मानसून की सुस्त रफ्तार ने बढ़ाई किसानों की टेंशन! खरीफ फसलों पर मंडराया संकट
मानसून की सुस्त रफ्तार ने महाराष्ट्र के ठाणे में खरीफ फसलों पर संकट बढ़ा दिया है। इस साल सामान्य से कम बारिश के अनुमान के बीच जिला प्रशासन ने किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई को लेकर एडवाइजरी जारी की है।

In Short
- मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण ठाणे प्रशासन ने खरीफ बुवाई रोकने की एडवाइजरी जारी की है।
- IMD ने इस साल सामान्य से कम बारिश का अलर्ट दिया है, जिससे फसलों पर संकट है।
- प्रशासन ने इमरजेंसी क्रॉप प्लान बनाकर किसानों को जल्दी पकने वाली फसलें बोने को कहा है।
देश में मॉनसून का आना अमूमन किसानों के चेहरों पर मुस्कान लाता है, लेकिन इस बार हालात इसके ठीक उलट हैं। जून का आधा महीना बीत चुका है, फिर भी आसमान साफ है और बादलों का कहीं पता नहीं है। इस सूखे मौसम ने बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों को परेशान कर दिया है, क्योंकि मौसम विभाग (IMD) ने इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। मॉनसून की इस सुस्त रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई का काम पिछड़ता नजर आ रहा है।
ठाणे जिला प्रशासन की बुवाई टालने की सलाह
मॉनसून की इस बेरुखी और पानी की कमी को देखते हुए महाराष्ट्र के ठाणे जिला प्रशासन ने किसानों के लिए एक जरूरी गाइडलाइन जारी की है। प्रशासन ने किसानों को साफ सलाह दी है कि वे खरीफ फसलों की बुवाई में जल्दबाजी न करें और इसे कुछ समय के लिए टाल दें।
कृषि विभाग का कहना है कि जब तक कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश न हो जाए, तब तक खेतों में बीज न डालें, ताकि पौधों की ग्रोथ सही तरीके से हो सके। इसके साथ ही, प्रशासन ने सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए एक इमरजेंसी (आकस्मिक) क्रॉप प्लान भी तैयार कर लिया है।
इस संकट में किसानों के लिए जरूरी उपाय
किसानों को संभावित भारी नुकसान से बचाने के लिए प्रशासन ने कुछ खास तरीके सुझाए हैं, जिसके तहत उन्हें धान की ऐसी किस्में चुनने की सलाह दी गई है जो कम समय में जल्दी पककर तैयार हो जाती हैं।
इसके साथ ही, पौधों को सूखे के प्रभाव से बचाने और उनके भीतर सहनशक्ति बढ़ाने के लिए नर्सरी में 1 प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव करने को कहा गया है। आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और संकट के इस दौर में उत्पादन पर बुरा असर न पड़ने देने के लिए जिला परिषद सब्सिडी पर 500 टिलर मशीनें भी बांट रही है।
इसके अलावा, प्रशासन ने पहले ही तकनीकी ट्रेनिंग और El Nino जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ किसानों को कम दामों पर अच्छी क्वालिटी के बीज भी मुहैया कराए हैं ताकि खरीफ सीजन में फसलों का नुकसान कम से कम हो।
महाराष्ट्र में कम बारिश से स्थिति चिंताजनक
पूरे महाराष्ट्र में इस समय स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। जून के शुरुआती 15 दिनों में राज्य के भीतर सामान्य के मुकाबले सिर्फ 26 प्रतिशत ही बारिश दर्ज की गई है।
राज्य सरकार ने अपनी कैबिनेट बैठक में भी इस सूखे जैसे हालात की पूरी समीक्षा की। मंत्रिमंडल ने चिंता जताते हुए किसानों से अपील की है कि वे बुवाई का काम शुरू करने की जल्दबाजी बिल्कुल न करें।
बैठक में इस बात की भी चेतावनी दी गई कि बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है, इसलिए पानी का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर और सावधानी से किया जाना चाहिए।
अधिकारियों की मौसम पर नजर रखने की अपील
कृषि विभाग के अधिकारी लगातार फील्ड में रहकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं और उनसे मौसम के हर छोटे-बड़े अपडेट पर नजर रखने की अपील कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त बारिश के बिना जल्दबाजी में की गई बुवाई से बीज और फसल दोनों बर्बाद हो सकते हैं।
इसलिए किसानों के लिए यही बेहतर होगा कि वे थोड़ा और इंतजार करें, ताकि वे किसी भी तरह के बड़े आर्थिक नुकसान से बच सकें और अपनी मेहनत को सुरक्षित रख सकें।