ट्रंप के ईरान वाले प्रस्ताव पर साउथ कोरिया ने कहा ‘नो थैंक्स’, अमेरिका ने मिलिट्री ड्रिल्स में कर दी कटौती
ईरान के खिलाफ अमेरिकी मुहिम में शामिल होने से साउथ कोरिया ने इनकार कर दिया। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-साउथ कोरिया की सालाना उल्ची फ्रीडम शील्ड मिलिट्री एक्सरसाइज में अमेरिकी भागीदारी घटाने का निर्देश दिया। ट्रंप ने इसके पीछे नॉर्थ कोरिया और किम जोंग उन से अपने रिश्तों का भी जिक्र किया।

In Short
- ईरान के खिलाफ अमेरिकी मुहिम में शामिल होने से साउथ कोरिया ने किया इनकार
- ट्रंप ने उल्ची फ्रीडम शील्ड एक्सरसाइज में अमेरिकी भागीदारी घटाने का दिया निर्देश
- ट्रंप ने किम जोंग उन से अपने अच्छे रिश्तों और नॉर्थ कोरिया का भी किया जिक्र
अमेरिका और साउथ कोरिया की दशकों पुरानी सिक्योरिटी पार्टनरशिप में एक नया तनाव सामने आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ कोरिया के ईरान के खिलाफ अमेरिकी मुहिम में शामिल होने से इनकार को सीधे दोनों देशों की जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज से जोड़ दिया है। मामला सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है, इसमें नॉर्थ कोरिया और किम जोंग उन को लेकर ट्रंप की सोच भी बड़ी वजह बनकर सामने आई है।
ईरान के खिलाफ साथ मांगा, साउथ कोरिया ने कहा- नो थैंक्स
ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने साउथ कोरिया के राष्ट्रपति से पूछा था कि क्या सियोल, अमेरिका के साथ मिलकर “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के डिन्यूक्लियराइजेशन” में शामिल होना चाहता है। ट्रंप के मुताबिक साउथ कोरिया की तरफ से जवाब साफ था- “नो थैंक्स!”
इसके बाद ट्रंप ने इस इनकार को अपनी अगली कार्रवाई से सीधे जोड़ दिया। उन्होंने डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ को अमेरिका और साउथ कोरिया की सालाना जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज उल्ची फ्रीडम शील्ड में अमेरिकी भागीदारी को काफी कम करने का निर्देश दिया।
17 से 27 अगस्त तक होनी है उल्ची फ्रीडम शील्ड एक्सरसाइज
उल्ची फ्रीडम शील्ड मिलिट्री एक्सरसाइज 17 अगस्त से 27 अगस्त तक तय है। ट्रंप ने माना कि अब इसे पूरी तरह कैंसिल करने के लिए काफी देर हो चुकी है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी भागीदारी को पहले के मुकाबले काफी कम किया जाएगा।
इस तरह साउथ कोरिया का ईरान पर अमेरिका का साथ नहीं देना अब दोनों देशों के मिलिट्री कोऑपरेशन पर भी असर डालता दिख रहा है।
नॉर्थ कोरिया को लेकर भी ट्रंप ने बताई अपनी नाराजगी
ट्रंप की नाराजगी सिर्फ ईरान वाले मुद्दे तक सीमित नहीं है। उन्होंने नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने “बहुत अच्छे रिश्ते” का भी जिक्र किया। ट्रंप का कहना है कि इस तरह की बड़ी मिलिट्री एक्सरसाइज महंगी होती हैं और प्योंगयांग को “अनुचित और शत्रुतापूर्ण” मैसेज देती हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान नॉर्थ कोरिया “अनथ्रेटनिंग और रिस्पेक्टफुल” रहा है। उनके मुताबिक ऐसे में जॉइंट ड्रिल्स को जरूरत से ज्यादा उकसावे वाली कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है।
ईरान पर इंटरनेशनल सपोर्ट जुटाने में लगा अमेरिका
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी मिलिट्री कैंपेन जारी रखे हुए है और तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर दबाव बढ़ाने के लिए इंटरनेशनल सपोर्ट जुटाने की कोशिश कर रहा है।
साउथ कोरिया का इस मुहिम से दूरी बनाना और उसके बाद ट्रंप का जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज में कटौती का फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि अमेरिका-साउथ कोरिया अलायंस दशकों से इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा रहा है। अब देखना होगा कि यह नाराजगी सिर्फ मौजूदा ड्रिल्स तक रहती है या दोनों देशों के सिक्योरिटी रिश्तों पर आगे भी असर डालती है।