अल-नीनो से बिगड़ सकता है मौसम, WMO ने भारत में गर्मी और सूखे को लेकर किया अलर्ट
जुलाई से सितंबर के बीच अल-नीनो मजबूत होने की आशंका जताई गई है। इससे मौसम का मिजाज बदल सकता है और कई देशों में सूखा, बारिश और गर्मी का असर बढ़ सकता है। भारत के लिए यह चेतावनी क्यों अहम है, जानिए पूरी खबर में।

In Short
- WMO के मुताबिक अल-नीनो तेजी से मजबूत हो सकता है, जिससे गर्मी और बेतरतीब मौसम बढ़ने की आशंका है।
- भारत में मानसून और खेती पर असर हो सकता है।
- कई देशों में कम बारिश, सूखा, भारी बारिश, हीटवेव और समुद्री हीटवेव जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
El Nino 2026: दुनिया के मौसम को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। WMO ने चेतावनी दी है कि इस साल जुलाई से सितंबर के बीच अल-नीनो तेजी से मजबूत हो सकता है। इसका असर कई देशों में मौसम, खेती, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है। सूखा, भारी बारिश, लू और समुद्री हीटवेव जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
क्या होता है अल-नीनो?
अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। आमतौर पर यह हर दो से सात साल में होता है।
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सामान्य मौसम में हवाएं पूर्वी प्रशांत से पश्चिम की ओर चलती हैं और गर्म पानी को इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ ले जाती हैं। लेकिन अल-नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उल्टी दिशा में चलने लगती हैं। इससे समुद्र की सतह का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ सकता है।
भारत पर क्या होगा असर
WMO की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अल-नीनो मजबूत होता है, तो कई जगह मौसम और बिगड़ सकता है। प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है। वहीं भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, उत्तरी दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कुछ इलाकों में बारिश कम हो सकती है और सूखे जैसे हालात बन सकते हैं।
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भारत में अल-नीनो का सीधा असर मानसून पर पड़ सकता है। कमजोर मानसून से धान, मक्का और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलें प्रभावित हो सकती हैं। सूखे से जलाशयों में पानी कम हो सकता है, सिंचाई मुश्किल हो सकती है और बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
सेहत और खेती पर भी असर
लू बढ़ने से हीट स्ट्रोक, पानी की कमी और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और मजदूरों पर इसका असर ज्यादा हो सकता है। शहरों में अर्बन हीट आइलैंड की वजह से गर्मी और खतरनाक हो सकती है।
कृषि पर भी बड़ा खतरा है। सूखे से फसलें और चरागाह प्रभावित हो सकते हैं। अगर अल-नीनो ज्यादा मजबूत हुआ तो अनाज उत्पादन घट सकता है और कीमतें बढ़ सकती हैं।
सरकारों और किसानों को अलर्ट रहने की सलाह
WMO ने सरकारों, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र को तैयार रहने की सलाह दी है। मौसमी पूर्वानुमान, शुरुआती चेतावनी सिस्टम, जल संरक्षण, फसल बीमा और सूखा झेलने वाली फसलों पर ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है। अल-नीनो प्राकृतिक घटना है, लेकिन जलवायु परिवर्तन इसके असर को और बढ़ा सकता है।
सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं असर
अल-नीनो का असर सिर्फ समुद्र तक नहीं रहता। यह दुनिया भर में हवा के रुख, बारिश के पैटर्न और तापमान को बदल सकता है। गर्म पानी वातावरण में ज्यादा गर्मी छोड़ता है, जिससे वैश्विक तापमान और बढ़ सकता है। जलवायु परिवर्तन के साथ इसका असर और गंभीर हो सकता है।