नारियल एक्सपोर्ट में फिर लौटी रौनक! गल्फ देशों से फिर बढ़ी मांग - ये चुनौतियां अब भी कायम
तमिलनाडु के पोल्लाची से नारियल एक्सपोर्ट में फिर सुधार दिखने लगा है। गल्फ देशों से मांग लौट रही है, जिससे किसानों और कारोबारियों को राहत मिली है। हालांकि माल भेजने का खर्च अब भी ज्यादा है, जिससे एक्सपोर्टरों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

In Short
- पोल्लाची से नारियल एक्सपोर्ट में गल्फ देशों की मांग लौटने से सुधार दिख रहा है।
- माल ढुलाई का खर्च अब भी ज्यादा है, जिससे एक्सपोर्टरों की चिंता बनी हुई है।
- एक्सपोर्ट रुकने और ज्यादा पैदावार से घरेलू बाजार में नारियल की कीमतें गिर गई हैं
Tamil Nadu coconut export: तमिलनाडु के पोल्लाची में नारियल का एक्सपोर्ट अब धीरे-धीरे फिर से शुरू हो गया है। पोल्लाची वैसे भी राज्य का सबसे बड़ा नारियल उगाने वाला इलाका है। डीडी इंडिया के रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में वेस्ट एशिया में तनाव की वजह से यहां से नारियल भेजना काफी कम हो गया था। लेकिन अब हालात थोड़ा संभलने लगे हैं, तो गल्फ देशों से दोबारा ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं।
यहां से ज्यादातर नारियल गल्फ देशों में ही जाता है। पिछले तीन महीनों में शिपमेंट काफी घट गया था, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान हुआ। अब जब मांग वापस आ रही है, तो बाजार में फिर से थोड़ी उम्मीद जगी है।
माल ढुलाई की ऊंची लागत अब भी बनी चुनौती
एक्सपोर्ट शुरू होने के बावजूद कारोबारियों की परेशानी खत्म नहीं हुई है। माल भेजने का खर्च अब भी नॉर्मल से काफी ज्यादा है। वेस्ट एशिया में तनाव के दौरान यह खर्च बहुत बढ़ गया था। अब इसमें कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन यह अभी भी पुराने स्तर पर नहीं लौटा है।
महंगे शिपिंग चार्ज और माल पहुंचने में देरी की वजह से एक्सपोर्टरों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। कई माल रास्ते में ही खराब हो गया और टाइम पर पहुंच भी नहीं पाया।
तीन महीने तक लगभग ठप रहा कारोबार
तनाव से पहले पोल्लाची इलाके के एक्सपोर्टर रोजाना कई कंटेनर नारियल गल्फ देशों को भेजते थे। यह माल कोच्चि पोर्ट के जरिए भेजा जाता था। लेकिन वेस्ट एशिया में हालात बिगड़ने के बाद करीब तीन महीने तक पोर्ट के जरिए एक्सपोर्ट लगभग रुका रहा।
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अब इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में एक्सपोर्ट धीरे-धीरे पहले जैसे हालात की तरफ लौट सकता है, क्योंकि गल्फ देशों से पूछताछ बढ़ रही है।
घरेलू बाजार में बढ़ी सप्लाई
एक्सपोर्ट रुकने का असर घरेलू बाजार पर भी दिखा। बाहर माल नहीं भेजा जा सका, तो देश के अंदर नारियल की सप्लाई बढ़ गई। इसके चलते कीमतों में बड़ी गिरावट आई है।
थोक कीमतें अब करीब 40,000 रुपये प्रति टन तक आ गई हैं, जबकि पिछले साल इसी समय कीमत करीब 65,000 रुपये प्रति टन थी। ज्यादा फसल आने की वजह से बाजार में नारियल की सप्लाई काफी बढ़ गई है।
मजदूरों की किल्लत और पानी का संकट बना किसानों की बड़ी चुनौती
नारियल की पैदावार अच्छी है, लेकिन मजदूरों की कमी बड़ी दिक्कत बनी हुई है। बाहर से आने वाले मजदूर कम हैं, इसलिए नारियल तोड़ने और उसका छिलका हटाने का काम धीमा पड़ गया है। इसी वजह से बाजार में नारियल धीरे-धीरे पहुंच रहा है और कीमतें ज्यादा नीचे नहीं गई हैं।
किसानों का कहना है कि अच्छी पैदावार अभी करीब दो महीने और चल सकती है। उसके बाद सीजन धीरे-धीरे कम होने लगेगा।
साथ ही पानी की कमी भी किसानों को परेशान कर रही है। कम बारिश होने से जमीन के नीचे पानी कम हो गया है। कई किसान अपने नारियल के पेड़ों को बचाने के लिए टैंकर से पानी मंगवा रहे हैं।