El Nino Impact India: अल-नीनो का मॉनसून पर बड़ा असर, अगले 3 महीने इन राज्यों में कम बारिश का खतरा

अल-नीनो का असर भारतीय मॉनसून पर बढ़ता दिख रहा है। ECMWF की नई रिपोर्ट ने अगले तीन महीनों के लिए कम बारिश का अनुमान जताया है। पढ़ें पूरी खबर।

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In Short

  • ECMWF रिपोर्ट में अगस्त-अक्टूबर के दौरान कई राज्यों में कम बारिश की आशंका जताई गई है।
  • मजबूत अल-नीनो और कमजोर IOD से मॉनसून पर असर, खेती और जल संसाधनों पर बढ़ सकता है खतरा।
  • कम बारिश से फसल, पानी की उपलब्धता और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर।

By Gaurav Kumar:

El Nino Impact India: भारत के मॉनसून पर एक बार फिर अल-नीनो का प्रभाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ECMWF) की नई C3S मल्टी-सिस्टम फोरकास्ट रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।

रिपोर्ट में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में कम बारिश का खतरा बताया गया है।

ECMWF रिपोर्ट में क्या कहा गया?

ECMWF की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त-सितंबर-अक्टूबर के दौरान भारत के मध्य और पश्चिमी हिस्सों में बारिश सबसे कम रहने की संभावना 40-60% तक है। जून के मॉडल रन की तुलना में जुलाई के मॉडल रन में बारिश के आउटलुक को और कमजोर किया गया है।

इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रों पर पड़ सकता है जहां खेती और जल संसाधन मॉनसून पर काफी निर्भर हैं। कम बारिश किसानों, पानी की उपलब्धता और अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है।

मजबूत अल-नीनो से बढ़ा खतरा

विश्व मौसम संगठन (WMO) और NOAA के अनुसार, जब भी भारत में मजबूत अल-नीनो की स्थिति बनी है, तब औसतन 10-20% तक कम बारिश दर्ज की गई है। साल 2026 में अल-नीनो पहले के अनुमान से ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा है और इसके अगस्त से अक्टूबर तक असर बनाए रखने की संभावना है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) भी कमजोर है और इसके विकसित होने में देरी हो रही है। आमतौर पर IOD अल-नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद करता है, लेकिन इस बार इसकी कमजोरी से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

किन क्षेत्रों पर ज्यादा असर पड़ सकता है?

ECMWF के अनुमान के अनुसार, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में सूखे का खतरा ज्यादा रह सकता है। मध्य और पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में बारिश की कमी की संभावना जताई गई है।

इसका सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। धान, मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। वहीं राजस्थान और गुजरात में पानी की कमी का असर रबी फसलों पर भी पड़ सकता है।

जल संसाधन और अर्थव्यवस्था पर असर

कम बारिश की स्थिति में बांधों में पानी का स्तर प्रभावित हो सकता है। इससे पीने के पानी और सिंचाई से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

कृषि पर निर्भर अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि खराब मॉनसून की स्थिति में GDP वृद्धि दर 0.5-1% तक प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा लंबे समय तक सूखे की स्थिति से गर्मी की लहरें बढ़ सकती हैं और पानी से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

मौसम एजेंसियां कर रहीं निगरानी

ECMWF के अलावा IMD, NOAA और अन्य मौसम मॉडल भी अल-नीनो और मॉनसून की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, मौसम पूर्वानुमान में 2-3 महीने आगे की सटीकता सीमित होती है। अगर आने वाले समय में IOD मजबूत होता है तो स्थिति में कुछ सुधार भी हो सकता है।

फिलहाल ECMWF की रिपोर्ट अगले तीन महीनों के लिए चेतावनी दे रही है। मजबूत अल-नीनो और कमजोर IOD की वजह से भारत में सामान्य से कम बारिश की आशंका बनी हुई है। समय रहते तैयारी करके इसके असर को कम किया जा सकता है।

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