दिल्ली एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ेगी, 2032 तक हर साल 12.5 करोड़ यात्रियों को संभालने की तैयारी
दिल्ली एयरपोर्ट आने वाले वर्षों में और बड़ा होने जा रहा है। बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई गई है। नए पियर से लेकर टर्मिनल विस्तार तक कई प्रस्ताव तैयार हैं। जानिए 2032 तक दिल्ली एयरपोर्ट में क्या-क्या बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

In Short
- दिल्ली एयरपोर्ट की सालाना पैसेंजर क्षमता 10.6 करोड़ से बढ़ाकर 12.5 करोड़ करने की तैयारी
- अप्रैल 2030 तक T3 पर नया Pier E बनाने का प्रस्ताव, जिसकी क्षमता 1 करोड़ यात्रियों की होगी
- 2032 तक एयरपोर्ट विस्तार योजना पूरी होने के बाद बढ़ेगी यात्रियों को संभालने की क्षमता
नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। एयरपोर्ट की सालाना पैसेंजर हैंडलिंग क्षमता को मौजूदा 10.6 करोड़ से बढ़ाकर 12.5 करोड़ करने का प्लान बनाया गया है। इसके लिए 10 साल के मास्टर प्लान के तहत कई विस्तार योजनाओं पर काम किया जाएगा, जिसमें नया पियर बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है।
2030 तक बढ़ेगी क्षमता
दिल्ली एयरपोर्ट का संचालन करने वाली दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड यानी DIAL की योजना के मुताबिक, पहले चरण में अप्रैल 2030 तक एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाकर 11.6 करोड़ यात्रियों तक की जाएगी। इसके बाद साल 2032 तक इसे बढ़ाकर 12.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
टर्मिनल 3 पर बनेगा नया पियर E
मास्टर प्लान के तहत टर्मिनल 3 यानी T3 पर पियर E बनाने का प्रस्ताव है। इसे अप्रैल 2030 तक तैयार करने की योजना है। इस नए पियर की क्षमता करीब 1 करोड़ यात्रियों को संभालने की होगी। एयरपोर्ट पर पियर एक लंबी और संकरी संरचना होती है, जो मुख्य टर्मिनल से जुड़ी होती है और यात्रियों को एयरोब्रिज के जरिए विमान तक पहुंचने में मदद करती है।
अभी तीन टर्मिनल से हो रहा संचालन
दिल्ली एयरपोर्ट देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट है और यहां तीन टर्मिनल हैं। इनमें T1, T2 और T3 शामिल हैं। फिलहाल एयरपोर्ट की कुल सालाना पैसेंजर हैंडलिंग क्षमता 10.6 करोड़ है। इसमें T1 की क्षमता 4.2 करोड़, T2 की 1.4 करोड़ और T3 की 5 करोड़ यात्रियों की है।
T3 में घरेलू उड़ानों के लिए 1.9 करोड़ और इंटरनेशनल उड़ानों के लिए 3.1 करोड़ यात्रियों की क्षमता है। अभी T3 में चार पियर हैं, जिनमें पियर A और B इंटरनेशनल ऑपरेशन के लिए हैं, जबकि पियर C और D घरेलू उड़ानों के लिए हैं। हालांकि अब पियर C को भी इंटरनेशनल ऑपरेशन के लिए बदला गया है।
APM सिस्टम पर अभी फैसला नहीं
मास्टर प्लान में ऑटोमेटेड पैसेंजर मूवर यानी APM सिस्टम के लिए 7.5 किलोमीटर का रास्ता सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है। हालांकि अभी इसे बनाने पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। पहले इसकी योजना T1 को बाकी दोनों टर्मिनल से जोड़ने के लिए बनाई गई थी, ताकि यात्रियों को टर्मिनल के बीच आने-जाने में आसानी हो सके।
T4 को लेकर अभी कोई फैसला नहीं
एयरपोर्ट पर टर्मिनल 4 बनाने को लेकर भी अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। सूत्र के मुताबिक, अगर आने वाले समय में यात्रियों की संख्या बढ़ती है और ज्यादा क्षमता की जरूरत पड़ती है, तो T2 को T4 में बदलने पर विचार किया जा सकता है।
जुलाई में 60 लाख यात्रियों ने किया सफर
दिल्ली एयरपोर्ट का संचालन GMR ग्रुप के नेतृत्व वाले DIAL कंसोर्टियम की ओर से किया जाता है। जुलाई में एयरपोर्ट से करीब 60 लाख यात्रियों ने सफर किया, जो पिछले साल की तुलना में 3.7 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई तक कुल पैसेंजर ट्रैफिक 2.64 करोड़ दर्ज किया गया है।