। पुलिस का आरोप है कि उसने इसी जानकारी का इस्तेमाल नकली ऐप्स और मैलवेयर बनाने में किया।
बताया गया है कि वह ये ऐप्स जामताड़ा, हरियाणा और राजस्थान में काम करने वाले साइबर ठगों को देता था। इसके बाद ये गिरोह नकली ऐप भेजकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
121 नकली APK ऐप्स बनाए
जांच में सामने आया कि आरोपी ने कुल 121 नकली APK ऐप्स तैयार किए थे। ये ऐप्स मशहूर बैंकिंग, पेमेंट और सरकारी सेवाओं वाले ऐप्स की तरह दिखते थे। फोन में इंस्टॉल होने के बाद ये ऐप्स ठगों को डिवाइस की जानकारी तक पहुंच दे सकते थे। पुलिस के मुताबिक, इन्हें 21,672 मोबाइल फोन में इंस्टॉल किया गया था।
इन ऐप्स के जरिए 54,000 से ज्यादा फर्जी बैंकिंग ट्रांजैक्शन किए गए। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े कुल फ्रॉड की रकम करीब ₹64.38 करोड़ बताई है।
सूरत के व्यापारी की शिकायत से खुला मामला
मामले की जांच तब शुरू हुई, जब सूरत के अदाजन इलाके के एक व्यापारी को WhatsApp पर “PNB One.apk” नाम की फाइल भेजी गई। व्यापारी ने इसे असली बैंकिंग ऐप समझकर फोन में इंस्टॉल कर लिया। इसके बाद उसके खाते से कथित तौर पर ₹5 लाख निकाल लिए गए। उसने 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
तकनीकी जांच के बाद पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे कानपुर के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया।
हर महीने लेता था ₹10,000 से ₹15,000
पुलिस का आरोप है कि आरोपी साइबर ठगों को हर महीने पैसे लेकर मैलवेयर इस्तेमाल करने देता था। इसके लिए वह ₹10,000 से ₹15,000 तक चार्ज करता था।
पुलिस ने उसके पास से दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। अब इन डिवाइस की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल थे और इसके संपर्क किन राज्यों तक फैले हुए थे।