Elon Musk पर भड़के फरीद जकारिया, बोले- अमेरिका से उठ रहा दुनिया का भरोसा
एलन मस्क की स्टारलिंक को लेकर भारत में छिड़े विवाद के बीच फरीद जकारिया ने अमेरिका पर बड़ा सवाल उठाया है। उनका कहना है कि दुनिया के कई देशों का अमेरिका से भरोसा उठ रहा है। आखिर मस्क की किस बात पर विवाद बढ़ा और ट्रंप की नीतियों से कौन से देश परेशान हैं? जानिए।

In Short
- एलन मस्क पर निशाना: फरीद जकारिया बोले- भारतीयों को ज्ञान देने के लिए मस्क ने गलत समय चुना, स्टारलिंक को लेकर बढ़ा विवाद।
- अमेरिका पर घटता भरोसा: PEW सर्वे के मुताबिक, 35 में से 26 देशों में लोगों ने अमेरिका के मुकाबले चीन को ज्यादा पसंद किया।
- ट्रंप की नीतियों पर सवाल: जकारिया ने चेताया कि अमेरिकी सुरक्षा पर भरोसा घटने से जापान, जर्मनी और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपने परमाणु हथियार बनाने पर विचार कर सकते हैं।
Elon Musk Starlink India: एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू करना चाहती है, लेकिन मंजूरी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी बीच मशहूर पत्रकार और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट फरीद जकारिया ने मस्क और अमेरिका की नीतियों पर बड़े सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दुनिया के कई देशों का अमेरिका पर भरोसा कमजोर हो रहा है। आखिर भारत से लेकर यूरोप तक अमेरिकी नीतियों पर सवाल क्यों उठ रहे हैं, आइए समझते हैं।
एलन मस्क ने भारतीयों को लेकर क्या कहा?
CNN के शो GPS में फरीद जकारिया ने कहा कि एलन मस्क ने भारतीयों को ज्ञान देने के लिए गलत समय चुना। दरअसल, स्टारलिंक को भारत में लॉन्चिंग की मंजूरी नहीं मिलने से नाराज मस्क ने सरकार पर मुकेश अंबानी की कंपनी जियो को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया था।
मस्क ने खुद को आम भारतीयों का समर्थक दिखाने की कोशिश की, लेकिन मामला उल्टा पड़ गया। भारत सरकार ने उनके आरोपों को बेबुनियाद बताया। सोशल मीडिया और मीडिया में भी स्टारलिंक को लेकर नाराजगी देखने को मिली।
भारत को अमेरिका पर भरोसा क्यों नहीं?
जकारिया के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ पिछले 25 साल में बने रिश्तों को कमजोर किया है। उन्होंने पाकिस्तान और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बढ़ती अमेरिकी नजदीकियों पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका ने स्टारलिंक के मिलिट्री वर्जन के इस्तेमाल पर पाबंदियां लगाईं, जिससे रूस के खिलाफ यूक्रेन की कार्रवाई प्रभावित हुई। ऐसे में सवाल है कि भारत ट्रंप और मस्क के नियंत्रण वाले अमेरिकी सैटेलाइट सिस्टम पर निर्भर क्यों होना चाहेगा?
35 में से 26 देशों में चीन को ज्यादा पसंद किया गया
फरीद जकारिया ने PEW के सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि 35 में से 26 देशों में लोगों ने अमेरिका के मुकाबले चीन को ज्यादा अनुकूल नजरिए से देखा।
उन्होंने बताया कि कनाडा चीन से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। वहीं सऊदी अरब, UAE और कतर जैसे अमेरिकी साझेदार भी सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। जकारिया के मुताबिक, अमेरिका की शुरू की गई जंग में ईरानी हमलों का सामना करने वाले सहयोगियों को ट्रंप से अपेक्षित मदद नहीं मिली।
दक्षिण कोरिया और जापान में भी अमेरिका को सकारात्मक नजरिए से देखने वालों की हिस्सेदारी घटी है।
क्या अमेरिकी सहयोगी अपने परमाणु हथियार बनाएंगे?
जकारिया ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने जापान और जर्मनी जैसे देशों को सुरक्षा का भरोसा दिया था। इसी भरोसे के कारण जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया को अपने परमाणु हथियार बनाने की जरूरत नहीं पड़ी।
लेकिन अब ट्रंप NATO देशों की सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठा रहे हैं। जकारिया के मुताबिक, सहयोगियों से रक्षा खर्च बढ़ाने को कहना अलग बात है और सुरक्षा का वादा कमजोर करना अलग।
उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप सहयोगियों से अपना खर्च उठवाना चाहते हैं, लेकिन उनकी नीतियां इन देशों को अपने परमाणु हथियार बनाने की तरफ धकेल सकती हैं।