दिल्ली में पहली बार बिजली कंपनियों का CAG ऑडिट! ₹38,000 करोड़ के बकाये की होगी जांच

दिल्ली सरकार ने पहली बार राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों BRPL, BYPL और TPDDL के CAG ऑडिट को मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि इस ऑडिट से 38,000 करोड़ रुपये के बकाये, रेगुलेटरी एसेट्स और कंपनियों की वास्तविक वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर सामने आएगी।

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • दिल्ली सरकार ने पहली बार BRPL, BYPL और TPDDL समेत तीनों बिजली वितरण कंपनियों के CAG ऑडिट को मंजूरी दी है।
  • ऑडिट में कंपनियों के करीब 38,000 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स (बकाया) और उनकी वित्तीय स्थिति की विस्तार से जांच की जाएगी।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश और कैबिनेट की सिफारिश के बाद शुरू होने वाले इस ऑडिट को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

By Rohit Chaudhary:

दिल्ली में पहली बार बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) का कैग (CAG) ऑडिट कराया जाएगा। रेखा गुप्ता सरकार ने राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों- बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के CAG ऑडिट को मंजूरी दे दी है।

सरकार का दावा है कि इस ऑडिट से बिजली कंपनियों के करीब 38,000 करोड़ रुपये के बकाये और उनकी वित्तीय स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

सरकार के अनुसार, यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है। 29 जून को दिल्ली मंत्रिमंडल ने CAG ऑडिट की सिफारिश की थी, जिसके बाद उपराज्यपाल ने इसे मंजूरी दे दी। ऑडिट के दायरे में तीनों डिस्कॉम्स की वित्तीय व्यवस्था के साथ-साथ रेगुलेटरी एसेट्स (Regulatory Assets) की भी जांच की जाएगी।

दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने कहा कि जब बिजली कंपनियां खुद को लगातार मुनाफे में बता रही हैं, तो फिर 38,000 करोड़ रुपये के बकाये का सवाल कैसे खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि CAG ऑडिट से यह स्पष्ट होगा कि यह बकाया किस आधार पर दर्ज किया गया और इसकी वास्तविक स्थिति क्या है।

गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर में बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट की मांग की थी। हालांकि, मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी सरकार यह ऑडिट नहीं करा सकी।

दिल्ली सरकार ने ऑडिट तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। माना जा रहा है कि ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति, बकाये के दावों और बिजली दरों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Read more!
Advertisement