बारिश के बाद भी क्यों साफ नहीं हुई दिल्ली की हवा? 92 दिनों के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

दिल्ली में इस बार मॉनसून जमकर बरसा, लेकिन बारिश भी राजधानी की हवा को लंबे समय तक साफ नहीं रख सकी। CSE की नई स्टडी में एयर क्वालिटी को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। आखिर 92 दिनों के मॉनसून में दिल्लीवालों को कितने दिन साफ हवा मिली? जानिए पूरी रिपोर्ट।

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In Short

  • दिल्ली में मॉनसून के 92 दिनों में सिर्फ एक दिन एयर क्वालिटी 'गुड' रही।
  • बारिश के दौरान PM2.5 घटा, लेकिन 48 घंटे में इसका स्तर 37.9 फीसदी फिर बढ़ गया।
  • मॉनसून के दौरान दिल्ली में 53 दिन 'मॉडरेट' और 35 दिन 'सैटिस्फैक्टरी' एयर क्वालिटी रही।

By Sonam:

दिल्ली में इस साल मॉनसून के दौरान खूब बारिश हुई, लेकिन इसका असर हवा पर ज्यादा समय तक नहीं टिक सका। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट यानी CSE की नई स्टडी के मुताबिक, 1 जून से 31 अगस्त 2026 के बीच 92 दिनों में दिल्ली की एयर क्वालिटी सिर्फ एक दिन 'गुड' रही। इस दौरान सफदरजंग और पालम में दर्ज बारिश के आधार पर कुल 576.9 mm बारिश हुई।

बारिश के बाद फिर बढ़ा PM2.5

CSE की स्टडी के मुताबिक, बारिश के दौरान हवा में PM2.5 का स्तर कम हुआ, लेकिन बारिश रुकते ही यह दोबारा बढ़ने लगा। बारिश के दौरान PM2.5 का औसत स्तर 32.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था।

बारिश रुकने के 24 घंटे बाद यह बढ़कर 36.2 और 48 घंटे बाद 45.1 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पहुंच गया। यानी सिर्फ 48 घंटे में PM2.5 का स्तर 37.9 फीसदी बढ़ गया।

मॉनसून में प्रदूषण 33.2% हुआ कम

CSE ने अप्रैल-मई और जून-अगस्त 2026 की एयर क्वालिटी की तुलना भी की। अप्रैल-मई में दिल्ली का औसत PM2.5 स्तर 60.2 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। मॉनसून के दौरान यह घटकर 40.2 रह गया। यानी करीब 33.2 फीसदी की कमी आई।

बारिश की छह अलग-अलग घटनाओं की स्टडी में सामने आया कि बारिश से पहले PM2.5 का औसत स्तर 40.6 था, जो बारिश के दौरान घटकर 32.7 रह गया। हालांकि, बारिश बंद होने के 48 घंटे बाद यह 45.1 तक पहुंच गया।

92 दिनों में सिर्फ एक दिन 'गुड' हवा

मॉनसून के 92 दिनों में सिर्फ 9 जुलाई को दिल्ली की एयर क्वालिटी 'गुड' रही। उस दिन सफदरजंग और पालम में औसत बारिश 67.75 mm दर्ज की गई थी।

वहीं 8 अगस्त को मॉनसून की सबसे ज्यादा एक दिन की बारिश 101.05 mm हुई, लेकिन उस दिन भी एयर क्वालिटी सिर्फ 'सैटिस्फैक्टरी' रही।

पूरे मॉनसून में 53 दिन एयर क्वालिटी 'मॉडरेट', 35 दिन 'सैटिस्फैक्टरी' और तीन दिन 'पुअर' रही।

Image Credit : Aaj Tak

बारिश में भी बने रहे गैस वाले प्रदूषक

बारिश PM2.5 और PM10 जैसे छोटे कणों को नीचे बैठाने में मदद करती है, लेकिन कुछ गैस वाले प्रदूषक बने रहते हैं। मॉनसून में ग्राउंड लेवल ओजोन 20 दिनों में प्रमुख प्रदूषक रहा। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड 10 दिनों और कार्बन मोनोऑक्साइड 7 फीसदी दिनों में प्रमुख प्रदूषक रहा।

सर्दियों से पहले बढ़ सकती है परेशानी

CSE के मुताबिक, मौसम से मिलने वाली प्राकृतिक राहत कम होने के बाद सर्दियों में प्रदूषण बढ़ सकता है। संस्था का कहना है कि दिल्ली-NCR में केवल सर्दियों के दौरान इमरजेंसी कदम उठाना काफी नहीं होगा। गाड़ियों, इंडस्ट्री, कंस्ट्रक्शन, कचरा जलाने और डीजल जनरेटर से होने वाले प्रदूषण को पूरे साल कम करने की जरूरत है।

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