आपकी ITR और EPFO जानकारी कितनी सुरक्षित? प्राइवेट कंपनियों के डेटा इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट का एक्शन
क्या आपकी नौकरी और कमाई से जुड़ी जानकारी किसी प्राइवेट कंपनी के हाथ लग सकती है? सुप्रीम कोर्ट में उठे एक मामले ने ITR PF UAN और PAN डेटा की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कोर्ट ने सरकार से जांच करने को कहा है कि आखिर संवेदनशील डेटा तक पहुंच कैसे बन रही है।

In Short
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी कंपनियों द्वारा ITR और EPFO से जुड़े संवेदनशील डेटा के कथित इस्तेमाल पर सरकार से जांच करने को कहा।
- कोर्ट ने साफ किया कि किसी कंपनी के अवैध रूप से डेटा एक्सेस करने की बात अभी साबित नहीं हुई है।
- सरकार को चार महीने के भीतर आरोपों की जांच कर डेटा सुरक्षा और गलत इस्तेमाल रोकने के उपायों पर विचार करने को कहा गया है।
क्या कोई प्राइवेट कंपनी आपके इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR या प्रोविडेंट फंड रिकॉर्ड की जानकारी हासिल कर सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से उन आरोपों की जांच करने को कहा है जिनमें दावा किया गया है कि निजी वेरिफिकेशन कंपनियां लोगों के रोजगार और वित्तीय डेटा तक पहुंच रही हैं और उसका कमर्शियल इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि कोर्ट ने किसी खास कंपनी को दोषी नहीं ठहराया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने निजी संस्थाओं द्वारा संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी के कथित गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह इस मामले की जांच करे और डोमेन एक्सपर्ट्स की मदद से समस्या का समाधान तलाशने पर विचार करे।
सरकार और संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता की शिकायतों पर विचार कर जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। यह प्रक्रिया संभव हो तो चार महीने के भीतर पूरी करने की बात कही गई है।
क्या हैं आरोप?
PIL में आरोप लगाया गया है कि कुछ निजी वेरिफिकेशन कंपनियां EPFO और UAN से जुड़े रोजगार डेटा और PAN से जुड़ी वित्तीय जानकारी तक पहुंच रही हैं या उसका कमर्शियल इस्तेमाल कर रही हैं।
याचिकाकर्ता ने ऐसी सेवाओं की ओर इशारा किया जो EPFO पासबुक डेटा, Form 26AS और इनकम टैक्स रिटर्न से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने या वेरिफाई करने का दावा करती हैं। हालांकि ये अभी आरोप हैं और अदालत ने इन्हें साबित तथ्य नहीं माना है।
किस तरह का डेटा है शामिल?
ITR में टैक्सपेयर द्वारा इनकम टैक्स विभाग को दी गई वित्तीय जानकारी होती है। इसी तरह Form 26AS और Annual Information Statement में आय और वित्तीय लेनदेन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हो सकती है।
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EPFO रिकॉर्ड कर्मचारी के प्रोविडेंट फंड खाते से जुड़े होते हैं। UAN अलग-अलग नौकरियों में PF खातों को जोड़ने में मदद करता है और इससे किसी व्यक्ति की रोजगार हिस्ट्री के कुछ हिस्से जुड़े हो सकते हैं।
क्या कंपनियां सीधे डेटा देख सकती हैं?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि कोई भी प्राइवेट कंपनी सिर्फ PAN या UAN जानकर आपका पूरा ITR या PF रिकॉर्ड देख सकती है।
अलग-अलग सरकारी डेटाबेस में अपने एक्सेस और ऑथेंटिकेशन सिस्टम होते हैं। कोर्ट के सामने सवाल यह है कि क्या निजी वेरिफिकेशन संस्थाएं किसी तकनीकी सिस्टम, इंटरमीडियरी या दूसरे रास्ते से संवेदनशील जानकारी हासिल कर रही हैं।
कंपनियां वेरिफिकेशन क्यों करती हैं?
भर्ती प्रक्रिया में बैकग्राउंड वेरिफिकेशन आम बात है। कंपनियां उम्मीदवार की पिछली नौकरी या दी गई जानकारी को जांच सकती हैं। बैंक और बीमा कंपनियों को भी कुछ जानकारी वेरिफाई करने की जरूरत पड़ सकती है।
लेकिन सवाल यह है कि वेरिफिकेशन कैसे किया जा रहा है और निजी कंपनी को कितनी जानकारी तक पहुंच मिलनी चाहिए। पिछली नौकरी की पुष्टि करना और सरकार को दिए गए संवेदनशील रिकॉर्ड हासिल करना दो अलग बातें हैं।
आगे क्या होगा?
अब सरकार और संबंधित अधिकारियों को यह देखना होगा कि क्या ऐसी पहुंच वास्तव में हो रही है, इसका तरीका क्या है और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का आदेश यह साबित नहीं करता कि निजी कंपनियां खुले तौर पर सभी लोगों के ITR या EPFO रिकॉर्ड देख रही हैं। कोर्ट ने सिर्फ गंभीर आरोपों की जांच और संभावित गलत इस्तेमाल रोकने के उपाय करने को कहा है।