‘100%’ क्लेम पर FSSAI और डाबर में विवाद, दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला; ₹150 करोड़ का स्टॉक खतरे में
FSSAI के “100%” क्लेम वाले ऑर्डर पर डाबर और रेगुलेटर आमने-सामने हैं। कंपनी दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची है और आरोप लगाया है कि फैसला बिना पूरा मौका दिए लिया गया। डाबर का दावा है कि इससे ₹150 करोड़ का स्टॉक खतरे में है और सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है।

In Short
- FSSAI के “100%” क्लेम वाले ऑर्डर के खिलाफ डाबर ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है और कुछ मैन्युफैक्चरर्स को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है।
- कंपनी का दावा है कि कार्रवाई से उसके करीब ₹150 करोड़ के स्टॉक पर खतरा है और 11 प्रमुख प्रोडक्ट्स पर असर पड़ा है।
- डाबर का कहना है कि मामला प्रोडक्ट की क्वालिटी या सेफ्टी का नहीं, बल्कि लेबल पर इस्तेमाल किए गए “100%” क्लेम की इंटरप्रिटेशन का है।
डाबर और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI के बीच “100%” क्लेम को लेकर विवाद अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। कंपनी ने FSSAI के उस ऑर्डर को चुनौती दी है, जिसमें कई प्रोडक्ट्स को “100% नेचुरल”, “100% प्योर” और ऐसे ही दूसरे क्लेम के साथ बेचने से रोक दिया गया है। डाबर का कहना है कि इस फैसले से उसके बिजनेस, रेप्युटेशन और रिटेल सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। अब मामला सिर्फ लेबल पर लिखे “100%” तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया, ₹150 करोड़ के स्टॉक और दूसरे मैन्युफैक्चरर्स को फायदा पहुंचाने के आरोप तक पहुंच गया है।
डाबर ने FSSAI पर मैन्युफैक्चरर्स को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, डाबर ने 6 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल की। कंपनी ने आरोप लगाया कि FSSAI का प्रोहिबिटरी ऑर्डर पब्लिक इंटरेस्ट में नहीं था और इससे कुछ दूसरे मैन्युफैक्चरर्स के बिजनेस इंटरेस्ट को फायदा मिल सकता है।
डाबर का कहना है कि इंडस्ट्री में “100%” जैसे क्लेम लंबे समय से इस्तेमाल होते रहे हैं। कंपनी ने सवाल उठाया कि FSSAI ने यह साफ नहीं किया कि किसी प्रोडक्ट पर “100%” लिखने से दूसरे मैन्युफैक्चरर्स के प्रोडक्ट्स की छवि कैसे खराब होती है।
₹150 करोड़ का स्टॉक खतरे में, 11 प्रोडक्ट्स पर असर
FSSAI की कार्रवाई डाबर के 11 प्रमुख प्रोडक्ट्स पर लागू हुई है। इनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और रियल एक्टिव कोकोनट वॉटर जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं।
कंपनी के मुताबिक, इस ऑर्डर के कारण करीब ₹150 करोड़ का इन्वेंट्री नष्ट होने के खतरे में है। डाबर ने यह भी कहा कि डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर कोल्ड प्रेस्ड सेसमे ऑयल जैसे कुछ प्रोडक्ट्स पर कभी “100%” क्लेम था ही नहीं, फिर भी उन्हें ऑर्डर में शामिल किया गया।
बिना नोटिस और सुनवाई के ऑर्डर जारी करने का आरोप
डाबर ने कोर्ट में कहा कि ऑर्डर जारी करने से पहले उसे शो-कॉज नोटिस, इम्प्रूवमेंट नोटिस या अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। कंपनी ने आरोप लगाया कि फैसला लेबल्स की ठीक से जांच किए बिना “मैकेनिकल मैनर” में लिया गया।
FSSAI के मुताबिक, डाबर के “100%” क्लेम मिसलीडिंग थे और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स रेगुलेशंस 2018 का उल्लंघन करते थे। वहीं डाबर का कहना है कि उसके लेबल्स लीगल और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के मुताबिक हैं और उसने कभी मिसलीडिंग क्लेम नहीं किया।
क्वालिटी या सेफ्टी पर सवाल नहीं, पहले ही हटाने शुरू कर दिए थे क्लेम
डाबर ने साफ किया कि FSSAI का नोटिस प्रोडक्ट की क्वालिटी, सेफ्टी, प्योरिटी या स्टैंडर्ड्स पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि प्रोडक्ट डिस्क्रिप्शन की इंटरप्रिटेशन से जुड़ा है।
कंपनी के मुताबिक, FSSAI ने 8 अप्रैल 2026 को भी एक प्रोडक्ट पर “100% प्योर” लिखे होने का आरोप लगाया था। डाबर ने तब जवाब दिया था कि उस प्रोडक्ट पर ऐसा क्लेम मौजूद नहीं था। कंपनी का कहना है कि वह प्रोहिबिटरी ऑर्डर आने से पहले ही लेबल्स, एडवरटाइजमेंट्स और वेबसाइट्स से ऐसे क्लेम हटाना शुरू कर चुकी थी।
ब्लिंकिट ने लिस्टिंग हटाईं, हिल्टन ने भी मांगी जानकारी
डाबर को यह ऑर्डर 3 अगस्त को शाम 7 बजे मिला था। कंपनी का कहना है कि FSSAI ने ऑर्डर को सोशल मीडिया पर पब्लिक किया और चैनल प्लेटफॉर्म्स को भी “100%” क्लेम वाले प्रोडक्ट्स न बेचने की सलाह दी।
इसके बाद ब्लिंकिट ने 4 अगस्त को ऐसे प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग डिसेबल कर दीं। कोर्ट फाइलिंग में शामिल कॉरेस्पॉन्डेंस के मुताबिक, हिल्टन होटल्स ने भी डाबर से प्रभावित प्रोडक्ट्स की जानकारी मांगी और मामला सुलझने तक उन्हें बाहर रखने का प्रस्ताव दिया। डाबर अब रेगुलेटर के साथ बातचीत करने के साथ अपने लीगल ऑप्शंस भी तलाश रही है।