भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता का निधन, लंबी बीमारी के बाद ली अंतिम सांस

आज रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह (Khanchandra Singh) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वे स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। रिंकू अपने पिता के बेहद करीब थे और अक्सर अपनी सफलता का श्रेय उन्हें ही देते थे।

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Image Credit: Rinku Singh Instagram Account

By Gaurav Kumar:

Rinku Singh Father death: भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह और उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आज रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह (Khanchandra Singh) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वे स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। रिंकू अपने पिता के बेहद करीब थे और अक्सर अपनी सफलता का श्रेय उन्हें ही देते थे।

लंबे समय से अस्पताल में थे भर्ती

खानचंद्र सिंह पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार थे। हालत बिगड़ने पर उन्हें ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के पीआरओ ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि रिंकू सिंह के पिता ने शुक्रवार (27 फरवरी) सुबह 5 बजे अंतिम सांस ली। वे अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में मैकेनिकल वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे।

डॉक्टरों के अनुसार, उनकी स्थिति काफी नाजुक थी और उन्हें लगातार रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जा रही थी, लेकिन कैंसर के चौथे स्टेज पर होने के कारण उनकी सेहत में सुधार नहीं हो सका।

खेल और परिवार के बीच की जद्दोजहद

पिता की खराब सेहत की जानकारी मिलते ही रिंकू सिंह टी20 वर्ल्ड कप के बीच टीम कैंप छोड़कर चेन्नई से दिल्ली पहुंच गए थे। परिवार के साथ कुछ समय बिताने के बाद, वे गुरुवार को टीम से वापस जुड़ गए थे।

हालांकि, शुक्रवार सुबह पिता के निधन की खबर मिलते ही रिंकू दोबारा चेन्नई से अलीगढ़ के लिए रवाना हो गए हैं। इस शोक के कारण उनके अगले कुछ मैचों में खेलने पर संशय बना हुआ है। जिम्बाब्वे के खिलाफ हुए मैच में भी वे प्लेइंग 11 का हिस्सा नहीं थे, उनकी जगह संजू सैमसन को टीम में शामिल किया गया था। मैदान पर रिंकू को केवल फील्डिंग करते हुए देखा गया था।

रिंकू के लिए चुनौतीपूर्ण समय

यह दौर रिंकू सिंह के लिए निजी और पेशेवर, दोनों ही मोर्चों पर काफी कठिन साबित हो रहा है। वर्ल्ड कप के दौरान एक तरफ जहां वे पिता की बीमारी से परेशान थे, वहीं दूसरी तरफ बल्लेबाजी में भी उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले।

निचले क्रम में आने की वजह से उन्हें गेंदें कम मिलीं। उन्होंने इस टूर्नामेंट की पांच पारियों में सिर्फ 24 रन बनाए हैं। पाकिस्तान के खिलाफ उनका 11 रनों का कैमियो जरूर प्रभावशाली रहा, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वे खाता भी नहीं खोल सके थे।

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