ED की बड़ी कार्रवाई: आजम खान के जौहर ट्रस्ट मामले में 10 ठिकानों पर छापेमारी, सरकारी फंड के कथित डायवर्जन की जांच

ED ने आजम खान के जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 10 ठिकानों पर सर्च की और सरकारी ठेकों के फंड के कथित डायवर्जन से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत जुटाने की कोशिश की।

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In Short

  • ED ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 ठिकानों पर की सर्च और जब्ती की कार्रवाई
  • जांच में सरकारी ठेकों के पैसों के कथित इस्तेमाल और ट्रस्ट तक फंड पहुंचने का एंगल सामने आया
  • 2019 से चल रही जांच में अब ठेकेदारों, डोनेशन और निर्माण खर्च की वित्तीय जांच तेज हुई

By Gaurav Kumar:

प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बुधवार को आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी मामले में बड़ी कार्रवाई की। ED की लखनऊ जोनल ऑफिस टीम ने रामपुर सहारनपुर और दिल्ली में 10 ठिकानों पर सर्च और जब्ती की कार्रवाई की। एजेंसी इस मामले में सरकारी ठेकों से जुड़े फंड के कथित डायवर्जन और उसके इस्तेमाल की जांच कर रही है। इसी जांच के तहत ED अब पैसों के पूरे लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।

PMLA के तहत हुई कार्रवाई

ED ने यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act यानी PMLA 2002 की Section 17 के तहत की है। एजेंसी का कहना है कि जांच में कुछ ठेकेदारों और जौहर ट्रस्ट के बीच वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं। आरोप है कि सरकारी ठेके पाने वाले कुछ ठेकेदारों ने बाद में बड़ी रकम डोनेशन और निर्माण कार्यों के भुगतान के रूप में ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़ी गतिविधियों में लगाई।

ED अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी कामों के लिए जारी किए गए फंड का इस्तेमाल किसी दूसरे उद्देश्य के लिए तो नहीं किया गया। इसके लिए टीम सरकारी ठेकों के रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन, निर्माण खर्च और डिजिटल दस्तावेजों की जांच कर रही है।

2019 से चल रही है ED की जांच

जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में ED की जांच साल 2019 से चल रही है। उस समय एजेंसी ने समाजवादी पार्टी नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

अगस्त 2019 में ED ने उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज 26 FIR का संज्ञान लिया था। इनमें रामपुर में जमीन कब्जाने से जुड़े आरोप शामिल थे। कई मामलों में आरोप लगाया गया था कि जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन को जबरन लिया गया या उस पर कब्जा किया गया।

ट्रस्ट की फंडिंग और डोनेशन की भी हुई जांच

इसके बाद ED ने जौहर ट्रस्ट की आर्थिक गतिविधियों और फंड के इस्तेमाल की जांच शुरू की। सितंबर 2019 में एजेंसी ने ट्रस्ट को मिले डोनेशन और विदेश से आए कथित फंड की भी जांच की थी।

साल 2020 में ED अधिकारियों ने जमीन विवाद से जुड़े शिकायतकर्ताओं और किसानों के बयान दर्ज किए थे। साथ ही यूनिवर्सिटी परिसर और संबंधित जमीनों का निरीक्षण भी किया गया था।2021 में एजेंसी ने करीब दो दर्जन लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ की थी। इनमें रामपुर के कई लोग शामिल थे, जिन्होंने जौहर ट्रस्ट को डोनेशन दिया था।

निर्माण कार्य और पैसों के रास्ते की जांच जारी

ED ने 2022 में यूनिवर्सिटी से जुड़ी जमीनों का फिजिकल वेरिफिकेशन किया था। एजेंसी ने ट्रस्ट के डोनर्स, ट्रस्टी और यूनिवर्सिटी की स्थापना से जुड़े पैसों के लेनदेन की भी जांच की।

जांच में ED को कुछ ऐसे मामले मिले थे, जहां कुछ लोगों ने ट्रस्ट को पैसा दिया और बाद में उन्हें निर्माण या सप्लाई से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट मिले। हालांकि एजेंसी ने इस मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है।

अब सरकारी फंड के इस्तेमाल पर फोकस

मौजूदा जांच में ED का फोकस सरकारी ठेकों से जुड़े पैसों के कथित इस्तेमाल पर है। एजेंसी को शक है कि कुछ ठेकेदारों ने सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से मिले पैसों का एक हिस्सा ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी तक पहुंचाया।

अब ED इन पैसों के पूरे रास्ते को समझने की कोशिश कर रही है, जिसमें ठेकेदारों को मिले भुगतान, ट्रस्ट को मिले डोनेशन, निर्माण खर्च और बैंक रिकॉर्ड शामिल हैं।

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