चारधाम जाने वालों के लिए जरूरी खबर! 2 नवंबर से हेलिकॉप्टर सेवाएं रोकने की तैयारी, जानें क्या है पूरा मामला
चारधाम यात्रा पर हेलिकॉप्टर से जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर है। बद्रीनाथ में छह लोगों की जान लेने वाले हादसे के बाद DGCA ने हर चार्टर हेलिकॉप्टर में दो पायलट अनिवार्य कर दिए हैं। लेकिन इस फैसले से ऑपरेटर नाराज हैं और 2 नवंबर से सेवाएं रोकने का प्रस्ताव दिया है। आखिर क्यों बढ़ा विवाद और यात्रियों पर क्या होगा असर?

In Short
- बद्रीनाथ में 30 अक्टूबर को हुए हेलिकॉप्टर हादसे में पायलट समेत 6 लोगों की मौत हुई थी।
- DGCA ने चार्टर हेलिकॉप्टर की उड़ानों में दो पायलट रखना अनिवार्य कर दिया है।
- 11 हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों ने 2 नवंबर से चारधाम चार्टर सेवाएं रोकने का प्रस्ताव दिया है।
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में हेलिकॉप्टर सेवाएं बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। 30 अक्टूबर को बद्रीनाथ में हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने चार्टर हेलिकॉप्टर में दो पायलट रखना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ 11 हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों ने 2 नवंबर 2026 से सेवाएं रोकने का प्रस्ताव दिया है। ऑपरेटरों का कहना है कि नए नियम से उनका खर्च इतना बढ़ जाएगा कि सेवाएं जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
बद्रीनाथ हादसे के बाद DGCA ने बदला नियम
30 अक्टूबर को बद्रीनाथ से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई थी।
हादसे के बाद DGCA ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चार्टर हेलिकॉप्टर की हर उड़ान में दो पायलट रखना अनिवार्य कर दिया। हालांकि, हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों ने इस नियम को लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
11 ऑपरेटरों ने दी सेवाएं रोकने की चेतावनी
31 अक्टूबर को 11 चार्टर हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों ने DGCA प्रमुख वीर विक्रम यादव को एक संयुक्त पत्र लिखा।
इसमें कहा गया कि कंपनियों से पर्याप्त बातचीत किए बिना दो पायलट रखने का नियम लागू किया गया है। ऑपरेटरों के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में इस नियम का पालन करना आर्थिक रूप से मुश्किल है।
ऑपरेटरों ने 2 नवंबर से चारधाम चार्टर हेलिकॉप्टर सेवाएं रोकने का प्रस्ताव दिया है। उनका कहना है कि जब तक नियम की समीक्षा नहीं होती और कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकलता, तब तक सेवाएं जारी रखना मुश्किल होगा।
दो पायलट रखने से कितना बढ़ेगा खर्च?
ऑपरेटरों का कहना है कि हर उड़ान में दो पायलट रखने से कर्मचारियों की जरूरत बढ़ेगी। इसके अलावा पायलटों के रहने, यात्रा और दूसरी व्यवस्थाओं पर भी ज्यादा खर्च आएगा।
कंपनियों के मुताबिक, मौजूदा किराए और सीमित मुनाफे को देखते हुए यह अतिरिक्त खर्च उठाना मुश्किल है। वहीं, इसका पूरा बोझ यात्रियों पर डालना भी व्यावहारिक नहीं होगा।
DGCA से क्या मांग कर रहे ऑपरेटर?
हेलिकॉप्टर कंपनियों ने DGCA और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) से नए नियम पर दोबारा विचार करने की अपील की है।
उनका कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन नियम ऐसे होने चाहिए जिन्हें कंपनियां व्यावहारिक रूप से लागू कर सकें।
फिलहाल ऑपरेटरों ने सेवाएं रोकने का प्रस्ताव दिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी हेलिकॉप्टर सेवाएं बंद होने की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। आगे की स्थिति अधिकारियों और ऑपरेटरों के बीच बातचीत पर निर्भर करेगी।