बारिश को लेकर बढ़ी चिंता! मजबूत हो रहा El Niño, जानिए भारत के मौसम पर क्या होगा असर
मॉनसून खत्म होने के बाद क्या देश में बारिश का इंतजार लंबा होने वाला है? मजबूत होता El Niño मौसम का मिजाज बदल सकता है। वहीं IOD को लेकर भी IMD का अनुमान सामने आया है। जानिए आने वाले महीनों में बारिश कैसी रह सकती है और किन राज्यों के लिए यह समय ज्यादा अहम होगा।

In Short
- 2026 के आखिर तक El Niño के और मजबूत होने की संभावना है।
- नॉर्थईस्ट मॉनसून के दौरान IOD के न्यूट्रल रहने का अनुमान है।
- भारत में 2026 का साउथवेस्ट मॉनसून सामान्य से करीब 13 फीसदी कम रहा।
भारत में आने वाला पोस्ट-मॉनसून सीजन काफी हद तक सूखा रह सकता है। इसकी बड़ी वजह मजबूत होता El Niño है, जिसका असर दुनियाभर के मौसम पर देखने को मिल रहा है। वहीं नॉर्थईस्ट मॉनसून के दौरान इंडियन ओशन डाइपोल यानी IOD के न्यूट्रल रहने का अनुमान है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के मुताबिक इस समय भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत El Niño की स्थिति बनी हुई है। पूर्व-मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा है।
2026 के आखिर तक और मजबूत हो सकता है El Niño
IMD के Monsoon Mission Coupled Forecast System यानी MMCFS और दूसरे ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स के मुताबिक El Niño के 2026 के आखिर तक और मजबूत होने की संभावना है। इसका असर आने वाले महीनों में भारत के मौसम पर भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि El Niño का असर पूरे भारत में एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। इसका मतलब यह भी नहीं है कि देश के हर हिस्से में सामान्य से कम बारिश ही होगी। कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से ज्यादा बारिश भी हो सकती है।
न्यूट्रल IOD का क्या मतलब है?
इंडियन ओशन डाइपोल यानी IOD हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से के समुद्री तापमान में अंतर से जुड़ा एक क्लाइमेट पैटर्न है। पॉजिटिव IOD की स्थिति में अफ्रीका के पास समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म और इंडोनेशिया के पास ठंडा रहता है। ऐसी स्थिति भारतीय उपमहाद्वीप के कुछ हिस्सों में बारिश को सपोर्ट कर सकती है।
लेकिन IMD का अनुमान है कि नॉर्थईस्ट मॉनसून के दौरान IOD न्यूट्रल रहेगा। न्यूट्रल स्थिति में हिंद महासागर के दोनों हिस्सों के तापमान में ऐसा मजबूत अंतर नहीं रहता, जो बारिश के लिए अतिरिक्त सपोर्ट दे सके।
दक्षिण भारत के लिए अहम हैं अगले तीन महीने
अक्टूबर से दिसंबर का समय दक्षिण भारत के लिए काफी अहम है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्से नॉर्थईस्ट मॉनसून की बारिश पर काफी निर्भर रहते हैं।
El Niño प्रशांत महासागर से काफी दूर मौजूद इलाकों के मौसम और बारिश के पैटर्न को भी प्रभावित कर सकता है। वहीं न्यूट्रल IOD से El Niño के असर को कम करने के लिए कोई खास सपोर्ट मिलने की उम्मीद नहीं है।
कमजोर रहा 2026 का साउथवेस्ट मॉनसून
यह अनुमान ऐसे समय आया है, जब भारत में 2026 का साउथवेस्ट मॉनसून सामान्य से करीब 13 फीसदी कम बारिश के साथ खत्म हुआ। इस दौरान देश में लॉन्ग पीरियड एवरेज की करीब 87 फीसदी बारिश दर्ज की गई।
अब मजबूत होते El Niño और पॉजिटिव IOD नहीं बनने के अनुमान के बीच आने वाले महीने खास तौर पर दक्षिणी राज्यों के लिए अहम रहेंगे। इसके साथ ही कम साउथवेस्ट मॉनसून से प्रभावित इलाकों में खेती और जल संसाधनों के लिहाज से भी यह समय महत्वपूर्ण होगा।