BT Infra Summit 2026: रेलवे के बड़े प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार, IRFC करेगा इंफ्रा और ट्रेन फंडिंग पर फोकस
भारतीय रेलवे आने वाले वर्षों में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम करने जा रहा है। हाई स्पीड रेल से लेकर फ्रेट कॉरिडोर तक, इन योजनाओं के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी। Business Today Infrastructure Summit 2026 में IRFC के CMD मनोज कुमार दुबे ने बताया कि कंपनी रेलवे की नई इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने के लिए फंडिंग पर फोकस करेगी।

भारतीय रेलवे में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हो रहा है। ऐसे में रेलवे के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग की जरूरत भी बढ़ रही है। इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) के CMD मनोज कुमार दुबे ने कहा है कि कंपनी रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, ट्रेन-कोच जैसे रोलिंग स्टॉक और रेलवे से जुड़े कारोबारों की फंडिंग पर ध्यान देगी।
हाई स्पीड रेल और फ्रेट कॉरिडोर के लिए बड़ी फंडिंग
Business Today Infrastructure Summit 2026 में मनोज कुमार दुबे ने कहा कि पिछले 10 सालों में भारतीय रेलवे की क्षमता बढ़ाने पर काफी काम हुआ है। अब रेलवे के कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी।
उन्होंने बताया कि रेलवे के सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर और ईस्ट-वेस्ट फ्रेट कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है। इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए कुल करीब 20 लाख करोड़ रुपये की फंडिंग की जरूरत होगी।
दुबे के मुताबिक, सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए करीब 16 लाख करोड़ रुपये और फ्रेट कॉरिडोर के लिए करीब 4 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। IRFC इन प्रोजेक्ट्स के लिए बेहतर फाइनेंसिंग समाधान तैयार करने पर फोकस करेगा।
रेलवे की ट्रेन और कोच की फंडिंग भी रहेगी प्राथमिकता
IRFC के CMD ने बताया कि कंपनी का दूसरा बड़ा फोकस रेलवे के रोलिंग स्टॉक की फंडिंग पर रहेगा। रोलिंग स्टॉक में ट्रेन, कोच और रेलवे के दूसरे उपकरण शामिल होते हैं।
उन्होंने कहा कि रेलवे के 80 फीसदी से ज्यादा रोलिंग स्टॉक की फंडिंग IRFC के जरिए होती है।
इसके अलावा IRFC उन कंपनियों और संस्थाओं को भी फंडिंग देता रहेगा, जो रेलवे के साथ काम करती हैं। इसमें रेलवे को बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनियां और कुछ पोर्ट्स भी शामिल हैं।
ग्रीन एनर्जी और लॉजिस्टिक्स पर भी ध्यान
मनोज कुमार दुबे ने कहा कि रेलवे में ग्रीन एनर्जी की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे की 99.7 फीसदी ट्रेनें अब इलेक्ट्रिफाइड हो चुकी हैं। अब अगला कदम रेलवे को ग्रीन इलेक्ट्रिफिकेशन की तरफ ले जाना है।
IRFC मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स को भी फंडिंग देने में रुचि रखेगी।
3 साल में दिल्ली-मुंबई सफर हो सकता है 8 घंटे में
दुबे ने बताया कि IRFC कम से कम लागत पर फंड जुटाने की कोशिश करता है। कंपनी के ओवरहेड खर्च कम हैं और उसके पास कोई नॉन परफॉर्मिंग एसेट (NPA) नहीं है। इसका फायदा बाजार तक पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी ज्यादातर सामान अब भारत में ही बनाए जा रहे हैं। IRFC का फोकस "Fund in India" पर है और कंपनी राज्यों की संस्थाओं को जरूरत के हिसाब से फाइनेंसिंग समाधान देती है।
सेमी हाई स्पीड ट्रेनों को लेकर दुबे ने कहा कि आने वाले तीन सालों में दिल्ली से मुंबई का सफर घटकर अधिकतम 8 घंटे तक हो सकता है। IRFC भारतीय रेलवे की समर्पित फंडिंग एजेंसी है।