कैबिनेट मीटिंग में 7 बड़े फैसले, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से लेकर वाराणसी के दो एलिवेटेड कॉरिडोर तक सात बड़े फैसलों को मंजूरी दी है।इन योजनाओं पर कितनी रकम खर्च होगी, वाराणसी के लोगों को क्या फायदा मिलेगा और भारत की चिप मैन्युफैक्चरिंग योजना कैसे आगे बढ़ेगी, पूरी जानकारी इस स्टोरी में पढ़िए।
In Short
- कैबिनेट ने 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मंजूरी दी।
- वाराणसी में 43.218 किलोमीटर लंबे छह और चार लेन के दो एलिवेटेड कॉरिडोर बनेंगे।
- बैठक में 62,500 करोड़ रुपये के मोबाइल कॉरिडोर समेत कुल सात बड़े फैसले लिए गए।
Semiconductor Mission 2.0: केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में सात बड़े फैसले लिए गए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद इन फैसलों की जानकारी दी। इनमें सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, मोबाइल कॉरिडोर और वाराणसी में दो नए एलिवेटेड कॉरिडोर से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इन फैसलों से एक तरफ देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ वाराणसी में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
वाराणसी को मिलेंगे दो एलिवेटेड कॉरिडोर
वाराणसी शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम करने के लिए दो एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की मंजूरी दी गई है। ये कॉरिडोर वरुणा नदी के किनारे तैयार किए जाएंगे। इनमें छह लेन और चार लेन वाले हिस्से शामिल होंगे।
इस प्रोजेक्ट के तहत नेशनल हाईवे-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ा जाएगा। दोनों सड़कों को जोड़ने वाले कॉरिडोर की कुल लंबाई 43.218 किलोमीटर होगी। सरकार का मानना है कि इससे शहर में आने-जाने वाले लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी और जाम का दबाव कम हो सकेगा।
प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 10,998.32 करोड़ रुपये
वाराणसी में बनने वाले इन एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल अनुमानित लागत 10,998.32 करोड़ रुपये है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस परियोजना के जरिए काशी में नया इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।
कॉरिडोर बनने से एनएच-31 और रिंग रोड के बीच सीधा संपर्क तैयार होगा। सरकार ने इस योजना को शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से मंजूरी दी है।
सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को हरी झंडी
कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 यानी सेमीकॉन 2.0 को भी मंजूरी दी है। इस योजना के लिए कुल 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है।
इस मिशन का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े पूरे सिस्टम को मजबूत करना है। सरकार देश को ग्लोबल सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ी जगह दिलाना चाहती है और इस क्षेत्र में भारत की मजबूत पहचान बनाना चाहती है।
मोबाइल कॉरिडोर को भी मंजूरी
कैबिनेट की बैठक में 62,500 करोड़ रुपये के मोबाइल कॉरिडोर को भी हरी झंडी दी गई है। बैठक में कुल सात बड़े फैसले लिए गए हैं। सरकार ने इन फैसलों के जरिए मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपना फोकस बढ़ाने का संकेत दिया है।